फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

यूक्रेन संकट: प्रतिबंधों से ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा रूस को, लेकिन कई मोर्चों पर चीन को होगा फायदा

Thu, 24 Feb 2022 05:58 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, हांग कांग

सार

रूस पर पहली बार प्रतिबंध 2014 में लगाए गए थे, जब उसने क्राइमिया को खुद में मिला लिया था। विश्लेषकों कहना है कि उन प्रतिबंधों का परिणाम यह हुआ कि अब रूस सबसे ज्यादा निर्यात चीन को कर रहा है। रूस ने इस हफ्ते यूक्रेन के अलगाववादी गणराज्यों दोनेत्स्क और लुगांस्क को अलग देश के रूप में मान्यता दे दी...
विज्ञापन
यूक्रेन की सेना - फोटो : पीटीआई (फाइल)
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

पश्चिमी देशों में ये आशंका बढ़ती जा रही है कि अगर यूक्रेन संकट में अमेरिका अधिक उलझा, तो उस मौके का फायदा उठा कर चीन हांगकांग को खुद मिलने की कार्रवाई कर सकता है। इसके अलावा भी यूक्रेन संकट से कई दूसरे मोर्चों पर चीन को लाभ होने का अनुमान लगाया जा रहा है। जबकि प्रतिबंधों से रूस को ज्यादा नुकसान होने की संभावना नहीं है।

विज्ञापन


अमेरिका के पूर्व व्यापार वार्ताकार हैरी ब्रॉडमैन ने एक समाचार एजेंसी को दिए इंटरव्यू में कहा कि रूस पर लगाए जा रहे व्यापक आर्थिक प्रतिबंधों से दुनिया में बिना डॉलर का इस्तेमाल किए होने वाले कारोबार में बढ़ोतरी होगी। खास कर ऐसा कारोबार रूस और चीन के बीच बढ़ेगा। विश्व बैंक में भी काम कर चुके ब्रॉडमैन ने कहा- ‘रूस के एक तेल उत्पादक देश है। ऐसे देश पर प्रतिबंध लगाने में समस्या यह है कि उससे वर्तमान व्यवस्था में छेद और चौड़ी होगी। चीन को इस स्थिति में आसान शर्तों पर तेल उपलब्ध होने लगेगा।’

सबसे ज्यादा निर्यात चीन को

रूस पर पहली बार प्रतिबंध 2014 में लगाए गए थे, जब उसने क्राइमिया को खुद में मिला लिया था। विश्लेषकों कहना है कि उन प्रतिबंधों का परिणाम यह हुआ कि अब रूस सबसे ज्यादा निर्यात चीन को कर रहा है। रूस ने इस हफ्ते यूक्रेन के अलगाववादी गणराज्यों दोनेत्स्क और लुगांस्क को अलग देश के रूप में मान्यता दे दी। उसके बाद अमेरिका, यूरोपियन यूनियन और ब्रिटेन ने उस पर कई नए प्रतिबंध लगा दिए हैं। गुरुवार को रूस ने यूक्रेन के अंदर सैनिक कार्रवाई शुरू करने का एलान किया। समझा जाता है कि इसके बाद पश्चिमी देश उस पर और भी ज्यादा प्रतिबंध लगाएंगे।

अमेरिका ने जो ताजा प्रतिबंध लगाए हैं, उनमें मुख्य रूप से रूस सरकार से जुड़े व्यक्तियों और उनके परिजनों को निशाना बनाया गया है। इसके अलाव रूस से जर्मनी तक बनी गैस पाइलपाइन नॉर्ड स्ट्रीम-2 को बनाने वाली कंपनी पर भी अमेरिका ने प्रतिबंध लगा दिए हैं। अमेरिका, ईयू और ब्रिटेन ने कहा है कि उनके ताजा प्रतिबंधों के कारण रूस पश्चिमी की तरफ से होने वाले व्यापार से वंचित हो जाएगा। वह वहां से कर्ज नहीं ले सकेगा।

विज्ञापन


अमेरिका ने कहा है कि रूस के विदेशी विनिमय लेन-देन का 80 फीसदी से ज्यादा हिस्सा अमेरिका में होता है। उसके व्यापार से जुड़ा लेन-देन डॉलर में होता है। इन सब पर अब रोक लग जाएगी। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा है- ‘हम ऐसे ठोस कदम उठांगे, जिससे हमारे प्रतिबंधों का नुकसान रूसी अर्थव्यवस्था को हो, हमें नहीं।’

यूरोप में बढ़ेगी महंगाई

लेकिन कई विशेषज्ञों का कहना है कि रूसी अर्थव्यवस्था को ठप कर देना आसान नहीं है। रूस 1.5 ट्रिलियन डॉलर की बड़ी अर्थव्यवस्था है। वह कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस, तांबा, एल्यूमिनियम, पैलेडियम और कई दूसरी वस्तुओं के प्रमुख उत्पादों में एक है। नॉर्ड स्ट्रीम-2 पाइलपाइन पर प्रतिबंध की खबर आते ही पूर्व रूसी राष्ट्रपति दिमित्रि मेदवेदेव ने एक ट्विट में कहा कि अब यूरोप दोगुना कीमत पर गैस खरीदने के लिए तैयार हो जाए।

यूक्रेन में बढ़े तनाव और रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों के कारण दुनिया भर में कच्चे तेल और गैस के दाम में काफी उछाल आ चुका है। विश्व बैंक के वर्ल्ड इंटरनेशनल ट्रेड सोल्यूशन डाटाबेस के आंकड़ों के मुताबिक गुजरे 20 वर्षों में रूस की अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर निर्भरता में गिरावट आई है। फिर उसके यहां से आयात करने वाले देश भी बदल गए हैं। कभी रूस सबसे ज्यादा निर्यात नीदरलैंड्स को करता था। अब यह स्थान चीन ने ले लिया है।

विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें