बचपन में जो बच्चे किसी सदमे से गुजरे होते हैं। उन्हें नजरअदांज किया जाता है, अनदेखी की जाती है या पारिवारिक माहौल अच्छा नहीं होता है, हमेशा कलह रहती है। ऐसे बच्चों के 50 से 60 की उम्र में पहुंचने पर उन्हें हृदय संबंधी रोगों का खतरा रहता है।
नॉर्थ वेस्टर्न मेडिसिन का अध्ययन हाल ही में अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन जर्नल में प्रकाशित हुआ है। प्रमुख शोधकर्ता डॉ. जैकब पियर्स ने बताया है कि बचपन में परिवार के खराब माहौल के चलते 50 फीसदी बच्चों को हृदय संबंधी तकलीफ होती है जिसमें हार्ट अटैक और स्ट्रोक के मामले शामिल हैं।
इस अध्ययन में 36 हजार मरीजों को शामिल किया गया था। अध्ययन के अनुसार इस स्थिति से गुजरने वाले बच्चों को जिंदगीभर तनाव रहता है, बेचैनी घबराहट की तकलीफ होती है, सिगरेट पीते हैं, अवसाद में रहते हैं और उनकी जीवनशैली भी खराब होती है।
इस कारण उनका बीएमआई भी खराब होता है, जिसके चलते वे बीपी और दूसरी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की चपेट में आ जाते हैं। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि अभी इसको लेकर और अध्ययन की जरूरत है।