जापान में करीब दस लाख युवाओं ने ख़ुद को बाहरी दुनिया से दूर कर लिया है। कई बार तो ये लोग दशकों तक अपने घर में ही छिपे रहते हैं। लेकिन सवाल उठता है कि आखिर क्यों?
स्कूल छोड़ने के बाद हाइड के लिए दिक्कतें शुरू हो गईं।
वो कहते हैं, "मैं ख़ुद को दोष देता था। स्कूल छोड़ने के लिए मेरे परिजन भी मुझे दोष देते थे। मुझ पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा था। फिर धीरे-धीरे मुझे बाहर निकलने और लोगों से मिलने में भी डर लगने लगा। आख़िरकार मैं अपने घर में क़ैद होकर रह गया।"
धीरे-धीरे हाइड का संपर्क अपने सभी दोस्तों से कट गया और उन्होंने अपने परिजनों से भी बात करना बंद कर दिया। उनसे बचने के लिए हाइड दिन में सोते और रात भर जागकर टीवी देखते थे।
वो कहते हैं, "मेरे मन में सिर्फ़ नकारात्मक विचार भरे थे। मैं बाहर जाना चाहता था, समाज और परिवार के प्रति मेरे मन में ग़ुस्सा था, ख़ुद की हालत पर दुख होता था, भविष्य को लेकर डरा रहता था और जो लोग सामान्य जीवन जी रहे हैं, उनके प्रति मेरे मन में जलन थी।"
सामाजिक भय
दरअसल हाइड 'अंतर्मुखी' बन गए थे। अंतर्मुखी या बाहरी दुनिया से कटे युवाओं को जापान में 'हिकीकोमोरी' कहा जाता है। और लगभग सभी जापानी इस शब्द से परिचित हैं।
1990 के दशक में तमाकी साइतो ने मनोवैज्ञानिक के रूप में अपना करियर शुरू ही किया था। उनके पास ज्यादातर ऐसे परिजन आ रहे थे जिनके बच्चों ने स्कूल जाना छोड़कर कमरे में अकेले रहना शुरू कर दिया था। ये बच्चे महीनों और कई बार सालों तक अपने कमरों से बाहर नहीं निकल रहे थे।
अधिकतर मामले मध्यवर्गीय परिवारों के थे। स्कूल छोड़कर ख़ुद को कमरे में बंद करने की औसत उम्र 15 साल थी। यह किशोरावस्था के आलस्य जैसा था। कमरे में बंद रहो और परिजन आपका इंतजार करते रहें। लेकिन साइतो के मुताबिक पीड़ित सामाजिक भय के कारण सहमे हुए थे।
वो बाहर निकलकर दोस्त बनाना चाहते थे, प्यार करना चाहते थे लेकिन वो कर नहीं पा रहे थे क्योंकि उनके मन में डर बैठा हुआ था। अलग-अलग मरीजों में अलग-अलग लक्षण होते हैं। कुछ अचानक हिंसक हो जाते हैं और एकदम उलट शिशु जैसा व्यवहार करते हैं, जैसे मां के शरीर को पंजे से खुरचना आदि।
बाहरी दुनिया
कुछ एकदम जुनूनी पागल और उदास दिखते हैं। जिस वक्त साइतो ने अपना शोध शुरू किया था उस वक्त सामाजिक अलगाव अज्ञात अवस्था नहीं थी लेकिन डॉक्टर इसे विशेष अवस्था के बजाए अन्य बीमारियों के लक्षण के रूप में देखते थे।
जब से साइतो ने इस अवस्था पर शोध शुरु किया है तब से ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ी है। एक अनुमान के मुताबिक अभी करीब दो लाख युवा हिकीकोमोरी हैं। हालांकि 2010 में जापान सरकार के एक सर्वे के मुताबिक ऐसे मरीजों की संख्या सात लाख है।
चूंकि इस अवस्था में मरीज खुद बाहरी दुनिया से छिपा रहता है। ऐसे में साइतो भी मानते हैं कि मरीजों की संख्या करीब दस लाख भी हो सकती है। अब हिकीकोमोरी होने की औसत आयु भी बढ़ गई है। ये दो दशक पहले 21 साल थी और अब 32 साल है।
लेकिन सवाल यही है कि जापानी युवा अंतर्मुखी होकर अकेले बंद क्यों हो जाते हैं? एक किशोर लड़के के लिए हिकीकोमोरी होने का कारण स्कूल में कम नंबर आना या दिल टूटना जैसी मामूली बात भी हो सकती है।
डॉक्टरी मदद
सामाजिक कारण भी युवाओं को कमरे में बंद रहने के लिए मजबूर करते हैं। जापान में 'सेकेनतेई' भी ऐसा ही एक कारक है। सेकेनतेई का अर्थ है समाज में किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा और उस प्रतिष्ठा को बरकरार रखने का दबाव।
हिकीकोमोरी जितने लंबे समय तक समाज से दूर रहते हैं उतना ही ज्यादा वे अपनी सामाजिक नाकामी के बारे में चिंतित होते जाते हैं। वे अपना आत्मविश्वास और आत्मसम्मान खो देते हैं और उनके लिए घर से निकलना मुश्किल होता जाता है।
