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Russia-Ukraine War: यूक्रेन को नए हथियार देने के नाटो के फैसले से फैला युद्ध के यूरोप तक फैलने का डर

Thu, 26 Jan 2023 07:14 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन

सार

Russia-Ukraine War: चर्चा है कि टैंक, एयर डिफेंस सिस्टम के बाद अब ऐसे हथियार भी दिए जा सकते हैं, जिनसे दूर-दूर तक बमबारी की जा सके। हाल में युद्ध के मोर्चे पर यूक्रेन को लगातार हार का सामना करना पड़ा है...
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Russia-Ukraine War- leopard 2 tank - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
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लंबी खींचतान के बाद आखिरकार अमेरिका और उसके सहयोगी कई यूरोपीय देशों में यूक्रेन को नए टैंक और टैंक भेदी मिसाइलें भेजने पर सहमति बन गई है। इसमें सबसे ज्यादा हिचक जर्मनी दिखा रहा था, लेकिन बुधवार को उसने भी अपने लियोपार्ड-2 टैंक यूक्रेन को भेजने का एलान कर दिया। रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक अभी कुछ महीने पहले तक यह सोचना मुश्किल था कि जर्मनी इसके लिए तैयार होगा।

अमेरिकी टीवी चैनल सीएनएन की वेबसाइट पर छपे एक विश्लेषण में इसे जर्मनी के रुख में एक एतिहासिक बदलाव कहा गया है। इसमें ध्यान दिलाया गया है कि एयर डिफेंस सिस्टम या टैंक भेदी मिसाइलें रक्षात्मक हथियार नहीं हैं। बल्कि इनका इस्तेमाल रूसी सेना पर हमले के लिए होगा। विश्लेषकों ने कहा है कि यूक्रेन को ऐसे हथियार देने का फैसला कर नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन (नाटो) से जुड़े देश यह संदेश दे रहे हैं कि यूक्रेन युद्ध को किसी अन्य स्तर पर ले जाने के लिए अब वे तैयार हैं। 

इस बीच जर्मनी की विदेश मंत्री अनालिना बेयरबॉक की एक टिप्पणी भी दुनिया भर में चर्चित हुई है। इसमें बेयरबॉक यह कहती सुनी गईं कि ‘हमारा रूस के साथ युद्ध चल रहा है।’ टीकाकारों ने कहा है कि संभवतः असावधानी की स्थिति में कही गई इस बात से यह साफ संदेश गया है कि रूस के साथ असल युद्ध यूक्रेन नहीं, बल्कि नाटो लड़ रहा है। इसके पहले पिछले कई हफ्तों से यह खबर अंतरराष्ट्रीय मीडिया में चर्चित रही कि जर्मनी यूक्रेन को हथियारों की मदद देने को राजी नहीं है। लेकिन अब नाटो यह संदेश देने में सफल हो गया है कि रूस के खिलाफ उसके भीतर पूरी एकजुटता है।

चर्चा है कि टैंक, एयर डिफेंस सिस्टम के बाद अब ऐसे हथियार भी दिए जा सकते हैं, जिनसे दूर-दूर तक बमबारी की जा सके। हाल में युद्ध के मोर्चे पर यूक्रेन को लगातार हार का सामना करना पड़ा है। आम राय है कि पश्चिमी देश नई मदद से यह कहानी पलटना चाहते हैं।

लेकिन कई टीकाकारों की राय है कि इससे नई समस्याएं पैदा हो सकती हैं। इससे युद्ध यूरोप के दूसरे इलाकों तक फैल सकता है। मुमकिन है कि जिन रास्तों से इन हथियारों को लाया जाएगा, रूस वहां हमला करने की कोशिश करे। खास कर इससे पोलैंड के इलाके युद्ध की जद में आ सकते हैँ। कुछ जानकारों ने तो आशंका जताई है कि रूस जर्मनी तक उन रेल और सड़क मार्गों को निशाना बना सकता है, जहां से हथियारों की खेप गुजरेगी। एस्तोनिया, लातविया और लिथुआनिया में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर भी रूस हमला कर सकता है। अगर ऐसा हुआ, तो अब यूक्रेन के इलाके में सीमित रहा युद्ध पूरे यूरोप तक फैल सकता है।

कूटनीति विशेषज्ञ स्टीफन ब्रायन ने वेबसाइट एशिया टाइम्स पर छपी एक टिप्पणी में लिखा है कि अगर रूस अपने हमलों में अमेरिका और यूरोप से भेजे गए नए हथियारों को नष्ट करने में सफल रहा, तो उसका बहुत खराब मनोवैज्ञानिक प्रभाव पश्चिम में महसूस किया जाएगा।

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