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बन रहे हैं नए समीकरण, गहरा रही है रूस और पाकिस्तान की दोस्ती

Wed, 02 Dec 2020 04:21 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कराची

सार

  • पाकिस्तान स्ट्रीम गैस पाइपलाइन प्रोजेक्ट का संचालन अब रूस करेगा
  • परियोजना से रूस के कदम पाकिस्तान में और होंगे मजबूत, पुतिन की खासी दिलचस्पी
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Putin and Imran Khan - फोटो : PTI (File Photo)
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विस्तार
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खबर है कि पाकिस्तान ने एक गैस लाइन प्रोजेक्ट का प्रबंधन रूस को सौंपने का फैसला किया है। ऐसा इसी मकसद के लिए गठित होने वाली एक विशेष कंपनी के जरिए किया जाएगा। इस मामले को रूस और पाकिस्तान की बढ़ती नजदीकी का एक और उदाहरण माना जा रहा है।

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पहले इस प्रोजेक्ट को नॉर्थ-साउथ गैस पाइपलाइन परियोजना कहा जाता था। अब हुए समझौते के मुताबिक इसका नाम पाकिस्तान स्ट्रीम गैस पाइपलाइन प्रोजेक्ट हो जाएगा। पाकिस्तान की इसमें 74 फीसदी हिस्सेदारी बनी रहेगी। रूस की हिस्सेदारी भी पहले की तरह ही 26 फीसदी रहेगी। लेकिन इसका व्यावहारिक संचालन रूसी कंपनियां करेंगी। पाकिस्तान के अखबार ‘द एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ के मुताबिक इस परियोजना के तहत रूसी कंपनियां प्राकृतिक गैस को कराची के कासिम बंदरगाह से पंजाब प्रांत में कसूर तक ले जाएंगी।


अखबार में छपी रिपोर्ट के मुताबिक रूस के राष्ट्रपति व्लादीमीर पुतिन ने इस परियोजना में गहरी दिलचस्पी ली है। इसे उन्होंने रूस और पाकिस्तान के बीच आर्थिक और सामरिक संबंधों को मजबूत करने का एक जरिया बताया है।
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जानकारों के मुताबिक इस परियोजना से पाकिस्तान में रूस के कदम और जम जाएंगे। इसके पहले रूस पाकिस्तान में ऑयल एंड गैस डेवलपमेंट कंपनी (ओजीडीसी) और पाकिस्तान स्टील मिल्स की स्थापना में भी मदद कर चुका है। रूस और पाकिस्तान के बीच 2015 में एक समझौता हुआ था। उसके तहत फैसला किया गया था कि कराची से कसूर तक एक हजार किलोमीटर से भी अधिक लंबी गैस पाइपलाइन का निर्माण किया जाएगा। अब इस परियोजना को अंतिम रूप दिया गया है। माना जा रहा है कि इससे पाकिस्तान में ऊर्जा के अभाव को दूर करने में मदद मिलेगी।

पाकिस्तान ने कहा है कि इस परियोजना से रूस और पाकिस्तान के बीच आर्थिक सहयोग के एक नए दौर की शुरुआत होगी। ऐसी खबर है कि दोनों देश जल्द ही आर्थिक और रक्षा सहयोग के कुछ अन्य समझौतों पर दस्तखत करने वाले हैं। कूटनीतिक हलकों में शीत युद्ध के दिनों में दुश्मन खेमों में रहे इन दोनों के बीच बन रहे निकट संबंधों पर करीबी से निगाह रखी जा रही है। इसे इस क्षेत्र में उभर रहे नए समीकरणों की एक मिसाल समझा जा रहा है।

पाकिस्तान के लिए ताजा समझौते की अहमियत इसलिए भी ज्यादा है, क्योंकि हाल में उसके खाड़ी देशों और सऊदी अरब से संबंध बिगड़े हैं। संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब जैसे देश पाकिस्तान के लिए ऊर्जा का प्रमुख स्रोत रहे हैं। अब जबकि उनसे रिश्ते बिगड़ रहे हैं, तो उससे होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए पाकिस्तान की निगाहें रूस पर टिकी हैं। पाकिस्तान अब रूस को अपने लिए रक्षा, आर्थिक और ऊर्जा सहयोग के प्रमुख स्रोत के रूप में देख रहा है।

खाड़ी देशों और सऊदी अरब से पाकिस्तान के संबंधों में आई कड़वाहट की एक बड़ी वजह इन देशों के अमेरिका से गहरा रहे संबंध हैं। यूएई ने हाल ही में अमेरिकी देखरेख में इस्राइल से समझौता कर लिया है। ऐसी खबरें उड़ीं कि हाल में जब अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो सऊदी अरब की यात्रा पर थे, तब वहां गुपचुप इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतनन्याहू भी पहुंच गए। हालांकि सऊदी अरब ने इसका खंडन किया, लेकिन जानकारों के मुताबिक तमाम परिस्थितिजन्य साक्ष्यों से इस खबर की पुष्टि हुई है।

हाल में जहां यूएई, बहरीन और सऊदी अरब अमेरिका के और करीब गए हैं, वहीं टर्की, पाकिस्तान और मलेशिया इस्लामी दुनिया की गोलबंदी में जुटे हुए हैँ। इससे नए समीकरण बन रहे हैं। इसके बीच रूस का पाकिस्तान को साथ देना अहम है, जिसके अमेरिका से लंबे समय से संबंध तनावपूर्ण हैं।

गौरतलब है कि पिछले पांच नवंबर को दो हफ्तों के साझा अभियान के लिए रूसी फौजी टुकड़ी पाकिस्तान पहुंची थी। इस अभ्यास को दोनों देशों के बीच गहरा रहे सैनिक संबंधों की एक मिसाल माना गया। उसी इसलिए को आगे बढ़ाते हुए अब रूस ने पाकिस्तान के साथ अपने ऊर्जा सहयोग को नया रूप दिया है।

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