अमेरिका में धनी लोगों पर टैक्स बढ़ाने के प्रस्ताव पर चल रही तीखी बहस के बीच वेबसाइट प्रोपब्लिका.ओआरजी के ताजा खुलासे ने एक नया पहलू जोड़ दिया है। इससे टैक्स ना बढ़ाने की वकालत कर रहे नेताओं की दलील को झटका लगा है। अकसर इस बहस में ये दलील दी गई है कि अमेरिकी सिस्टम के भीतर हर व्यक्ति वाजिब टैक्स चुकाता है।
लेकिन वेबसाइट प्रोपब्लिका ने टैक्स विभाग (इंटरनल रेवेन्यू सर्विस- आईआरएस) के 15 साल के गोपनीय दस्तावेजों को हासिल कर जो तथ्य बताए हैं, वे अमेरिका के टैक्स सिस्टम में मौजूद खामियों की पोल खोलने वाले हैं। इसके मुताबिक दुनिया के सबसे धनी व्यक्ति अमेजन कंपनी के मालिक जेफ बिजॉस ने 2007 और 2011 में एक पैसा भी इनकम टैक्स नहीं चुकाया। दुनिया के दूसरे सबसे धनी व्यक्ति टेसला कंपनी के संस्थापक एलन मस्क 2018 में शून्य इनकम टैक्स चुकाया। वेबसाइट के खुलासे के मुताबिक अरबपति माइकल ब्लूमबर्ग ने हाल के कई वर्षों में, अरबपति निवेशक कार्ल इकान ने दो वित्तीय वर्ष में और अरबपति जॉर्ज सोरोस ने लगातार तीन साल अमेरिका की संघीय सरकार को एक पैसा भी इनकम टैक्स के रूप में नहीं दिया।
प्रोपब्लिका ने बताया है कि उसने देश के हजारों धनी लोगों के टैक्स दस्तावेज हासिल किए हैं। इनसे अमेरिका के धनी लोगों की वित्तीय जिंदगी पर रोशनी पड़ती है। इन लोगों में वॉरेन बुफेट, बिल गेट्स, रुपर्ट मरडॉक और मार्क जकरबर्ग शामिल हैं। प्रोपब्लिका के मुताबिक उसे न सिर्फ इन लोगों के इनकम और दूसरे टैक्सों का ब्योरा हासिल हुआ है, बल्कि उन लोगों के निवेश, स्टॉक ट्रेडिंग, गैंबलिंग और उनकी अन्य ऑडिट रिपोर्टें भी अब उसके पास है।
प्रोपब्लिका ने अपनी टिप्पणी में लिखा है- ‘इस दस्तावेजों के यह मिथक टूट जाता है कि अमेरिका में हर व्यक्ति अपने हिस्से का टैक्स न्यायपूर्ण ढंग से चुकाता है और सबसे धनी अमेरिकी सबसे ज्यादा टैक्स देते हैं। आईआरएस के दस्तावेज दिखाते हैं कि सबसे धनी लोग हर साल बढ़ती जा रही अपनी अरबों डॉलर की आमदनी का बेहद छोटा हिस्सा टैक्स के रूप में चुकाते हैं। ऐसा वे बिल्कुल वैध ढंग से करते हैं।’
जबकि हर महीने की अपनी तनख्वाह पर निर्भर अमेरिकी कामकाजी लोग अपने धन में मामूली इजाफा ही कर पाते हैं। लेकिन जैसे-जैसे उनकी आमदनी बढ़ती है, उनका इनकम टैक्स भी बढ़ता चला जाता है। हाल के वर्षों में अमेरिका की औसत घरेलू आमदनी 70 हजार डॉलर प्रति वर्ष रही है। इस पर औसत घरानों ने 14 फीसदी संघीय टैक्स चुकाया है। जो दंपति सालाना 6,28,300 डॉलर से अधिक कमाते हैं, उन्हें सर्वोच्च टैक्स दर यानी 37 फीसदी के हिसाब से इनकम टैक्स देना होता है। जबकि सबसे धनी लोग टैक्स व्यवस्था को ठेंगा दिखा कर अपनी आमदनी का बेहद मामूली हिस्सा टैक्स के रूप में दे रहे हैं।
विश्लेषकों ने कहा है कि अमेरिकन अरबपति जिन उपायों के सहारे टैक्स बचाते हैं, वे आम लोगों की पहुंच से बाहर हैं। अरबपतियों को सबसे ज्यादा आमदनी अपने शेयरों और जायदाद का मूल्य बढ़ने से होती है। ऐसी आमदनी पर अमेरिका में तब तक टैक्स नहीं लगता, जब तक कि उनकी बिक्री ना की जाए। नतीजा यह है कि फॉर्ब्स पत्रिका के मुताबिक जिन 25 लोगों की संपत्ति 2014 से 2018 तक साझा तौर पर 401 अरब बढ़ी, उन्होंने संघीय इनकम टैक्स के रूप में रूप में सिर्फ 13.6 अरब रुपये चुकाए। इसका मतलब हुआ कि उन्होंने सिर्फ 3.4 फीसदी की दर से कर चुकाए। दूसरी तरफ मध्य वर्ग पर आमदनी के साथ-साथ टैक्स का भारी बोझ बढ़ता गया। वेबसाइट प्रोपब्लिका ने कहा है कि इस सीरिज में आगे वह उन उपायों को विस्तार से बताएगी, जिनके जरिए अति धनी लोग अपना टैक्स बचा लेते हैं।