यहां तक कि परिजन भी अपनी सामाजिक साख़ के प्रति संवेदनशील होते हैं और डॉक्टरी मदद लेने में अक्सर लेट हो जाते हैं। हिकीकोमोरी हो जाने का दूसरा सबसे बड़ा कारण परिवार पर निर्भरता है। यह जापान में परिवारिक रिश्तों के कारण भी है।
जापान में युवतियां शादी होने तक अपने माता-पिता के साथ रहती हैं जबकि युवक जीवन भर अपने पारिवारिक घर में रहते हैं। आधे से अधिक हिकीकोमोरी अपने परिजनों के प्रति हिंसक होते हैं फिर भी परिवार उन्हें घर से निकालने की सोच भी नहीं सकते।
परिवार से मतभेद
कई बार नौकरी और परिवार के प्रति जिम्मेदारियों से बचने के लिए भी युवा हिकीकोमोरी हो जाते हैं।
मत्सु करियर और पढ़ाई के मुद्दे पर परिवार से हुए मतभेद के कारण अंतर्मुखी हो गए और एकाकी जीवन बिताने लगे।
वे कहते हैं, "मैं मानसिक रूप से बहुत अच्छा था लेकिन मेरे परिजन मुझे उस राह पर चलने के लिए मजबूर कर रहे थे जिस पर मैं चलना नहीं चाहता था। मेरे पिता एक आर्टिस्ट हैं और अपना व्यापार करते हैं। वे चाहते थे कि मैं भी वही करूं।"
मत्सु कंप्यूटर प्रोग्रामर बनकर नौकरी करना चाहते थे। परिवार से मतभेद के कारण वह अकेले रहने लगे और हिकीकोमोरी बन गए। अकसर परिजनों की उम्मीद का बोझ युवकों को एकाकी बना देता है।
हिकीकोमोरी बनने वाले ज्यादातर युवक परिवार में सबसे बड़ी संतान होते हैं। उन पर परिवार की प्रतिष्ठा को बनाए रखने का बोझ होता है।
तोक्यो के राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य संस्थान से जुड़े मनोवैज्ञानिक यूरिको सुजूकी कहते हैं, "पारंपरिक तौर पर जापानी लोग समूह में काम करते हैं। वह समूह से अलग नहीं दिखना चाहते। लेकिन मैं समझता हूं कि युवा जापानी ज्यादा व्यक्तिगत और विशेष ध्यान चाहते हैं।"
नौकरियों की स्थिरता
ब्रिटेन की ग्लासगो यूनिवर्सिटी के शिक्षाविद एंडी फुर्लोंग हिकीकोमोरी के बढ़ते मामलों को जापान की गिरती अर्थव्यवस्था से जोड़कर देखते हैं।
उनके मुताबिक 1990 के दशक में जापानी अर्थव्यवस्था का ग़ुब्बारा फूटने के साथ ही जापान में नौकरियों पर ख़तरा मंडराने लगा और इसी से लोगों में करियर के प्रति असुरक्षा की भावना विकसित हुई थी।
कमजोर अर्थव्यवस्था ने जापान में युवाओं के एक बड़े वर्ग को किसी काम का नहीं छोड़ा। इस वर्ग का बड़ा हिस्सा हिकीकोमोरी हो गया। 60 और 70 के दशक की बढ़ती जापानी अर्थव्यवस्था के दौरान स्थिर करियर बनाने वाली पीढ़ी ख़ुद को इन युवाओं से जोड़कर नहीं देख पाई। इसने उन्हें और भी अकेला बना दिया।
आम तौर पर हिकीकोमोरी हुए युवाओं के प्रति परिवार गुस्सा दिखाता है। उनसे बार-बार कहा जाता है कि वह किसी काम के नहीं है और उनके कारण समाज में परिवार का कितना अपमान हो रहा है।
ऐसे में हिकीकोमोरी परिवार से नजरें चुराने लगते हैं और फिर हालात ऐसे होते हैं कि वह अपने परिवार से बात ही नहीं करना चाहते। जैसा कि हाइड के मामले में हुआ।
सामान्य जिंदगी
कई बार परिवार बाहरी कंपनियों की मदद से अपने बच्चों को जबरदस्ती कमरे से बाहर निकालकर दुनिया से जोड़ने की कोशिश करते हैं, जो अकसर ख़तरनाक साबित होता है।
शीबा के होहनोडाई अस्पताल के मनोवैज्ञानिक विभाग के निदेशक काजूहिको कहते हैं, "अचानक किया गया हस्तक्षेप, भले ही चिकित्सीय विशेषज्ञ करें, वो घातक साबित हो सकता है। कई मामले में मरीज़ हिंसक हो जाता है।"
वे कहते हैं, "हिकीकोमोरी के पास जा रहे स्वास्थ्य से जुड़े पेशेवर लोगों को भी सावधानी बरतते हुए उनके बारे में पहले पूरी जानकारी इकट्ठा करनी चाहिए।"
हाइड और मत्सु को वापस सामान्य जिंदगी शुरू करने में एक चैरिटी संस्था के यूथ क्लब इबाशो ने मदद की। यहां आकर युवा दोबारा समाज के साथ जुड़ने की कोशिश करते हैं।
यहां आकर हाइड और मत्सु के अपने परिवार के साथ संबंध बेहतर हुए हैं। हाइड अब पार्ट टाइम नौकरी करते हैं जबकि मत्सु ने कंप्यूटर प्रोग्रामर की एक नौकरी के लिए इंटरव्यू दिया है।
बीबीसी संवाददाता विलियम क्रेमर एवं क्लाडिया हैमंड की रिपोर्ट