रूस की सेना ने कहा है कि उसने विस्फोटक सामग्री बनाने वाली यूक्रेन की एक फैक्टरी, कई तोपखानों और सैकड़ों अन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। रूसी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता मेजर जनरल इगोर कोनाशेनकोव ने रविवार को कहा कि सेना ने मध्य यूक्रेन में नीप्रो क्षेत्र में पावलोहराद के पास विस्फोटक सामग्री बनाने वाली एक फैक्टरी को नष्ट करने के लिए मिसाइल से हमला किया।
कोनाशेनकोव ने कहा कि रूसी सेना ने खारकीव क्षेत्र के बरविंकोव, नोवा दिमित्रिवका, इवानिवका, हुसारिवका और वेल्यका कोमिशुवाखा में कई तोपखानों पर हमले किए। उन्होंने कहा कि रूसी तोपों ने रात भर में 423 यूक्रेनी ठिकानों को निशाना बनाया और रूसी युद्धक विमानों ने 26 यूक्रेनी सैन्य ठिकानों को नष्ट कर दिया।
स्टील प्लांट पर रूसी सेना ने भारी बमबारी की
मैरियूपोल में घेराबंदी में रखे एक स्टील प्लांट पर रूसी सेना ने भारी बमबारी की। यहां करीब दो हजार यूक्रेनी सैनिकों का मोर्चा तोड़ने की कोशिशें इन हमलों से तेज की गई। यूक्रेन ने रविवार को बताया कि रूस दो महीने से मैरियूपोल को पाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन उसे बड़ा नुकसान हुआ है।
प्लांट में मौजूद सैनिक अजोव बटालियन के बताए जा रहे हैं, जो यूक्रेन के कट्टर दक्षिणपंथियों ने बनाई है। रूस का आरोप है कि यह बटालियन नाजीवादियों ने बनाई है। यूक्रेनी सेना के प्रवक्ता ओलेक्सांडर श्तुपन के अनुसार रूस ने स्टील प्लांट पर हवाई हमले किए और कई मिसाइलें दागीं। रविवार को ही लुहांस्क के गवर्नर सरहिय हाईदे ने बताया कि शहर पर हुए हमले में 8 नागरिक मारे गए हैं। रूस ने यूक्रेन की राजधानी कीव पर चढ़ाई से पीछे हटने के बाद डोनबास पर भी कब्जे की कोशिशें तेज की हैं।
27 फरवरी से सूरज-आसमान नहीं देखे
स्टील प्लांट में बनी सुरंगों में कई नागरिकों ने भी शरण ली है। इनका एक वीडियो सामने आया, जिसमें अजोव सैनिक 20-25 महिलाओं व बच्चों को चॉकलेट बांट रहे हैं। इनमें शामिल एक लड़की बता रही है कि 27 फरवरी से उन्हाेंने यहां शरण ले रखी है, उन्हें तब से ही सूरज और आसमान देखने को नहीं मिले हैं। वीडियो बृहस्पतिवार का बताया गया है।
सेटन-2 तैनात करेगा रूस
रूस ने घोषणा की है कि वह अपनी सेटन-2 मिसाइल जल्द तैनात करेगा। यह मिसाइल परमाणु क्षमता युक्त है और मारक क्षमता 18 हजार किमी बताई जाती है।
रोमानिया से एयरलिफ्ट किए जाएंगे वंदे भारत ट्रेनों के व्हील
वंदे भारत ट्रेनों के सैकड़ों व्हील सेट रूस से युद्ध के चलते यूक्रेन की एक कंपनी में अटके थे। सूत्रों का कहना है कि अब ये 128 व्हील सड़क मार्ग से पड़ोसी मुल्क रोमानिया पहुंचाए गए हैं। इन्हें अगले महीने एयरलिफ्ट कर भारत लाया जाएगा। सूत्रों का कहना है कि इस साल के अंत तक देश में प्रमुख रूटों पर 75 सेमी हाई स्पीड वाली ट्रेनें शुरू करने का लक्ष्य पूरा करने के लिए अब चेक रिपब्लिक, पोलैंड और अमेरिका को भी व्हील के आर्डर दिए गए हैं।
उनका कहना है कि भारत चीन को भी आर्डर दे सकता है। यूक्रेन वंदे भारत जैसी ट्रेनों के व्हील के सबसे बड़े आपूर्तिकर्ताओं में से एक है। व्हील बनाने वाली कंपनी के ज्यादातर कर्मचारी-अधिकारी रूस से मुकाबले के लिए जंग के मैदान में हैं। कंपनी उत्पादन बंद कर चुकी है। ऐसे में इस साल दर्जनों नई वंदे भारत ट्रेनों को शुरू करने की रेलवे की योजना संकट में पड़ सकती है। रेलवे ने 16 मिलियन डॉलर की लागत से 36000 व्हील के निर्माण का आर्डर यूक्रेन की एक कंपनी को दिया था। सूत्रों के मुताबिक, भुगतान लेटर ऑफ क्रेडिट से किया गया था। इन्हें लाने में युद्ध आड़े आ गया। विदेश और रेलवे मंत्रालय की कोशिशों से दो ट्रेनों के ट्रायल के लिए 128 व्हील सड़क के जरिये रोमानिया पहुंच चुके हैं।
वंदे भारत ट्रेनों के विनिर्माण में नहीं कोई देरी
रेलवे बोर्ड के सीईओ व चेयरमैन वीके त्रिपाठी ने कहा कि वंदे भारत ट्रेनों के विनिर्माण में कोई देरी नहीं है। व्हील और एक्सल जैसे आवश्यक सामान भी समय पर उपलब्ध होंगे। व्हील में इस्तेमाल होने वाले एक्सल का निर्माण बेंगलुरु स्थित रेलवे व्हील फैक्टरी में होता है।