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Russia-Ukraine War: अमेरिका और ब्रिटेन कहीं मदद न घटा दें, ये सोच कर चिंतित हैं यूक्रेन के अधिकारी

Thu, 27 Oct 2022 06:29 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कीव

सार

Russia-Ukraine War: ब्रिटेन में ऋषि सुनक के प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद उनकी अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन से फोन पर बातचीत हुई। इस दौरान दोनों ने यूक्रेन के पक्ष में काम करते रहने के महत्त्व पर जोर दिया...
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Russia-Ukraine War: Rishi Sunak and Joe Biden - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
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खबर है कि खेरसोन इलाके में यूक्रेन की सेना एक बड़ा हमला करने की तैयारी में है। यह इलाका उन क्षेत्रों के करीब है, जिन्हें हाल में जनमत संग्रह के बाद रूस ने अपने में मिला लिया था। बताया जाता है कि वहां यूक्रेनी हमले का मुकाबला करने के लिए रूसी सेना ने भी जोरदार मोर्चेबंदी की है। इस बीच यूक्रेन की राजधानी में इस युद्ध में यूक्रेन के दो सबसे बड़े समर्थक रहे देशों की अंदरूनी राजनीति को लेकर चिंता गहरा गई है। कई जानकारों को आशंका है कि उन देशों की घटनाओं का असर यूक्रेन को मिल रही मदद पर पड़ सकता है।

अमेरिका में सत्ताधारी डेमोक्रेटिक पार्टी के 30 सांसदों ने मंगलवार को राष्ट्रपति जो बाइडन को एक पत्र सौंप कर उनसे युद्ध खत्म कराने के लिए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से सीधी बातचीत करने का अनुरोध किया था। हालांकि इसको लेकर देश में हुई उलटी प्रतिक्रिया के बाद ‘प्रोग्रेसिव गुट’ के इन सांसदों ने पत्र वापस ले लिया, लेकिन उससे अमेरिका में इस मुद्दे पर सहमति टूटने के संकेत मिले हैं। इस बीच ब्रिटेन में ऋषि सुनक प्रधानमंत्री बने हैं, जिनकी प्राथमिकता देश की अर्थव्यवस्था को सुधारना है। ऐसे में ये संभावना जताई गई है कि सरकारी खर्च घटाने की कोशिश में वे यूक्रेन की सहायता में कटौती कर सकते हैं।

चिंता का एक और कारण अमेरिका के मध्यावधि चुनावों में सत्ताधारी डेमोक्रेटिक पार्टी की बिगड़ रही संभावनाएं भी हैं। अंदेशा है कि अगर रिपब्लिकन पार्टी का अमेरिकी कांग्रेस (संसद) के दोनों सदनों में बहुमत हो गया, तो राष्ट्रपति जो बाइडन के लिए यूक्रेन के लिए बार-बार सहायता राशि को मंजूर कराना अभी जितना आसान नहीं रह जाएगा।

समझा जाता है कि अगर अमेरिका और ब्रिटेन ने सहायता घटाई, तो उससे यूक्रेन की युद्ध योजना को गहरा झटका लगेगा। थिंक टैंक कियेल इंस्टीट्यूट फॉर वर्ल्ड इकोनॉमी के आंकड़ों के मुताबिक इस वर्ष 24 जनवरी से तीन अक्तूबर के बीच अमेरिका ने यूक्रेन के युद्ध प्रयासों के लिए 27 बिलियन यूरो की सहायता घोषित की। उधर ब्रिटेन ने 3.74 यूरो की सहायता दी है। यूरोपियन यूनियन के संस्थान इन दोनों से बहुत पीछे है, जहां से यूक्रेन को 2.5 बिलियन यूरो की मदद का वादा मिला है। पोलैंड ने 1.82 बिलियन यूरो कीमत के हथियारों की सप्लाई की है। मानवीय सहायता में भी अमेरिका और ब्रिटेन सबसे आगे रहे हैं।

ब्रिटेन में ऋषि सुनक के प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद उनकी अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन से फोन पर बातचीत हुई। इस दौरान दोनों ने यूक्रेन के पक्ष में काम करते रहने के महत्त्व पर जोर दिया। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदीर जेलेंस्की से फोन पर बातचीत के दौरान सुनक ने यूक्रेन के लिए सहायता जारी रखने का वादा किया। इसके बावजूद यहां यह सवाल उठाया गया है कि जब सुनक सरकार ने ब्रिटेन में 40 बिलियन पाउंड के राजकोषीय घाटे को पाटने को अपनी प्राथमिकता बनाई है, तब क्या वह यूक्रेन को पर्याप्त सहायता दे पाएगी।

उधर अमेरिका में हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव में रिपब्लिकन पार्टी के नेता केविन मैकार्थी ने पिछले हफ्ते कहा था कि जिस समय देश के लोग मंदी का सामना कर रहे हैं, तब यूक्रेन के लिए ब्लैंक चेक काटते रहना संभव नहीं है। इस टिप्पणी ने यहां गहरी चिंता पैदा की है। विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका और ब्रिटेन के रुख को लेकर ये चिंताएं उस समय खड़ी हुई हैं, जब रूस ने अपना हमला काफी तेज कर रखा है।

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