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Russia-Ukraine War: 'अनप्रिडिक्टेबल' ट्रंप राज में क्या पुतिन मनाएंगे जीत का जश्न? यूक्रेन में सन्नाटा

सार

Russia-Ukraine War: राष्ट्रपति ट्रंप अभी यूक्रेन-रूस के बीच में युद्ध को रुकवाने पर 'फोकस' कर रहे हैं। ट्रंप की इस मुहिम को लेकर फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों संवेदनशील हैं। उन्होंने चर्चा के उच्च स्तरीय बैठक बुलाई है।
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क्या पुतिन मनाएंगे जीत का जश्न? यूक्रेन में सन्नाटा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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ट्रंप-2.0 में भी राष्ट्रपति डोनाल्ड जे. ट्रंप 'अनप्रिडिक्टेबल' बने हैं। चीन चुप है। रूस को उम्मीद है, यूक्रेन में सन्नाटा। जर्मनी, फ्रांस जैसे देश हक्का-बक्का। राष्ट्रपति ट्रंप अभी अमेरिका के दोस्तों को झाड़ने और दुश्मनों को पुचकारने में जुटे हैं। क्या ऐसे में रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन अपनी बड़ी जीत का जश्न मनाएंगे?
  • चीन चुप, दुश्मनों से प्रेम और दोस्तों को झाड़ रहे हैं राष्ट्रपति ट्रंप
  • रूस से क्या बात करेगा ट्रंप प्रशासन? यूक्रेन में सन्नाटा
  • जर्मनी, फ्रांस, मैक्सिको रख रहे हैं बारीक नजर
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विदेश मामलों के जानकार वरिष्ठ पत्रकार रंजीत कुमार कहते हैं कि सच में बड़े उथल-पुथल का दौर चल रहा है। यह कहना मुश्किल है कि आगे क्या होने वाला है? कुमार कहते हैं कि एक चीज साफ दिखाई दे रही है कि राष्ट्रपति ट्रंप अभी यूक्रेन-रूस के बीच में युद्ध को रुकवाने पर 'फोकस' कर रहे हैं। डोनाल्ड ट्रंप की इस मुहिम को लेकर फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों संवेदनशील हैं। उन्होंने चर्चा के उच्च स्तरीय बैठक बुलाई है।

रूस और चीन खुश हैं, चुप हैं
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग शांत हैं। चीन अभी कुछ नहीं बोल रहा है। राष्ट्रपति ट्रंप जबसे राष्ट्रपति बने हैं, हर दिन कुछ न कुछ बोल रहे हैं। ट्रंप के 'अनप्रिडिक्टेबल मूव' को लेकर दुनिया में उथल-पुथल का माहौल है। जर्मनी और फ्रांस के पास भी चिंता के लिए कुछ है। मैक्सिको को भी काफी कुछ समझ में नहीं आ रहा है। लेकिन दिलचस्प है कि जिस चीन से अमेरिका ने ट्रेड वॉर शुरू किया था, राष्ट्रपति पुतिन उसको लेकर अभी कोई चिंता पैदा करने वाला बयान नहीं दे रहे हैं। वह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सामने ब्रिक्स(ब्राजील, रूस,भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका ) के संगठन की धज्जियां उड़ाने से नहीं चूक रहे हैं। यह सब तब हो रहा है, जब क्रेमलिन(रूस) और वाशिंगटन(अमेरिका) के वार्ताकार यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने, द्वीपक्षीय रिश्तों की कड़वाहट कम करके इसे सौहार्दपूर्ण रास्ते पर लाने के लिए वार्ता की मेज पर आने की तैयारी कर रहे हैं। अमेरिका के रक्षा मंत्री एंड्री बेलौसोव, विदेश मंत्री मार्को रूबियो और रूस के विदेश मंत्री सर्गे लावरोव इसकी केमिट्री बना रहे हैं। अमेरिका  के रक्षा मंत्री पहले ही कह चुके हैं कि यूक्रेन को नाटो में नहीं लेंगे। राष्ट्रपति ट्रंप यूक्रेन का खनिज मांग रहे हैं और रूस से समझौते और शांति की बात कर रहे हैं।
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.....तो क्या पुतिन जीतने जा रहे हैं बड़ी लड़ाई, दुनिया में निखरेगी छवि?
यूक्रेन के राष्ट्राध्यक्ष वोलोदिमीर जेलेंस्की ने साफ कहा है कि वह अमेरिका और रूस के बीच में उनके देश को लेकर हुए वार्ता के परिणामों को स्वीकार नहीं करेंगे। जेलेंस्की के लिए यह प्रगति बड़ा झटका है। इसमें अमेरिका के खास पिछलग्गू देश ब्रिटेन की छवि भी फंस रही है। लेकिन अमेरिका और रूस दोनों ने घोषणा कर दी है कि कल संयुक्त अरब अमीरात में उसके विदेश मंत्री मार्को रूबियो और सर्गेई लावरोव मिलेंगे। बातचीत होगी। अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार माइक वाल्ट्ज और मध्य पूर्व के दूत स्टीव विटकॉफ भी वहां होंगे। रूस का भी उच्चस्तरीय प्रतिनिधि मंडल वहां रहेगा। दुनिया की निगाह इस वार्ता पर टिक गई है। इस वार्ता का उद्देश्य अमेरिका और रूस के पटरी से उतरे रिश्ते को बहाल करना और रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने का रास्ता निकालना होगा। माना जा रहा है कि इस वार्ता के बाद फरवरी के अंतिम सप्ताह में राष्ट्रपति ट्रंप और पुतिन भी रू-ब-रू हाथ मिलाएंगे। इससे पहले ट्रंप और पुतिन ने 12 फरवरी को फोन पर बात की थी। सामरिक और रणनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि राष्ट्रपति पुतिन को भी इस समय का बेसब्री से इंतजार है।

आखिर ट्रंप क्या चाहते हैं?
राष्ट्रपति ट्रंप लगातार यूक्रेन-रूस के बीच में छिड़े युद्ध की आलोचना करते आए हैं। जब ब्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन में रूस की सेना के घुसने का आदेश दे दिया था तो राष्ट्रपति ट्रंप ने तब पुतिन को जीनियस कहा था। राष्ट्रपति बनने के बाद भी उन्होंने इस युद्ध के छिड़ने को अमेरिकी विदेश नीति की विफलता करार दिया था। राष्ट्रपति ट्रंप इस्राइल के साथ हमास के युद्ध छिड़ने के तरीके से भी असमति जताई थी। चीन के साथ अमेरिका की नीति के आलोचक रहे और यूरोप के साथ अमेरिका के संबंध की दिशा में बाइडेन प्रशासन से सहमत नहीं थे। ऐसा माना जा रहा है कि ट्रंप की कोशिश दुनिया में सीधे तौर पर चल रहे टकराव और युद्ध को समाप्त करने की है। वह इस नीति को आगे बढ़ाकर ग्रेट अमेरिका का सपना देखना चाहते हैं। उनका अमेरिकावाद जैसे को तैसा वाले आर्थिक व्यवहार वाला महसूस होता है। उन्होंने नाटो संगठन की मौजूदा स्थिति से असहमति जताई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन से अमेरिका ने हाथ खींच लिया और पेरिस की जलवायु परिवर्तन की शर्त से अपने देश को किनारे ले लिया है। ट्रंप का टैरिफ वॉर दुनिया में उथल पुथल मचाए है और मेक इन इंडिया, इनवेस्ट इन अमेरिका और ट्रेड इन डॉलर का जोर दिखा रहे हैं।
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