सार
यूएन महासभा में रूस और जर्मनी के बीच तनाव एक बार फिर खुलकर सामने आया। जर्मनी ने रूस से जर्मनी, यूरोप और नाटो की ओर बढ़ते तनाव को कम करने की अपील की। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने इस सलाह को खारिज करते हुए जर्मनी पर यूक्रेन का मुख्य समर्थक बनने और यूरोप में बड़ी सैन्य शक्ति बनने की कोशिश का आरोप लगाया। उन्होंने दूसरे विश्व युद्ध का जिक्र करते हुए भी सवाल उठाया। आखिर विवाद इतना बढ़ा कैसे? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...
संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में रूस और जर्मनी के बीच बढ़ती तल्खी ने दुनिया का ध्यान खींचा। जर्मनी के विदेश मंत्री योहान वाडेफुल ने रूस से जर्मनी, यूरोप और नाटो की ओर बढ़ते तनाव को कम करने की अपील की। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने इस सलाह को मानने के बजाय जर्मनी के रुख पर ही सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने कहा कि जर्मनी यूक्रेन का मुख्य समर्थक है और यूरोप में प्रमुख सैन्य शक्ति बनने की कोशिश कर रहा है।
जर्मनी ने रूस को आखिर क्या सलाह दी थी?
जर्मन प्रतिनिधिमंडल के एक अधिकारी के मुताबिक, वाडेफुल ने रूस से जर्मनी, यूरोप और नाटो गठबंधन की ओर बढ़ने वाले तनाव के कथित ‘खतरनाक रास्ते’ को छोड़ने की अपील की। उन्होंने रूस के साथ बेहतर संबंधों की संभावना से भी इनकार नहीं किया। हालांकि, इसके लिए रूस के नेतृत्व की ओर से यूक्रेन में युद्ध खत्म करने की वास्तविक इच्छा को जरूरी बताया। यानी जर्मनी की ओर से रूस को तनाव घटाने और यूक्रेन युद्ध समाप्त करने की दिशा में आगे बढ़ने का संदेश दिया गया।
लावरोव ने दूसरे विश्व युद्ध की याद क्यों दिलाई?
जर्मनी की सलाह के जवाब में लावरोव ने बेहद तीखा सवाल उठाया। संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन के दौरान उन्होंने पूछा कि क्या बर्लिन समझता है कि मौजूदा स्थिति किस दिशा में जा सकती है। इसके बाद उन्होंने कहा,'क्या उन्होंने दूसरे विश्व युद्ध के सबक नहीं सीखे?' लावरोव का यह बयान जर्मनी के मौजूदा सैन्य और विदेश नीति रुख को लेकर उनकी नाराजगी को दिखाता है। उन्होंने जर्मनी पर यूरोप में बड़ी सैन्य शक्ति बनने की कोशिश करने का आरोप भी लगाया।
रूस-जर्मनी के विदेश मंत्रियों की मुलाकात क्यों अहम रही?
जर्मनी के विदेश मंत्री योहान वाडेफुल के अनुरोध पर दोनों देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक हुई। यह मुलाकात 2022 में रूस के यूक्रेन पर पूर्ण पैमाने पर हमले के बाद दोनों देशों के विदेश मंत्रियों की पहली ऐसी आमने-सामने की बैठक मानी गई। हालांकि, बैठक के बाद लावरोव ने इसे ज्यादा अहमियत नहीं दी। उन्होंने कहा कि वाडेफुल ने रूस की आलोचना करने वाली अपनी आधिकारिक सार्वजनिक स्थिति को ही दोहराया। लावरोव ने सवाल किया कि क्या इसे वास्तव में बातचीत माना जा सकता है।
दोनों देशों के रिश्ते हाल में और क्यों बिगड़े?
- रूस और जर्मनी के संबंध यूक्रेन युद्ध के बाद से लगातार तनावपूर्ण रहे हैं। हाल के हफ्तों में तनाव और बढ़ गया। जर्मनी ने पिछले महीने लीपजिग हवाईअड्डे पर हुए कथित ड्रोन हमले के प्रयास के लिए रूस को जिम्मेदार ठहराया।
- इसके बाद दोनों पक्षों की ओर से आरोप-प्रत्यारोप और जवाबी कदम सामने आए। वाडेफुल ने बेहतर संबंधों की इच्छा जताई, लेकिन इसे यूक्रेन युद्ध खत्म करने की रूस की वास्तविक इच्छा से जोड़ा। लावरोव ने बाद में कहा कि जर्मन विदेश मंत्री की पहल से कुछ नया सामने नहीं आया।
लावरोव ने जर्मनी के आरोपों पर क्या जवाब दिया?
