पश्चिम के देशों में तनातनी के बीच रूस ने बड़ा एलान किया है। रूस ने साफ कर दिया है कि वह अपने मालवाहक जहाजों को किसी भी कीमत पर रुकने या जब्त होने नहीं देगा। क्रेमलिन के शीर्ष अधिकारी निकोलाई पात्रुशेव की अध्यक्षता वाले रूसी समुद्री बोर्ड ने नई गाइडलाइन जारी की है। इसके तहत अब देश के मालवाहक जहाजों को रूसी नौसेना का सुरक्षा कवच मिलेगा।
क्यों लिया गया यह फैसला?
दरअसल, पिछले कुछ महीनों से ब्रिटेन, फ्रांस, बेल्जियम और स्वीडन जैसे देशों ने रूसी तेल और सामान ले जा रहे जहाजों को बीच समुद्र में रोकना शुरू कर दिया है। इतना ही नहीं, हाल ही में ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने अपनी नौसेना को संदिग्ध रूसी जहाजों को हिरासत में लेने की खुली छूट दी थी। अब रूस इसे अपने व्यापार पर सीधा हमला मान रहा है।
सुरक्षा के इंतजाम
सिर्फ जब्ती ही नहीं, बल्कि रूसी जहाजों पर समुद्री ड्रोन के हमले भी बढ़ गए हैं। अभी गुरुवार को ही काला सागर में तुर्किये के टैंकर 'अल्तुरा' पर ड्रोन हमला हुआ, जिससे जहाज के इंजन रूम को भारी नुकसान पहुंचा। इससे पहले मार्च की शुरुआत में यूक्रेन की खुफिया एजेंसी ने एक रूसी एलएनजी टैंकर को निशाना बनाया था।
इन्हीं, खतरों को देखते हुए रूस ने अब 'मोबाइल फायर सपोर्ट यूनिट्स' तैनात करने का फैसला किया है। यानी अब रूसी मालवाहक जहाजों पर हथियारबंद दस्ते तैनात किए जा सकेंगे। ये जवान किसी भी हमले की कोशिश का मुंहतोड़ जवाब देंगे।
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एशियाई बाजार पर नजर
बताते चलें कि रूस के इस फैसले का असर सीधा भारत और चीन जैसे देशों पर पड़ेगा। पश्चिम एशिया के संकट और होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी के बीच, रूस अपनी अर्थव्यवस्था को बचाए रखने के लिए भारत और चीन को लगातार कच्चे तेल की सप्लाई कर रहा है। रूस की कोशिश है कि 'शैडो फ्लीट' को सुरक्षा देकर वह अपने एशियाई ग्राहकों तक माल की सप्लाई सुनिश्चित कर सके।
टकराव की आशंका
विशेषज्ञों का मानना है कि रूस के इस फैसले से समुद्र में तनाव चरम पर पहुंच सकता है। यदि रूसी नौसेना के एस्कॉर्ट वाले जहाज को पश्चिमी देश रोकने की कोशिश करते हैं, तो यह सीधे तौर पर दो बड़ी सैन्य शक्तियों के बीच युद्ध का कारण बन सकता है।