अमेरिका के विशेष अधिवक्ता रॉबर्ट मूलर ने शुक्रवार को वो जांच रिपोर्ट अटॉर्नी जनरल को सौंप दी है, जिसका लंबे समय से इंतजार किया जा रहा था। ये रिपोर्ट साल 2016 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में रूस के हस्तक्षेप और ट्रंप के प्रचार अभियान में उसकी मिलीभगत के आरोपों की करीब दो साल की जांच पर आधारित है।
विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी ने इस रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की मांग की है। मूलर ने शुक्रवार को अमेरिका के अटॉर्नी जनरल विलियम बार को रिपोर्ट सौंपी। बार ने कांग्रेस के नेताओं को बताया कि वह "जितना संभव हो सके, उतना जल्द इस सप्ताहांत" इसकी संक्षिप्त रिपोर्ट सौंप सकते हैं।
इस पर व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव सारा सैंडर्स ने कहा, "अगला कदम अटॉर्नी जनरल बार पर निर्भर करता है और हम प्रक्रिया का इंतजार करेंगे। व्हाइट हाउस को विशेष अधिवक्ता की रिपोर्ट नहीं मिली है और ना ही उसके बारे में बताया गया है।"
ये मूलर द्वारा की गई जांच की आखिरी रिपोर्ट है। लेकिन अब इसके जारी होने के बाद ही कई बड़े खुलासे हो पाएंगे। जिनपर विवाद होने की संभावना है। अब इस मामले में आगे क्या होगा ये ट्रंप के अटॉर्नी जरनल, कांग्रेस और फेडेरल अदालत तय करेंगी। मूलर इस मामले में साल 2017 से जांच कर रहे हैं।
हालांकि ट्रंप इन आरोपों से हमेशा से ही इनकार करते रहे हैं। उनका कहना है कि 2016 के राष्ट्रपति चुनाव में कोई रूसी हस्तक्षेप नहीं था। वहीं दूसरी तरफ रूस भी चुनावों में मध्यस्थता के आरोपों को खारिज कर चुका है।
बार का कहना है कि 'रिपोर्ट को आने दो और लोगों को देखने दो।' इसी हफ्ते ट्रंप भी कह चुके हैं कि अगर जनता को रिपोर्ट देखने की अनुमति दी जाती है तो उन्हें इससे कोई आपत्ति नहीं है।
जांच से संबंधित होने वाली बातचीत को लेकर ट्रंप कह चुके हैं कि विशेष अधिवक्ता रॉबर्ट मूलर की पूछताछ में उन्हें बताई गई किसी भी बात का इस्तेमाल उनके खिलाफ हो सकता है।
ट्रंप लगातार यह कहते रहे हैं कि वह मूलर के साथ बैठकर बात करना चाहते हैं क्योंकि कोई सांठगांठ नहीं है। लेकिन राष्ट्रपति ने इस बात को लेकर चिंता जाहिर की कि जांचकर्ता उनके बयान का उनके खिलाफ ही इस्तेमाल कर सकते हैं, अगर वे उन अन्य लोगों से मेल नहीं खाते जिनसे वे पहले ही पूछताछ कर चुके हैं।