उन्होंने आगे कहा, “जहां तक हम जानते हैं, ब्रसेल्स और लंदन अब वॉशिंगटन को यह समझाने का प्रयास कर रहे हैं कि संकट को राजनीतिक और कूटनीतिक माध्यमों से सुलझाने की मंशा को त्याग दे और रूस पर सैन्य दबाव डालने की कोशिशों में पूरी तरह से शामिल हो जाए। यानी संघर्ष समर्थक दल का हिस्सा बन जाएं।”
लावरोव ने यह भी कहा कि एंकोरेज सम्मेलन में हुए समझौते के बावजूद, मॉस्को अपने बुनियादी सिद्धांतों पर कायम है। रूस की क्षेत्रीय अखंडता और क्रीमिया, डोनबास व नोवोरोसिया के निवासियों की पसंद पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा, “हम अब अमेरिका से इस बात की पुष्टि की प्रतीक्षा कर रहे हैं कि एंकोरेज समझौते अभी भी प्रभावी हैं।” पुतिन कई बार यह कह चुके हैं कि रूस सिर्फ दीर्घकालिक समाधान का समर्थन करता है, न कि अस्थायी युद्धविराम का। उनका मानना है कि ऐसा समाधान तभी संभव है जब संघर्ष के मूल कारणों का समाधान किया जाए।
इसी बीच, रूसी सेना ने यूक्रेन में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण शहरों पोक्रोव्स्क (क्रास्नोआर्मेइस्क) और कुपियांस्क पर कब्जा करने की कोशिशें तेज कर दी हैं, जहां लगभग 10,000 यूक्रेनी सैनिक और नाटो सलाहकार घिरे हुए हैं।
ब्रिटेन ने बेल्जियम भेजे सैन्य उपकरण और विशेषज्ञ
ब्रिटेन ने बेल्जियम के हवाई अड्डों के पास ड्रोन देखे जाने की घटनाओं के बाद वहां सैन्य विशेषज्ञों और सैन्य उपकरणों को भेजा है। गौरतलब है कि पिछले हफ्ते ब्रसेल्स के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और यूरोप के सबसे बड़े कार्गो केंद्रों में से एक- लीज हवाई अड्डे को ड्रोन देखे जाने की वजह से अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा था। यह घटनाएं उस समय हुईं जब अमेरिकी परमाणु हथियारों वाले एक सैन्य अड्डे के पास भी अज्ञात ड्रोन उड़ानें देखी गईं।
ब्रिटेन की सशस्त्र सेनाओं के प्रमुख एयर चीफ मार्शल रिचर्ड नाइटन ने बीबीसी से कहा कि बेल्जियम के अनुरोध पर ब्रिटेन ने अपने लोग और उपकरण बेल्जियम भेजने का फैसला किया है ताकि हम उनकी मदद कर सकें। उन्होंने कहा, “हमें नहीं पता, और बेल्जियम को भी अभी तक पता नहीं है कि ये ड्रोन कहां से आ रहे हैं, लेकिन हम अपनी तकनीकी क्षमता और उपकरणों के साथ उनकी सहायता कर रहे हैं। यह प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है।”
हाल के महीनों में यूरोप के कई देशों में ड्रोन की घटनाओं के कारण हवाई अड्डों को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा है। कुछ मामलों में रूस पर संदेह जताया गया है, लेकिन बेल्जियम ने अभी तक यह नहीं बताया है कि इन ड्रोन को कौन संचालित कर रहा है।
बेल्जियम के रक्षा मंत्री थियो फ्रैंकन ने कहा कि उन्हें लगता है कि इनमें से कुछ घटनाएं “जासूसी अभियान” का हिस्सा हैं, जिन्हें शौकिया लोग नहीं चला सकते।