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अब कहां जाएगा पाकिस्तान?: रूस की चौखट से भी मिली जिल्लत, भारत के साथ विवाद में मध्यस्थता नहीं करेंगे पुतिन

Tue, 03 Feb 2026 03:18 AM IST
शुभम कुमार वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मॉस्को

सार

आतंकियों के पनाहगार पाकिस्तान को रूस ने सख्त संदेश दिया है। रूस ने साफ किया है कि भारत-पाकिस्तान विवाद में वो किसी भी तरह का मध्यस्थता नहीं करेगा। रूसी विदेश मंत्रालय ने कहा कि विवाद को दोनों देशों को द्विपक्षीय रूप से सुलझाना होगा और रूस केवल तभी मदद करेगा जब कोई विशेष अनुरोध करे।

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रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ - फोटो : ANI
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विस्तार
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दुनियाभर में कटोरा लेकर घूम रहे आतंकियों के पनाहगार पाकिस्तान को अब रूस ने भी सख्त सलाह दी है। भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए रूस ने स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी भी प्रकार से मध्यस्थ की भूमिका नहीं निभाएगा। रूसी विदेश मंत्रालय ने कहा कि विवाद को दोनों देशों को स्वयं द्विपक्षीय रूप से सुलझाना चाहिए और रूस केवल तभी मदद करेगा जब कोई देश विशेष रूप से अनुरोध करे। कुल मिलाकर देखा जाए तो रूस का यह बयान एक तरफ भारत के लिए कूटनीतिक सहारा है। तो दूसरी ओर पाकिस्तान के लिए सख्त संदेश है कि तनाव का समाधान स्वयं से बातचीत कर निकाले, ना कि मदद की गुहार लगाने के लिए दूसरे देशों की चौखट पर जाए। 

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विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि पाकिस्तान और भारत को अपने विवाद 1972 के शिमला समझौते और 1999 के लाहौर समझौते के अनुसार खुद सुलझाना चाहिए। इसका मतलब है कि रूस पाकिस्तान और भारत के बीच सीधे किसी समाधान में दखल नहीं देगा।

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भारत के नजरिए से क्यों खास है यह बयान
बता दें कि भारत के नजरिए से रूस का यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अब यह स्पष्ट हो गया है कि रूस पाकिस्तान का राजनीतिक समर्थन करने वाला नहीं है। पाकिस्तान को अब रूस या किसी तीसरे देश की मदद पर भरोसा नहीं करना चाहिए और उसे भारत के साथ सीधे बैठकर विवाद सुलझाना होगा।

पाकिस्तान और रूस के रिश्ते 
हालांकि दूसरी ओर रूस ने यह भी बताया कि उसके और पाकिस्तान के बीच राजनीतिक और आर्थिक संबंध लगातार बढ़ रहे हैं। 2025 में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शेहबाज शरीफ के बीच कई अहम बैठकें हुईं, जिनमें दोनों देशों ने सहयोग बढ़ाने की इच्छा जताई। आर्थिक क्षेत्र में भी दोनों देशों ने कई परियोजनाओं पर काम किया।

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इनमें कराची मेटलर्जिकल प्लांट की मरम्मत, इंसुलिन उत्पादन में सहयोग और अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन कॉरिडोर के तहत ट्रायल ट्रांसपोर्ट शामिल हैं। इसके अलावा, रूस पाकिस्तान में तेल और गैस परियोजनाओं में निवेश करने और घरेलू ऊर्जा आपूर्ति बढ़ाने की संभावनाओं को भी देख रहा है।

रूस का संदेश, पाकिस्तान को दो टूक
कुल मिलाकर, रूस का रुख स्पष्ट है कि राजनीतिक विवाद पाकिस्तान और भारत के बीच द्विपक्षीय होना चाहिए और रूस केवल मदद के लिए उपलब्ध रहेगा अगर कोई देश विशेष रूप से उसकी सहायता मांगे। भारत के लिए यह स्थिति कूटनीतिक रूप से फायदेमंद है क्योंकि बड़ा खिलाड़ी रूस, पाकिस्तान को समर्थन नहीं दे रहा।

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