रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन द्वारा सैन्य कार्रवाई के आदेश के बाद यूक्रेन पर ताबड़तोड़ मिसाइल से हमले किए जा रहे हैं। रूस ने यूक्रेन के कई सैन्य ठिकाने को तबाह कर दिया है। वहीं यूक्रेनी सेना ने भी दावा किया है कि उसने लुहान्स्क क्षेत्र में पांच रूसी विमानों और एक रूसी हेलीकॉप्टर को मार गिराया गया है। इन सब के बीच अब कई लोगों के मन में सवाल यह उठ रहा है कि आखिर रूस की विशाल सेना के सामने यूक्रेन कितनी देर टिक सकेगा। दोनों सेनाओं में ज्यादा ताकतवर कौन है। आइए बताते हैं आखिर कौन किसपर पड़ेगा भारी...
पश्चिमी देश बन सकते हैं यूक्रेन की ताकत
यूक्रेन के रक्षा मंत्री ओलेक्सी रेजनिकोव विभिन्न पश्चिमी शक्तियों से आने वाली सैन्य आपूर्ति को ट्वीट कर रहे थे, जिसमें जेवलिन मिसाइलों के अलावा मानव-पोर्टेबल सतह से हवा में मार करने वाली स्टिंगर मिसाइल, टन गोला बारूद, राइफल, ऑप्टिकल दृष्टि के साथ मशीनगन, रात भी शामिल थी। दृष्टि और निगरानी प्रणाली, और अन्य सैन्य उपकरण।
अमेरिकी टैंक रोधी मिसाइलें बन सकती हैं यूक्रेन की ताकत
हालांकि यूक्रेन अमेरिका से ली गई टैंक रोधी मिसाइलों से खुद को लैस कर रहा था। यूक्रेन को दिसंबर से अब तक सैकड़ों भाला मिसाइलें दी जा चुकी हैं, जिससे यूक्रेन की सेना को रूसी टैंकों को निशाना बनाने में मदद मिलेगी। यह एक मैन-पोर्टेबल फायर-एंड-फॉरगेट एंटी टैंक मिसाइल है, जिसका अर्थ है कि एक सैनिक इसे अपने कंधे से फायर कर सकता है, और इसकी स्वचालित इन्फ्रारेड मार्गदर्शन प्रणाली ऊपर से टैंकों को लक्षित करेगी, जो कि किसी भी टैंक का सबसे कमजोर हिस्सा है।
यदि नाटो ने यूक्रेन का साथ दिया तो?
जिस तरह से यूक्रेन नॉटो के करीब है और नाटो के कई देश यूक्रेन से लगी सीमा पर अपनी सेना भेज रहे हैं। यूक्रेन के पड़ोसी देशों में नाटो देशों ने सैनिक, हथियार और सैन्य वाहन पहुंचाने शुरू कर दिए हैं। उससे ऐसा लगता है कि नाटो यूक्रेन का साथ दे रहा है। ऐसे में यदि नाटो ने उसका साथ दिया तो यह रूस पर भारी पड़ सकता है।
नाटो संगठन में 30 देश हैं। नाटो के अंतर्राष्ट्रीय सैन्य गठबंधन का मूल सिद्धांत इसकी सामूहिक रक्षा प्रणाली है। संगठन के नियम के अनुसार अगर कोई देश सदस्य देशों पर हमला करता है तो उसे पूरे संगठन पर हमला माना जाएगा। इस आधार पर सभी देश उसके साथ होंगे। हालांकि यूक्रेन नाटो का सदस्य नहीं है, लेकिन नाटो चाहे तो वह यूक्रेन का साथ दे सकता है।
ब्रिटेन, यूक्रेन को टैंक रोधी हथियार और बख्तरबंद गाड़ियां भी मुहैया करा रहा है। वहीं पोलैंड ने कहा है कि वह यूक्रेन को गैस और तोपखाने गोला बारूद, मोर्टार, पोर्टेबल वायु रक्षा प्रणाली, निगरानी ड्रोन और हथियारों की आपूर्ति के साथ-साथ मानवीय और आर्थिक सहायता भी देगा। नाटो सदस्य देश रोमानिया की सीमा यूक्रेन से लगती है। रोमानिया 2004 से ही इसका सदस्य है। यहां अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस जैसे देशों की सेनाएं मौजूद हैं।