फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

रोहिंग्याओं की मेजबानी पड़ रही बांग्लादेश को भारी, खतरा दिखने के बावजूद ‘लाचार’ है भारत

Thu, 12 Sep 2019 04:45 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
विज्ञापन
rohingya rally bangladesh - फोटो : Youtube
विज्ञापन

साल 2010 में एक मूवी आई थी ‘अतिथि तुम कब जाओगे’। इसी तर्ज पर बांग्लादेशियों को रोहिंग्याओं की मेहमान-नवाजी अब अखरने लगी है। पिछले महीने अगस्त के आखिर में दुनिया के सबसे बड़े शरणार्थी कैंप बांग्लादेश के कुटुपालोंग में रह रहे रोहिंग्या शरणार्थियों ने जब कॉक्स बाजार में रैली की, तो बांग्लादेश सरकार के कान खड़े हो गए। हालांकि यह एक शांतिपूर्ण रैली थी, जो म्यामांर में हुए जनसंहार और नागरिकता बहाली को लेकर की गई थी, इस रैली में दो लाख से ज्यादा रोहिंग्याओं ने हिस्सा लिया।

विज्ञापन


इससे पहले वहां की सरकार उन्हें दूसरी बार सीमा पार वापस भेजने का असफल प्रयास कर चुकी है, पुलिस के साथ झड़प में दो शरणार्थियों की भी मौत हो गई। खतरा बढ़ते देख सरकार के आदेश पर स्थानीय प्रशासन ने वहां इटरनेट शटडाउन कर दिया।

10 लाख से ज्यादा रोहिंग्या

बांग्लादेश में तकरीबन 10 लाख से ज्यादा रोहिंग्या शरणार्थी हैं, जो वहां के मुसीबत बनते जा रहे हैं। आए दिन वहां के स्थानीय राजनीतिक दलों और शरणार्थियों के बीच झड़पों की खबरें आती रहती हैं, जिसके बाद राष्ट्रीय सुरक्षा और बिना अनुमति रैली से नाराज सरकार ने शरणार्थी शिविरों में 3जी और 4जी सेवाओं पर रोक लगाने के आदेश जारी कर दिए। सरकार ने पहले ही शिविरों में सिम कार्ड की बिक्री पर रोक लगा रखी है।

धारा प्रवाह बांग्लादेशी बोल रहे हैं रोहिंग्या शरणार्थी

बांग्लादेश की खुफिया एजेंसियों का कहना है कि शिविरों में रह शरणार्थी गैरकानूनी तरीके से मोबाइल सुविधा का इस्तेमाल कर रहे हैं। एजेंसियों के मुताबिक हाल के महीनों में कुछ शरणार्थियों के म्यामांर से अवैध मादक पदार्थ की तस्करी में शामिल होने की चिंताओं के बीच 40 से अधिक रोहिंग्याओं की मौत हो चुकी है। वहीं रोहिंग्याओं के साथ झड़प में पिछले महीने सत्तारूढ़ पार्टी के एक सदस्य की हत्या हो गई। स्थानीय नागरिकों के लिए ये रोज की समस्या बन रहे हैं और उन्हें रोजगार छिनने का खतरा उन्हें भी दिखाई दे रहा है।

शुरुआत में धार्मिक भावना के चलते वहां के स्थानीय निवासियों ने उनका स्वागत किया और जगह दी, लेकिन बदलते वक्त के साथ अब कड़वाहट उभरने लगी है। क्योंकि इसका असर अब उनकी जिंदगी पर भी पड़ने लगा है। दो साल पहले 2017 जब रोहिंग्या बांग्लादेश आए थे, तो उस वक्त वे केवल रोहिंग्या भाषा रुयेन्गा बोलते थे, लेकिन अब वे धारा प्रवाह बांग्लादेशी बोलते हैं और आसानी से शरणार्थी होने का पता नहीं चल पाता।

