Russia Ukraine War: Vladimir Putin
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यूक्रेन युद्ध में हाल में रूस के कई मोर्चों से पीछे हटने के बावजूद देश में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की लोकप्रियता पर कोई फर्क नहीं पड़ा है। पिछले 24 फरवरी को रूस ने यूक्रेन में विशेष सैनिक कार्रवाई शुरू की थी। उसके बाद देश में हुए तमाम जनमत सर्वेक्षणों में पुतिन की लोकप्रियता ऊंचे स्तर पर दिखी है। ताजा सर्वे स्वतंत्र संस्था लेवाडा सेंटर ने किया। इससे एक बार फिर पुतिन के लिए जन समर्थन का ऊंचा स्तर सामने आया है।
इससे पश्चिमी विश्लेषकों का यह अनुमान गलत साबित हुआ है कि युद्ध लंबा खिंचने या यूक्रेन में झटके लगने पर पुतिन से रूस के लोगों का मोहभंग होगा। अब पश्चिमी विश्लेषकों को अनुमान है कि पुतिन ने यूक्रेन युद्ध के लिए तीन लाख सैनिकों को जुटाने का जो अभियान शुरू किया है, उससे लोगों की बढ़ने वाली नाराजगी की कीमत उन्हें चुकानी होगी। अमेरिका की टुफ्ट्स यूनिवर्सिटी में रूस और यूरेशिया प्रोग्राम के सहायक निदेशक अरीक बुराकोवस्की ने एक ताजा टिप्पणी में लिखा है- ‘मेरी राय में सैनिक जुटाने के अभियान के दौरान जैसे-जैसे परिवारों का अपनों से अलगाव होगा, उसका असर पुतिन की लोकप्रियता पर देखने को मिलेगा।’
जनमत सर्वेक्षणों के मुताबिक विशेष सैनिक कार्रवाई शुरू होने के बाद से रूस के लगभग 50 फीसदी लोगों ने यूक्रेन युद्ध में अपने देश का पूरा समर्थन किया है। लगभग 30 फीसदी लोगों ने कमोबेश समर्थन किया है। सिर्फ 20 फीसदी ऐसे लोग हैं, जो इस युद्ध का समर्थन नहीं करते। जनसंख्या के भारी बहुमत ने युद्ध के बारे में पुतिन प्रशासन ने पक्ष रखा है, उसे स्वीकार किया है। इस दौरान सरकारी मीडिया की तरफ से दी जाने वाली सूचनाओं में भी उनका भरोसा बना रहा है।
सर्वे के मुताबिक रूसी जनसंख्या का भारी बहुमत यह मानता है कि पश्चिमी देशों का रूस के प्रति नजरिया दुश्मनी वाला है। इसलिए वे इस युद्ध को रूस की रक्षात्मक कार्रवाई मानते हैं। अगस्त में हुए एक सर्वे में 71 फीसदी लोगों ने अमेरिका के प्रति नकारात्मक राय जताई थी। 66 फीसदी लोगों ने यूक्रेन के बारे में ऐसी राय बताई।
ऑस्ट्रेलियाई वेबसाइट कन्वर्सेशन में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक कुछ पश्चिमी समाजशास्त्रियों की राय में रूस में होने वाले जनमत सर्वेक्षण विश्वसनीय नहीं हैं। उनके मुताबिक मुमकिन है कि उन सर्वेक्षणों के दौरान सवाल ठीक से नहीं पूछे जाते हों या सवालों की भाषा भ्रामक रहती हो। यह भी मुमकिन है कि रूसी नागरिक राष्ट्रपति पुतिन के खिलाफ राय जताने से डरते हों। इस वेबसाइट से एक समाजशास्त्री ने कहा- ‘सर्वे रिपोर्टों से यह सामने आता है कि लोगों ने क्या बताया, यह नहीं कि उनकी वास्तविक राय क्या है।’
कुछ दूसरे पश्चिमी विश्लेषकों के मुताबिक अब रूसी जनता की राय बदलने के संकेत मिल रहे हैं। मसलन, मार्च के बाद यूक्रेन युद्ध में लगातार दिलचस्पी रखने वाले रूसी लोगों की संख्या में गिरावट आई है। हालांकि ताजा सर्वे में 32 फीसदी लोगों ने नियमित रूप से यूक्रेन की खबर पर नजर रखने की बात कही, जबकि अगस्त में ये संख्या 21 रह गई थी। रूसी विश्लेषकों ने पश्चिम में लगाए जाने वाले इन कयासों को महज उनकी इच्छा बताया है। उनका दावा है कि रूस में हकीकत अलग है और लोग मजबूती से रूसी सेना के साथ खड़े हैं।