डलग्लीशऔर सोरेन्सन ने बताया उनके पास करीब एक वर्ष से चीन में वायरस बनाने बनाए जाने के साक्ष्य हैं, लेकिन अधिकतर वैज्ञानिक और विज्ञान पत्रिकाएं उनकी रिपोर्ट को अनदेखा करती आई हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, 22 पन्नों की रिपोर्ट से अंतरराष्ट्रीय तनाव भी बढ़ सकता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, चीन के कई वैज्ञानिक इस कोरोना वायरस पर काम कर रहे थे। इनमें से कई तो अमेरिका के विश्वविद्यालय के साथ भी काम कर रहे थे।
स्पाइक में 4 अमीनो एसिड, कुदरती वायरस में यह असंभव
अध्ययनकर्ता सोरेन्सन के मुताबिक, कोरोना वायरस के स्पाइक में 4 अमीनो एसिड हैं, जो पॉजिटिव चार्ज रखते हैं। इससे वायरस के स्पाइक मानव कोशिकाओं के नेगेटिव चार्ज वाली हिस्सों को मजबूती से जकड़कर संक्रमण फैलाते हैं।
प्राकृतिक रूप से तीन अमीनो एसिड एक स्पाइक पर मिलना बहुत दुर्लभ है। मौजूदा वायरस में यह चार हैं, जो कृत्रिम रूप से बनाए जाने पर ही संभव है। सोरेन्सन के अनुसार, यह वायरस मोहन लैब के कम सुरक्षा वाले क्षेत्र से लीक होने की संभावना है। पहले भी इस प्रकार से वायरस लीक हुए हैं।
अमेरिका की पूर्व विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो ने शनिवार को दावा किया कि चीन के वुहान इंस्टीट्यूट आफ वायरोलॉजी में सैन्य शोध से जुड़ी गतिविधियां भी चल रही थी। उन्होंने कहा, कि यह पुख्ता दावा है, पीपल्स लिबरेशन आर्मी से जुड़े काम इसलिए लैब में किए जा रहे हैं।
साथ ही दुनिया को दिखाने के लिए नागरिक शोध भी किए जाते हैं। तत्काल राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शासनकाल में विदेश मंत्री रहते हुए पॉम्पियो ही वुहान लैब से वायरस लीक होने की दिशा में जांच करने के लिए डब्ल्यूएचओ पर दबाव बनाते रहे थे।
पॉम्पियो ने आरोप लगाया कि चीन ने इस प्रयोगशाला में हो रहे सैन्य शोधों पर पर्दा डालने के लिए ही विश्व को पूरी जानकारी देने से इनकार कर दिया। कोरोना महामारी से दुनिया भर में अब तक 36 लाख से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। चीन ने डब्ल्यूएचओ की जांच टीम को जांच के दौरान कई अहम डाटा और रिपोर्ट देने से इंकार कर दिया था।