सोशल मीडिया पर लड़े जा रहे सूचना युद्ध में भी अब रूस यूक्रेन पर बढ़त बनाता दिख रहा है। फरवरी में जब रूस ने यूक्रेन में विशेष सैनिक कार्रवाई शुरू की, तो उस समय पश्चिमी देशों में बड़ी संख्या में लोगों ने यूक्रेन के पक्ष में सोशल मीडिया पोस्ट डाले। लेकिन कुछ समय बाद इसमें गिरावट आ गई। खास कर रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों के कारण बढ़ी महंगाई से यूरोप के लोगों का ध्यान यूक्रेन युद्ध से हटता जा चला गया है। इसका नतीजा है कि अब सोशल मीडिया पर रूस समर्थक आवाजें अधिक सुनाई देने लगी हैं। टोक्यो स्थित साइबर सिक्युरिटी विश्लेषण कंपनी टेरीलॉजी वॉर्क्स ने अपनी एक ताजा रिपोर्ट में ये बात कही है।
टेरीलॉजी वॉर्क्स ने ट्विटर के मई-जून के डाटा का विश्लेषण किया। उसने अध्ययन के दौरान यूक्रेन और रूस के समर्थक दस-दस प्रमुख हैशटैग को शामिल किया। उसने उन ट्विट्स पर ध्यान दिया, जिन्हें कम से कम आठ बार रीट्विट किया हो। कंपनी ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि 24 फरवरी के ठीक बाद यूक्रेन समर्थक ट्विट औसतन 120 बार रीट्विट किए गए। जबकि रूस समर्थक ट्विट्स को औसतन 55 रीट्विट ही मिलते थे। तब यूक्रेन समर्थक ट्विट्स को औसतन 500 लाइक मिलते थे। रूस समर्थक ट्विट्स को तब औसतन 180 लाइक मिलते थे। कुल मिला कर यूक्रेन समर्थक ट्विट के साथ औसत एंगेजमेंट 620 था, जबकि रूस समर्थक ट्विट्स के लिए ये संख्या 210 थी।
टेरीलॉजी वॉर्क्स ने बताया है कि मई से ये स्थिति बदलने लगी। 24 मई से छह जून के बीच देखा गया कि यूक्रेन समर्थक ट्विट्स ने औसतन 90 रीट्विट और 410 लाइक हासिल किए। उधर रूस समर्थक ट्विट्स के मामले में ये संख्या क्रमशः 105 और 390 हो गई। टेरीलॉजॉजी के एक अधिकारी ने वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम से कहा- ‘दुनिया भर में यूक्रेन युद्ध में लोगों की घटी दिलचस्पी के कारण अब साफ तौर पर रूस समर्थक पोस्ट अधिक नजर आ रहे हैं।’
जापान की कीओ यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर योको हिरोसे के मुताबिक रूस ने इटली जैसे देश में यूरोपियन यूनियन विरोधी पार्टियों को समर्थन देकर अपने विचारों के पक्ष में माहौल बनाया है। रूस ने लैटिन अमेरिका में अपने प्रचार अभियान में उन समूहों पर खास ध्यान दिया है, जो अमेरिका विरोधी भावना रखते हैं।
विश्लेषकों के मुताबिक रूसी प्रचार खास कर उन लोगों को आकर्षित करता है, जो अपने देशों में मौजूदा राजनीति से नाखुश हैं। मशहूर ब्रिटिश पत्रिका द इकॉनमिस्ट के एक सर्वे से सामने आया है कि अमेरिका में 17 फीसदी लोग यूक्रेन सरकार की तरफ से जारी बमबारी के वीडियो को झूठा मानते हैं। अमेरिका के धुर दक्षिणपंथी समूह क्यूएनॉन के समर्थकों के बीच यूक्रेन के वीडियो को झूठा मानने वाले लोगों की संख्या 57 फीसदी तक है।
विशेषज्ञों के मुताबिक यूक्रेन युद्ध के लंबा खिंचने से पश्चिमी जनमत इससे ऊबने लगा है। ज्यादातर लोगों का ध्यान अपने देश में बढ़ती महंगाई पर केंद्रित हो गया है। टोक्यो स्थित रिस्क मैनेजमेंट कंपनी टोक्यो मरीन डीआर के प्रमुख कंसल्टैंट ताकाहिसा कावागुची ने कहा- ‘रूस ने पश्चिम के लोगों को यह बताना शुरू कर दिया है कि यूक्रेन को सैनिक मदद देकर और रूस पर प्रतिबंध लगा कर उनकी सरकारें उनकी जिंदगी को मुश्किल बना रही हैं।’ विश्लेषकों के मुताबिक अब इस प्रचार का असर होता दिख रहा है।