समझौते पर अमल नहीं कर रही बर्मी सरकार

पिछले महीने अगस्त में ही बांग्लादेश ने उन्हें म्यामांर भेजने की भी कोशिश की, लेकिन नाकाम रहे। रोहिंग्या शिविरों के बाहर बांग्लादेशी वाहन खड़े रहे, लेकिन कोई रोहिंग्या उसमें सवार नहीं हुआ। इससे पहले नवंबर 2018 में भी उन्हें वापस भेजने की कोशिश की गई थी, लेकिन नतीजा सिफर रहा। कोई रोहिंग्या परिवार वापस नहीं जाना चाहता। बांग्लादेश और म्यांमार ने नवंबर 2017 में दो सालों के भीतर चरणबद्ध तरीके से रोहिंग्या शरणार्थियों की वापसी को लेकर एक समझौता किया था, लेकिन अब न तो बर्मी सरकार इसके लिए इच्छुक हैं और न ही रोहिंग्या।

विज्ञापन


इसकी वजह है कि म्यामांर सरकार ने रखाइन प्रांत में रोहिंग्या की बस्तियों को खत्म करके पुलिस छावनी और सरकारी ईमारतें बना दी हैं। बर्मी सरकार ने उन्हें नागरिकता का दर्जा देने के लिए तैयार नहीं हैं, तो बांग्लादेश सरकार नागरिकता की बजाय राष्ट्रीय सत्यापन कार्ड देने के लिए तैयार है।

सुनसान भाशन द्वीप पर भेजने की तैयारी

यहां तक कि रोहिंग्या शरणार्थी शिविर छोड़ने के लिए भी तैयार नहीं है। बांग्लादेश सरकार ने उनके लिए एक सुनसान भाशन द्वीप चार या थेनगर चार पर बसाने की भी तैयारी की है। बंगाल की खड़ी में स्थित यह द्वीप म्यामांर और बांग्लादेश के बीच में पड़ता है। 6.7 वर्ग किमी के क्षेत्र में फैले इस द्वीप में सरकार ने 29 करोड़ डॉलर खर्च करके 1,440 घर बनाए हैं। सरकार की योजना है कि यहां तकरीबन एक लाख रोहिंग्याओं को लाकर बसाया जाए। केवल वैसल या जहाज के जरिए ही इस द्वीप पर पहुंचा जा सकता है। लेकिन रोहिंग्या यहां आने के लिये तैयार नहीं हैं, क्योंकि भासन चार को फ्लॉटिंग द्वीप या तैरने वाला द्वीप भी कहा जाता है। जून से लेकर सितंबर तक यहां बाढ़ रहती है और तकरीबन 20 सालों से यहां कीचड़ जमा है, जिसके चलते रोहिंग्या यहां बसने से इंकार कर रहे हैं। वहीं सरकार अब उन्हें जबरन बेदखल करने की योजना बना रही है।

भारत में बन रहे हैं खतरा

जहां ये रोहिंग्या शरणार्थी बांग्लादेश की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बने हुए हैं, वहीं भारत के लिए भी मुसीबत बन रहे हैं। बांग्लादेशी सीमा से सटे होने के कारण घुसपैठ की संभावनाएं बढ़ रही है। 2013 में बोधगया मंदिर में हुए सीरियल ब्लास्ट में रोहिंग्याओं के शामिल होने की खबरें आई थीं, उधर भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने भी इनपुट दिए हैं कि आईएसआई आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद के जरिए रोहिंग्याओं का ब्रेनवॉश करके उन्हें भारत के खिलाफ इस्तेमाल कर सकते हैं।

जैश ने दी रोहिंग्याओं को आतंकी बनने की ट्रेनिंग

बीएसएफ की रिपोर्ट के मुताबिक बांग्लादेश में रोहिंग्याओं के लिए बने कॉक्स बाजार कैंप में जैश आतंकियों की गतिविधियां देखी गई हैं। जैश के बांग्लादेश में मौजूद हैंडलर मौलाना यूनुस ने हाल ही में बांग्लादेश के हरिनमारा की पहाड़ियों में रोहिंग्या आतंकियों को हमले की ट्रेनिंग दी है। रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई बांग्लादेश में मौजूद स्लीपर सेल के जरिये सीरियल ब्लास्ट को अंजाम दे सकती है। अगले महीने अक्टूबर में बांग्लादेशी प्रधानमंत्री शेख हसीना की भारत यात्रा भी प्रस्तावित है, जिसमें रोहिंग्या से जुड़े मुद्दों पर अहम बातचीत हो सकती है।

विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें