रूस-यूक्रेन संघर्ष को लेकर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच होने वाले संभावित बातचीत को टाल दिया गया है। दोनों नेताओं के बीच यह बैठक हंगरी के बुडापेस्ट में प्रस्तावित थी।
गौरतलब है कि पुतिन-ट्रंप की बैठक पिछले हफ्ते घोषित हुई थी, हालांकि इसकी तारीख तय नहीं की गई थी। अधिकारी ने बताया कि बैठक को टालने का निर्णय अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो और रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के बीच हुई फोन बातचीत के बाद लिया गया। रूसी पक्ष ने बिना अतिरिक्त क्षेत्रों के हस्तांतरण के युद्धविराम मानने से इन्कार किया, जबकि पश्चिमी राष्ट्र तत्काल युद्धविराम पर जोर दे रहे हैं। यूरोपीय नेताओं ने कहा है कि लड़ाई तुरंत बंद हो और वर्तमान समरूप रेखा (लाइन ऑफ कॉन्टैक्ट) वार्ता की आधारशिला बने।
इस सूत्र ने अमेरिकी न्यूज एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस (एपी) को नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उन्हें इस मामले में सार्वजनिक रूप से बोलने की अनुमति नहीं थी। यह घटनाक्रम ट्रंप की यूक्रेन संघर्ष को सुलझाने की कोशिशों में आई एक और अनिश्चितता को दर्शाता है, जो पिछले चार वर्षों से जारी है।
क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने कहा कि बैठक से पहले “गंभीर तैयारी” की आवश्यकता है। वहीं ट्रंप ने पुतिन के साथ अपनी बैठक की योजना में बदलाव के बारे में अभी तक सार्वजनिक रूप से कोई टिप्पणी नहीं की है। इससे पहले वे अगस्त में अलास्का में मिले थे, लेकिन इस मुलाकात से लगभग चार साल पहले शुरू हुए युद्ध को समाप्त करने के ट्रंप के रुके हुए प्रयासों को आगे नहीं बढ़ाया जा सका।
ट्रंप और पुतिन के बीच बैठक स्थगित करने के फैसले से यूरोपीय नेताओं को राहत मिलने की संभावना है, जिन्होंने पुतिन पर युद्ध के मैदान में बढ़त हासिल करने की कोशिश में कूटनीतिक रूप से समय लेने का आरोप लगाया है। ब्रिटिश प्रधानमंत्री, फ्रांसीसी राष्ट्रपति और जर्मन चांसलर सहित नेताओं ने कहा कि वे यूक्रेन को शांति के बदले रूसी सेना द्वारा कब्जा की गई जमीन सौंपने के किसी भी प्रयास का विरोध करते हैं, जैसा कि ट्रंप ने कभी-कभी सुझाव दिया है।
पोलैंड की चेतावनी-पुतिन का विमान उसके हवाई क्षेत्र से न गुजरे
बुडापेस्ट को बैठक स्थल के रूप में चुनना भी विवादास्पद बन गया है क्योंकि पुतिन के वहां जाने के लिए कई यूरोपीय देशों का हवाई क्षेत्र पार करना होगा। पोलैंड ने चेतावनी दी है कि अगर पुतिन का विमान उसके हवाई क्षेत्र में आता है तो उसे गिराया जा सकता है और घेराबंदी की जा सकती है।