जब उनकी मौत हुई तब वो लारा पीटर्स थीं। इससे पहले उनका नाम स्वेतलाना अलिलुयेवा था और उससे भी पहले वो स्वेतलाना लोसिफोवना स्टालिन के नाम से जानी जाती थीं। वो सोवियत संघ के नेता और शासक जोसेफ स्टालिन की एकलौती बेटी थीं। जोसेफ स्टालिन ने 1922 से 1953 तक सोवियत संघ पर शासन किया था।
स्टालिन के दो बेटे थे पर वो उनकी खास थीं. स्टालिन का जीवन विनयशीलता और विद्रोह के बीच एक विरोधाभास था। इसका असर स्वेतलाना के जीवन पर पड़ा। यहां तक कि उन्हें अपना नाम बदलने के लिए क्रेमलिन से इजाजत लेनी पड़ी थी। इसके लिए उन्हें लोगों की आलोचनाओं का भी सामना करना पड़ा था कि वो स्टालिन की पहचान मिटा रही हैं।
स्वेतलाना अलिलुयेवा की बायोग्राफी 'स्टालिन्स डॉटरः द एक्सट्राऑर्डिनरी एंड टूमलट्यूअस लाइफ ऑफ स्वेतलाना अलिलुयेवा' की लेखक रोजमेरी सुलीवन कहती हैं, "उन्होंने पूरा जीवन अपने पिता के नाम से जिया।" स्वेतलाना की जिंदगी पर चार सालों तक कई देशों में शोध और उनके परिवार के दर्जनों सदस्यों, दोस्तों और परीचितों से इंटरव्यू करने वाली सुलीवन के मुताबिक स्टालिन की बेटी एक योद्धा थीं।
सुलीवन ने बीबीसी मुंडो से कहा, "उनमें कल्पनाशक्ति थी, लिखने का जुनून था। वो अपने पिता के नाम में खुद को कैद महसूस करती थीं। वो निराश हो चुकी थीं, लेकिन उन्होंने इसके खिलाफ लड़ना बंद नहीं किया। उनका दृढ़ संकल्प बहुत प्रभावशाली था।" स्वेतलाना का जन्म 26 फरवरी 1926 को हुआ था। वो स्टालिन की सबसे छोटी संतान थीं। उनके लाल बाल और नीली आंखें उनकी नानी की तरह थीं।
वो क्रेमलिन की राजकुमारी थीं, लेकिन कहा जाता है कि वो वहां सादगी से जीवन जीती थीं. स्वेतलाना जोसेफ स्टालिन की कमजोरी थीं। स्टालिन उन्हें नन्हीं बुलबुल या छोटी तितली कह कर बुलाते थे। सुलीवन की किताब में स्वेतलाना की मां नाद्या की एक दोस्त के मुताबिक स्टालिन को अगर कोई शांत कर सकता था तो वो स्वेतलाना थीं।
स्वेतलाना साढ़े छह साल की थीं जब उनकी मां ने आत्महत्या की थी। एक वयस्क के तौर पर स्वेतलाना ने कहा था कि उनके पिता की क्रूरता से बचने के लिए मां के पास आत्महत्या के अलावा कोई और रास्ता नहीं था। स्टालिन अपनी बेटी पर नाद्या की मौत का असर समझते थे। जब भी स्वेतलाना अपने पिता से कुछ मांगती थीं तो स्टालिन कहते थे, "मांग क्यों रही हैं, आप आदेश दीजिए और मैं उसे तुरंत पूरा करूंगा।"
'साम्यवाद की योद्धा'
स्वेतलाना का स्कूली जीवन स्टालिन के विशाल व्यक्तित्व के साथ गुजरा। उनकी छवि हर जगह थी। सुलीवन के मुताबिक स्वेतलाना कहती थीं, "लेनिन मेरे आदर्श थे। मार्क्स और एंगल्स हमारे प्रचारक और स्टालिन तो बिना अपवाद के हमेशा सही थे।"
2011 में मरने से पहले स्वेतलाना ने रूस के वर्तमान राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन की आलोचना की थी। उनके मुताबिक पुतिन उनके पिता की तरह जी रहे थे। 1939 में गृह विभाग ने स्वेतलाना को उनकी देखरेख करने वाली अलेक्जेंड्रा एंड्रीवना से दूर करने की कोशिश की। विभाग का मानना था कि अलेक्जेंड्रा पर विश्वास नहीं किया जा सकता था।
स्वेतलाना ने ऐसा न करने के लिए अपने पिता से बहुत मिन्नतें कीं। स्वेतलाना ने अपनी एक किताब में लिखा, "मेरे पिता मेरे आंसू नहीं देख सकते थे।" स्टालिन अपनी बेटी पर गर्व करते थे। वो सबसे कम उम्र की 'साम्यवाद की योद्धा' थीं। वह उस विचारधारा को गुलामों की मानसिकता मानती थीं जिसमें निजी विचारों पर अंकुश लगाया जाता था।