- लावरोव ने जर्मनी से काला सागर में रूसी हमलों से किसी व्यावसायिक जहाज के क्षतिग्रस्त या निशाना बनाए जाने का एक उदाहरण देने को कहा।
- न्होंने दावा किया कि ऐसा कोई मामला नहीं है। लीपजिग हवाईअड्डे के कथित ड्रोन हमले को लेकर भी उन्होंने जर्मनी के आरोप पर सवाल उठाया।
- लावरोव ने इसे ऐसा ड्रोन बताया, जिसकी जिम्मेदारी किसी ने नहीं ली थी, लेकिन जर्मनी ने तुरंत इसे रूसी ड्रोन बताया। इस तरह दोनों पक्षों के बीच आरोपों को लेकर मतभेद भी सामने आया।
अमेरिका और पश्चिम को लेकर लावरोव ने क्या कहा?
लावरोव ने अपने संबोधन और बाद की प्रेस कॉन्फ्रेंस में पश्चिमी देशों पर रूस को रणनीतिक रूप से हराने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ऐसी कोशिशें करने वाले लोग रणनीतिक गतिरोध में पहुंच सकते हैं। लावरोव ने अमेरिका पर यूरोपीय सुरक्षा व्यवस्था को नष्ट करने और कीव में रूस विरोधी शासन बनाने का भी आरोप लगाया। उन्होंने यह भी कहा कि रूस के अनुसार, अगस्त 2025 में अलास्का में ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की बैठक में यूक्रेन युद्ध खत्म करने को लेकर एक समझ बनी थी और रूस उस पर लौटने के लिए तैयार है।
जर्मनी और जापान की स्थायी सीट पर रूस का रुख क्या?
लावरोव ने जर्मनी और जापान को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता देने के विचार का भी विरोध किया। उन्होंने जापान के सैन्यीकरण की आलोचना की और कहा कि रूस जर्मनी और जापान को स्थायी सीट देने की किसी कोशिश को वीटो करेगा। दोनों देश दूसरे विश्व युद्ध में रूस, ब्रिटेन और अमेरिका के विरोधी पक्ष में थे। अमेरिका लंबे समय से जर्मनी, जापान और भारत को सुरक्षा परिषद की स्थायी सीट देने का समर्थन करता रहा है। जापान के उप संयुक्त राष्ट्र राजदूत मिकानागी तोमोहिरो ने लावरोव के बयान के जवाब में अपने देश को शांतिप्रिय बताते हुए स्वतंत्रता, लोकतंत्र और मौलिक मानवाधिकारों को जापान के फैसलों की बुनियाद बताया।
यूक्रेन युद्ध के बीच तनाव की स्थिति क्या?
लावरोव का बयान ऐसे समय आया है जब रूस और यूक्रेन के बीच हवाई युद्ध तेज हो रहा है। दी गई जानकारी के अनुसार, हाल के महीनों में रूस ने यूक्रेन पर क्रूज और बैलिस्टिक मिसाइलों, शक्तिशाली ग्लाइड बमों और जेट से चलने वाले ड्रोन से हमले किए हैं। यूक्रेन ने भी लंबी दूरी के ड्रोन से रूस की तेल रिफाइनरियों और कारोबारी ठिकानों को निशाना बनाया है। शनिवार को यूक्रेनी अधिकारियों ने रूसी हमलों में चार लोगों के मारे जाने की बात कही, जबकि रूसी अधिकारियों ने यूक्रेनी ड्रोन हमले में तीन लोगों की मौत बताई। दोनों देश अपने सैन्य नुकसान के पूरे आंकड़े सार्वजनिक नहीं करते हैं। रूस युद्ध को अपनी सुरक्षा और रूसी भाषी लोगों के अधिकारों से जोड़ता है, जबकि जर्मनी रूस से युद्ध समाप्त करने के लिए बातचीत की मांग कर रहा है।