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ईरान के रेजा: क्या तेहरान की राजनीति में कोई नया अध्याय लिखा जाना बाकी है?

Sat, 17 Jan 2026 07:21 AM IST
लव गौर अमर उजाला नेटवर्क

सार

  • शख्स: रेजा पहलवी
  • चर्चा: ईरान के निर्वासित आखिरी शासक शाह मोहम्मद रेजा पहलवी के बेटे।
  • क्यों: लंबे समय से खुद को ईरान के भविष्य के नेता के तौर पर पेश करते आ रहे हैं।

प्रशिक्षित पायलट हैं, रूमी के प्रशंसक हैं, ईरान के इतिहास, संस्कृति और दर्शन पर तीन किताबें लिख चुके हैं, अहिंसा के पैरोकार और ईरानी राजशाही की पुरुष-प्रधान परंपरा को तोड़ते हुए अपनी बेटियों को उत्तराधिकारी घोषित कर चुके रेजा पहलवी के लिए क्या ईरान की राजनीति में कोई नया अध्याय अभी लिखा जाना बाकी है?
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निर्वासित ईरानी क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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ईरान में एक दौर वह भी था, जब सत्ता महलों की ऊंची दीवारों के पीछे सांस लेती थी और सम्राट ही पूरे मुल्क की तकदीर का फैसला करता था। शाह मोहम्मद रेजा पहलवी भी उस वक्त दुनिया के सबसे रसूखदार शासकों में शुमार थे, जो ईरान पर शासन कर रहे थे। मगर उनके जीवन में एक खालीपन भी था। उन्हें अपनी विरासत सौंपने के लिए एक बेटे की दरकार थी। उन्होंने तीन शादियां कीं, पर बदकिस्मती से शुरुआती दोनों बीवियां उन्हें वारिस न दे सकीं। वक्त अपनी रफ्तार से बढ़ता रहा और फिर आई 31 अक्तूबर, 1960 की मध्य रात्रि। शाह मोहम्मद की तीसरी बीवी फराह दीबा ने तेहरान के एक अस्पताल में बेटे को जन्म दिया। नाम रखा गया रेजा पहलवी। उस दिन पूरे ईरान में जश्न का सैलाब उमड़ पड़ा। अस्पताल से लेकर शाही महल तक लोग झूम रहे थे, क्योंकि देश को उसका 'युवराज' और शाह मोहम्मद को उनका वारिस मिल चुका था।
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हालांकि, उनके जन्म के सत्रह वर्षों बाद ही इस्लामी क्रांति ने ईरानी सत्ता की तस्वीर बदल दी। सड़कों पर क्रांति की ऐसी आग भड़की कि शाही खानदान को रातों-रात अपना देश छोड़ना पड़ा। रेजा ने दूर टेक्सास में बैठकर देखा कि कैसे उनके पिता का विशाल साम्राज्य ताश के पत्तों की तरह बिखर गया। वह फिर कभी अपने देश नहीं आ सके। लेकिन करीब चार दशकों बाद ईरान के भीतर उठ रहे विरोध के सुरों के बीच उनका नाम एक बार फिर सुर्खियों में है।

