बोइंग 747 का जन्म भी किसी कहानी की तरह ही है। बोइंग एक अमेरिकी कंपनी है, जिसने 747 विमान के लिए साल 1966 में ऑर्डर लेने शुरू किए थ। उस वक्त इसकी इतनी चर्चा थी कि उस साल 10 एयरलाइंस ने 83 विमानों का ऑर्डर दिया था। इनमें से पांच अमेरिकी एयरलाइंस थीं और एक-एक फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और ब्रिटेन की थी। इसके अगले साल एयर इंडिया ने अपने पहले दो बोइंग 747 विमानों का ऑर्डर दिया था और इसके बाद से साल 1995 के बीच 15 और विमानों का ऑर्डर दिया था।
साल 1966 के अलावा, 1986 और 1990 दो ऐसे साल रहे जब इन विमानों के ऑर्डर की संख्या 80 के पार रही। 90 के दशक के मध्य तक जंबो नाम से मशहूर बोइंग 747 ने लंबे मार्गों पर एकक्षत्र राज किया। हालांकि, 1991 में बोइंग की यूरोपीय प्रतिस्पर्धी कंपनी एयरबस ने चार इंजन वाला ए340 विमान लॉन्च किया था। बोइंग ने खुद 1994 में 777 विमान लॉन्च किया था, इसमें दो इंजन थे लेकिन यह 300 से 500 यात्रियों के साथ लंबी दूरी की यात्रा करने में सक्षम था।
इन नई पीढ़ी के विमानों ने यात्रा के समय को भी कम किया। इस समय की बचत में एक सुरक्षा की अवधारणा है जिसे एक्सटेंडेड डायवर्जन टाइम ऑपरेशंस (ईटीडीओ) कहा जाता है। अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन नियामक के अनुसार दो इंजन वाले एक विमान को उड़ान का एक मार्ग चुनना पड़ता है जो यह सुनिश्चित करता हो कि विमान कभी भी एक एयरपोर्ट से 60 मिनट से अधिक दूरी पर न हो जहां यह केवल एक इंजन पर भी लैंड कर सकता हो। इसे ईटीडीओ-60 भी कहते हैं।
छोटी उड़ानों के लिए यह ठीक है, लेकिन लंबी उड़ानों के लिए 60 मिनट की अवधि वाला ईटीडीओ एयरलाइन को सबसे छोटा संभव मार्ग चुनने की हमेशा अनुमति नहीं देता है। जैसे-जैसे तकनीक उन्नत हुई, नए मॉडल्स के लिए ईटीडीओ की अवधि भी बढ़ी। यहां तक कि दो इंजन वाले विमानों के लिए भी इसकी अवधि बढ़ाई गई। आज, विमानों को नजदीकी एयरपोर्ट से 370 मिनट तक की दूरी तक (ईटीडीओ-370) उड़ान भरने की अनुमति है। बोइंग 747 ने इडीओटी की लंबी अवधि का फायदा उठाया। अब, अन्य विमान भी ऐसा कर रहे हैं।
समय के साथ ऐसी लगभग हर एयरलाइन ने अपनी बोइंग 747 खरीदा, जिसकी अंतरराष्ट्रीय साख अच्छी थी। इस सूची में जापान सबसे ऊपर रहा जिसके पास 108 विमान थे। इसके बाद ब्रिटिश एयरवेज, सिंगापुर एयरलाइंस और लुफ्थांसा आदि का नाम शामिल है। लेकिन एक के बाद एक, सभी 747 को विदाई दे रहे हैं। जापान एयरलाइंस ने यह काम 2011 में और यूनाइटेड एयरलाइंस ने साल 2017 में किया था। ऑस्ट्रेलिया कि कंतास एयरलाइंस ने यह काम इसी साल जुलाई में किया था।