यूक्रेन के खिलाफ अपनी योजना तय कर चुका रूस, अमेरिका-यूरोप की धमकियों के बावजूद पीछे हटने का नाम नहीं ले रहा है। अब खबर आ रही है कि रूस के 100 से ज्यादा मिलिट्री ट्रक और सैनिक यूक्रेन की ओर से जाते दिखाई दिए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये ट्रक ऐसे समय पर दिखाई दिए हैं, जब यूक्रेन के दो शहरों पर रूसी कब्जे की आशंका गहराती जा रही है। दरअसल, रूस इस तरह के आक्रामक कदम तब उठा रहा है, जब वह युद्धाभ्यास के बहाने यूक्रेन को तीन तरफ से घेर चुका है।
देश के बाहर सेना के प्रयोग के प्रस्ताव को मंजूरी
रूस-यूक्रेन संकट के बीच दोनों देशों की सीमा पर हालात बिगड़ने के आसार हैं। दरअसल, रूस की संसद ने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के उस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, जिसके तहत वे अपनी सेना को दूसरे देश में कार्रवाई करने के लिए भेज सकते हैं। इसे लेकर पुतिन ने कहा कि अभी उनके पास सारे विकल्प खुले हैं। इसी के बाद रूस के मिलिट्री ट्रक और सैनिक यूक्रेन की सीमा की ओर जाते देखे गए हैं।
अमेरिका ने बाल्टिक देशों में भेजे सैनिक व हथियार
उधर, रूस के कदम के बाद अमेरिका की भी प्रतिक्रिया सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने रूस पर कड़े प्रतिबंध तो लगाए ही हैं, इसके अलावा उन्होंने बाल्टिक देशों में अमेरिकी सैनिक व हथियार भेजे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति पहले ही कह चुके हैं कि नाटो अपनी एक इंच जमीन की भी रक्षा करेगा। दोनों शक्तिशाली देशों के बीच गहराते टकराव से बड़े युद्ध की आशंका भी गहरी होती जा रही है।
बाइडन ने तैयार की रूपरेखा
रूस की आक्रामकता पर अंकुश लगाने के लिए अमेरिका ने रूपरेखा तैयार की है। अमेरिका का मानना है कि यूक्रेन के साथ बढ़े तनाव में रूस स्पष्ट रूप से हमलावर है। बाइडन ने पूर्वी यूक्रेन में दो अलगाववादी क्षेत्रों को मान्यता देने के पुतिन के फैसले की निंदा करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया। बाइडन ने कहा कि, दो वित्तीय संस्थान वीईबी और रूस के सैन्य बैंक अब प्रतिबंधों का सामना कर रहे हैं। रूसी अभिजात वर्ग और उनके परिवारों के खिलाफ और प्रतिबंधों लगाए जाने की संभावना है। अमेरिका यूक्रेन को और अधिक रक्षात्मक सहायता भेज रहा है और बाल्टिक सहयोगियों के साथ अमेरिकी सेना तैनात कर रहा है, जो नाटो के सदस्य हैं।