रूस-यूक्रेन के बीच में तीन साल से जारी जंग पर विराम लगाने की कोशिशें जारी हैं। इसी क्रम में आज तुर्किये में रूस-यूक्रेन वार्ता होगी। हालांकि रूसी राष्ट्रपति पुतिन इस वार्ता में खुद मौजूद नहीं रहेंगे। उन्होंने वार्ता के लिए रूसी प्रतिनिधिमंडल का एलान भी कर दिया है। रूस-यूक्रेन वार्ता के लिए रूसी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व क्रेमलिन के सहयोगी व्लादिमीर मेडिंस्की करेंगे। गौरतलब है कि संघर्ष विराम की इस पहल की पेशकश रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने खुद की थी।
पुतिन ने की थी सीधी वार्ता की पेशकश
इससे पहले, पश्चिमी और यूरोपीय नेताओं की ओर से किसी शर्त के एक महीने के युद्ध विराम को लागू करने की पेशकश की थी, जिसे रूस ने खारिज कर दिया था। इसके साथ ही रूस ने यूक्रेन पर 100 से अधिक ड्रोन भी दागे। पुतिन ने 11 मई को इस प्रस्ताव के बजाय तुर्किये में सीधे बातचीत की पेशकश की थी। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने जोर देकर कहा था कि रूसी प्रतिनिधिमंडल बिना किसी पूर्व शर्त के इस्तांबुल में बातचीत के लिए तैयार रहेगा।
जेलेंस्की ने जताया रूस के इरादों पर संदेह
जेलेंस्की ने रूस के इरादों पर भी संदेह जताया था। साथ ही कहा था कि रूसी राष्ट्रपति की पेशकश अविश्वसनीय प्रतीत होती है। उन्होंने यह भी कहा था कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी वार्ता में भाग लेने पर विचार कर रहे हैं। बुधवार को एक्स पर एक पोस्ट साझा करते हुए ज़ेलेंस्की ने कहा था कि हमने तुर्किये में वार्ता के प्रारूप के बारे में टीम के साथ कई बैठकें कीं। मैं यह देखने का इंतजार कर रहा हूं कि रूस से कौन आएगा। इसके बाद ही मैं तय करूंगा कि यूक्रेन को कौन से कदम उठाने चाहिए।
जेलेंस्की ने यह भी कहा कि अब तक, मीडिया में उनके द्वारा दिए गए संकेत अविश्वसनीय हैं। रूस केवल युद्ध और हत्याओं को बढ़ा रहा है। मैं हर देश, हर नेता को धन्यवाद देना चाहता हूं जो अब रूस पर दबाव डाल रहा है, ताकि गोलाबारी आखिरकार बंद हो जाए, ताकि सार्थक बातचीत उस स्तर पर हो सके जहां वास्तविक निर्णय लिए जा सकें।
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बड़े युद्ध की तैयारी में हैं दोनों देश
दोनों देश गर्मी में फिर से बड़े युद्ध की तैयारी में हैं। 1,000 किलोमीटर लंबी सीमा रेखा पर अब तक दोनों ओर से हजारों सैनिक मारे जा चुके हैं।वॉशिंगटन स्थित थिंक टैंक 'इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर' ने सोमवार को कहा कि रूस तेजी से नए सैनिकों की भर्ती कर रहा है ताकि अग्रिम मोर्चे पर पकड़ बनी रहे। रूस ने अमेरिका और यूरोपीय नेताओं की ओर से की गई युद्धविराम की पेशकश को खारिज किया, लेकिन सीधी बातचीत की पेशकश की।
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