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बाइडन-पुतिन वार्ता: अलेक्सी नवालनी को किसी राहत की संभावना नहीं

Fri, 18 Jun 2021 04:37 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मास्को

सार

रूसी राष्ट्रपति के कार्यालय के प्रेस सचिव दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि रूस नवालनी को अमेरिका के हाथ में तब तक नहीं सौंपेगा, जब तक ये साबित नहीं होता कि वे या तो अमेरिकी नागरिक हैं, या अमेरिका की खुफिया एजेंसियों के लिए काम करते हैं...
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व्लादिमीर पुतिन और एलेक्सी नवलनी - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
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रूस ने ये खुलासा किया है कि जिनेवा में बातचीत के दौरान अमेरिकी वार्ताकारों ने रूस में कैद विपक्षी नेता अलेक्सी नवालनी का मुद्दा नहीं उठाया। न ही उनकी रिहाई की मांग की। दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों के बीच कैदियों की अदला-बदली के मुद्दे पर बातचीत हुई। इस बीच रूस ने साफ किया है कि इन कैदियों की सूची में सिर्फ अमेरिकी नागरिकों और उन लोगों का नाम ही शामिल हो सकता है, जिन्हें अमेरिका अपना खुफिया एजेंट बताए। ऐसे में नवालनी की रिहाई के लिए अमेरिका को यह कहना होगा कि नवालनी उसके एजेंट हैं।

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क्रेमलिन (रूसी राष्ट्रपति के कार्यालय) के प्रेस सचिव दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि अमेरिकी दल ने नवालनी का मुद्दा नहीं उठाया। इसलिए इस खास मामले पर चर्चा नहीं हुई। पेस्कोव ने साफ किया कि रूस नवालनी को अमेरिका के हाथ में तब तक नहीं सौंपेगा, जब तक ये साबित नहीं होता कि वे या तो अमेरिकी नागरिक हैं, या अमेरिका की खुफिया एजेंसियों के लिए काम करते हैं। उन्होंने कहा कि इस बात की पुष्टि अमेरिका को ही करनी होगी।

गौरतलब है कि पिछले साल क्रेमलिन ने आरोप लगाया था कि नवालनी पश्चिमी खुफिया एजेंसियों के लिए काम करते हैं। तब पेस्कोव ने कहा था- ‘मैं बल्कि स्पष्ट रूप से यह कहने की स्थिति में हूं कि अमेरिकी खुफिया एजेंसी- सीआईए के जासूस नवालनी के साथ मिल कर काम कर रहे हैं।’ उधर जिनेवा शिखर वार्ता से ठीक पहले अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा था कि अगर जेल में रहते हुए नवालनी की मृत्यु हो गई तो रूस को उसके विनाशकारी परिणाम भुगतने होंगे।
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लेकिन अब रूस ने दावा किया है कि बाइडन ने पुतिन के साथ वार्ता में नवालनी के मुद्दे को नहीं उठाया। शिखर वार्ता के बाद प्रेस कांफ्रेंस में पुतिन ने कहा था कि नवालनी इसलिए जेल में हैं, क्योंकि उन्होंने पैरोल के नियमों का उल्लंघन किया। इस बीच अब रूस में बाइडन-पुतिन शिखर वार्ता के नतीजों का आकलन किया जा रहा है। रूस के जर्नल रशिया इन ग्लोबल अफेयर्स के संपादक और थिंक टैंक काउंसिल ऑन फॉरेन एंड डिफेंस पॉलिसी के प्रमुख फ्यूदोर लुक्यानोव ने एक टिप्पणी में लिखा है कि शिखर वार्ता को साधारण रूप से ही सफल कहा जा सकता है।

लुक्यानोव ने कहा है कि शिखर वार्ता से वर्षों से जारी ड्रामेबाजी के बाद तनाव घटाने में मदद जरूर मिली है। लेकिन शिखर वार्ता से बहुत ऊंची उम्मीदें जोड़ी गई थीं। वे आशाएं पूरी नहीं हुईं। हालांकि दोनों नेताओं का आमने-सामने बैठ कर काम की बातें करना भी महत्वपूर्ण है।

विश्लेषकों ने ध्यान दिलाया है कि शिखर वार्ता के बाद दोनों राष्ट्रपतियों ने जो कहा उससे संकेत मिलता है कि आने वाले दिनों में कुछ ठोस प्रगति हो सकती है। मसलन, दोनों देशों के बीच एक दूसरे के जासूसों की अदला-बदली हो सकती है, जैसाकि सोवियत संघ के जमाने में होता था। एक विश्लेषक ने कहा है कि ऐसा लगता है कि अब रूस और अमेरिका के संबंध पुराने शीत युद्ध के दौर में वापस चले गए हैं। हालांकि हाल में ये संबंध जितने बिगड़ गए थे, उसे देखते हुए इसे भी एक प्रगति समझा जाएगा।

खबरों के मुताबिक कैदियों की अदला-बदली की संभावना काफी मजबूत है। रूस इस संबंध में अपनी लिस्ट तैयार करने में भी जुट गया है। वह अपने जिन नागरिकों की सबसे पहले रिहाई चाहता है, उनमें एक रूसी विमान के पायलट कोंस्तान्तिन यारोशेन्को भी हैं। उन्हें अमेरिका में 2011 में गिरफ्तार किया गया था और बाद में नशीली दवाओं की तस्करी के आरोप में सजा सुनाई गई। उधर अमेरिका सबसे पहले अपने पूर्व सैनिक पॉल ह्वेन की रिहाई चाहता है, जो जासूसी के आरोप में रूस में सजा काट रहे हैं।

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