संगीत, फुटबाल और लेखन में रुचि
रेजा पहलवी पढ़ने-लिखने और फुटबाल व टेनिस खेलने के शौकीन हैं। स्कूली शिक्षा के दौरान वह स्कूल की फुटबाल टीम के कप्तान भी थे। वह कारों, फोटोग्राफी और शास्त्रीय संगीत में भी काफी दिलचस्पी रखते हैं। इसके अलावा, रेजा ईरानी, मध्य पूर्वी और यूरोपीय व्यंजनों को बनाना पसंद करते हैं। उन्हें तैराकी और घुड़सवारी का भी शौक है। वह ईरानी संस्कृति, इतिहास, दर्शन और लोकतांत्रिक मूल्यों में गहरी रुचि रखते हैं। रेजा पारसी कवि रूमी के प्रबल प्रशंसक हैं और अपने भाषणों में उनकी पंक्तियां अक्सर उद्धृत करते हैं। उन्होंने तीन किताबें भी लिखी हैं-गोजाश्तेह वा आयंदेह; विंड्स ऑफ चेंज: द फ्यूचर ऑफ डेमोक्रेसी इन ईरान तथा ईरान : ल'ह्यूर डु चोइक्स।
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परिवार और बचपन
रेजा अपने भाई-बहनों में सबसे बड़े हैं। उन्होंने अपने पिता को 1980 में खो दिया, और बाद में उनके दो छोटे भाई-बहनों (लैला और अली रेजा) की भी मृत्यु हो गई। वर्तमान में उनके भाई फरनाज ही जीवित हैं। पहलवी की प्रारंभिक शिक्षा तेहरान के नियावरन पैलेस में निजी शिक्षकों की देखरेख में हुई, जहां उन्हें सामान्य शिक्षा के साथ ईरानी इतिहास, संस्कृति और राजकीय शिष्टाचार सिखाया गया। 1978 में रेजा अमेरिका गए और टेक्सास के रीज एयर फोर्स बेस में यूनाइटेड स्टेट्स एयर फोर्स के तहत जेट फाइटर पायलट का प्रशिक्षण लिया। इसके बाद उन्होंने मैसाचुसेट्स विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान की पढ़ाई शुरू की, पर पिता की गंभीर बीमारी के कारण पढ़ाई अधूरी छोड़कर परिवार के साथ काहिरा चले गए। बाद में उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ सदर्न कैलिफोर्निया से डिस्टेंस एजुकेशन (कॉरेस्पॉन्डेंस) के माध्यम से स्नातक की डिग्री पूरी की। 1986 में, रेजा पहलवी ने यास्मीन एतेमाद-अमिनी से विवाह किया, जो पेशे से एक वकील हैं। उनकी तीन बेटियां नूर, इमान और फराह हैं।

कई भाषाओं के जानकार
रेजा को बचपन में राजा बनने के लिए तैयार किया जा रहा था। निजी शिक्षक घर आते और उन्हें दुनिया भर की तहजीब सिखाते। पर उनकी दिलचस्पी जमीन से ज्यादा आसमान में थी। उन्हें लड़ाकू विमानों की गर्जना रोमांचित करती थी। यही वजह थी कि महज 12 साल की उम्र में ही उन्होंने अकेले विमान उड़ाकर सबको हैरत में डाल दिया था। तब हर जुबां पर यही बात थी कि यह बच्चा आसमान फतह करने और ईरान पर राज करने के लिए ही पैदा हुआ है। वह फारसी (पर्शियन), अंग्रेजी और फ्रेंच आदि भाषाओं में दक्ष हैं।

जिमी कार्टर और रॉक म्यूजिक
रेजा पहलवी खुद को भविष्य का शासक नहीं, बल्कि ईरानियों के बीच का ऐसा सेतु मानते हैं, जो अलग-अलग विचारधाराओं को जोड़ सके। वह अहिंसक बदलाव के पैरोकार हैं। ईरानी राजशाही की पुरुष-प्रधान परंपरा को तोड़ते हुए उन्होंने विवाह के बाद अपनी तीनों बेटियों को उत्तराधिकारी घोषित किया। उनके बारे में यह भी कहा जाता है कि अमेरिकी राष्ट्रपति जिमी कार्टर की ईरान यात्रा के दौरान, अपनी किशोरावस्था में उन्होंने शाही महल के भीतर बहुत तेज आवाज में रॉक म्यूजिक बजाया था।

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युद्ध में लड़ने की अधूरी ख्वाहिश
1980 के दशक में जब ईरान-इराक युद्ध शुरू हुआ, तो रेजा पहलवी ने एक देशभक्त और प्रशिक्षित फाइटर पायलट के रूप में अपनी सेवाएं देने की पेशकश की थी। उन्होंने तत्कालीन ईरानी सरकार को पत्र लिखकर कहा था कि वह एक फाइटर पायलट के रूप में देश के लिए लड़ना चाहते हैं, लेकिन उनकी इस पेशकश को सुरक्षा और राजनीतिक कारणों से ठुकरा दिया गया था।

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