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नेपाल में भारत के 500-1000 वाले पुराने नोटों का क्या होगा

Fri, 11 May 2018 12:05 PM IST
बीबीसी, हिन्दी
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प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी तीसरी बार नेपाल जा रहे हैं। माना जा रहा है कि नेपाली नेताओं के साथ मोदी की बातचीत का एक विषय हो सकता है नवंबर 2016 की नोटबंदी की मार खाए नेपाली लोग। आज भी नेपाल के केंद्रीय बैंक में करीब आठ करोड़ रुपए के पुराने भारतीय नोट हैं। भारत में नोटबंदी के दिन तो आपको याद होंगे ही- एटीएम के सामने लंबी कतारें, सरकार को कोसते छोटे व्यापारी और रद्दी हो चुके 500 और 1000 के नोट को बदलने के लिए बैंकों के सामने भीड़। लेकिन नोटबंदी के कारण भारत के पड़ोसी देश नेपाल में भी लोग बेहद तकलीफ में रह चुके हैं।

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भारतीय रुपया पर भरोसा कम हुआ है

भारत में तो लोगों को 500 और 1000 रुपये के पुराने नोट बदलने का मौका मिला लेकिन नेपाल में भारतीय मुद्रा रखे लोगों को आज तक इस मौके का इंतजार है। 
नोटबंदी से पहले नेपाल में 500 और 1000 के भारतीय नोटों की अच्छी खासी संख्या थी। नोटबंदी से पहले लोग 25000 रुपये तक नेपाल ला सकते थे। 

इसके अलावा नेपाल के कुल व्यापार का 70 प्रतिशत भारत से है इसलिए लोग अपने पास भारतीय नोट रखते थे। नोटबंदी की घोषणा से 500 और 1000 रुपये के भारतीय नोट रखने वाले नेपाली लोगों को झटका लगा था। नेपाल के केंद्रीय बैंक 'नेपाल राष्ट्र बैंक' के एक अधिकारी के मुताबिक नोटबंदी के बाद लोगों का "भारतीय मुद्रा पर से विश्वास" कम हुआ है।

भारत का भरोसा, नेपाल का इंतजार

नेपाल राष्ट्र बैंक की तिजोरी में आज भी 500 और 1000 के करीब आठ करोड़ मूल्य के भारतीय नोट मौजूद हैं। आम लोगों के पास कितने नोट मौजूद हैं इस बारे में कोई आंकड़ा मौजूद नहीं है। प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने अप्रैल में भारत यात्रा से पहले कहा था कि वो भारतीय अधिकारियों से इस मुद्दे को सुलझाने को कहेंगे, लेकिन भारतीय विदेश सचिव विजय गोखले ने बताया कि किसी भी बैठक में इस मुद्दे को नहीं उठाया गया। 

इस पर नेपाल में प्रधानमंत्री ओली की आलोचना हुई। सफाई देते हुए प्रधानमंत्री ओली के एक नजदीकी अधिकारी ने कहा कि भारतीय अधिकारियों से इस मुद्दे पर अनौपचारिक बात हुई है और नेपाल को कार्रवाई का भरोसा दिलाया गया है लेकिन कार्रवाई के ब्योरे के बारे में कोई जानकारी नहीं है।

पानी में नोट बहा सकते नहीं हैं

बीबीसी से बातचीत में नेपाल में भारत के राजदूत मंजीव सिंह पुरी ने कहा कि दोनो देशों के बीच औपचारिक बातचीत जारी है। उन्होंने कहा, "नेपाल में लोगों को वही समय सीमा उपलब्ध थी जो भारत में आपको और मुझे थी। नेपाल में भी लोग उस समय सीमा का इस्तेमाल कर सकते थे। हमारी और नेपाल के बीच में औपचारिक बातचीत चल रही है। इस बारे में सरकारें अवगत हैं।" 

मिथिला उपाध्याय दिल्ली में थीं जब नोटबंदी की घोषणा हुई। उनके पति दीप कुमार उपाध्याय भारत में नेपाल के राजदूत थे। काठमांडू से 300 किलोमीटर दूर गौतम बुद्ध के जन्मस्थान लुंबिनी के नजदीक अपने दो मंजिला घर के एक छोटे से कमरे बैठी मिथिला बताती हैं, "जब ये घोषणा हुई तो हाहाकार मच गया। दिल्ली में हमें बहुत परेशानी हुई।" उनके पास आज भी 500 और 1000 के नोट में 10-15 हजार मूल्य की भारतीय मुद्रा है, और उन्हें उम्मीद है कि एक दिन भारत सरकार उसे बदलने की सुविधा मुहैया करवाएगी।

"फिर भी अगर कुछ नहीं हुआ तो हम लोगों को दिखाएंगे कि देखो, भारत में किसी जमाने में ऐसा पैसा चलता था। और क्या करें? पानी में नोट बहा सकते नहीं हैं और बाजार में चलेगा नहीं। हमारी बात रहने दीजिए, मोदी जी की मां भी पैसा भंजाने गईं थीं," ये कह वो खिलखिलाकर हंसने लगीं।

कितना मुश्किल रहा नोट का बदलना

मिथिला उपाध्याय के घर की अलग-अलग दीवारों पर दिल्ली में गुजरे दिनों की तस्वीरें लगी हुई थीं। उन्होंने बताया कि पास ही बहुत सारे लोग रहते हैं जो अभी भी पुराने नोट को बदलने की आस में बैठे हैं, लेकिन भारत से लगे नेपाल के इस इलाके में कच्ची सड़क की हालत ये है कि अगर सामने से आ रही कोई गाड़ी तेज रफ्तार से गुजर जाए तो कुछ क्षणों के लिए धूल का बादल सूरज की रोशनी को छिपा लेता है।

मिथिला के नजदीक बैठी तीन महिलाओं में से एक ने बताया कि उन्होंने तीर्थ पर 10 हजार रुपए के 500 और 1000 के नोट खर्च कर दिए, जबकि दूसरी महिला 7000 रुपए के नोट जबरदस्ती लखनऊ के डॉक्टर को थमा आईं। तीसरी महिला ने कहा, अब वो कोई भारतीय नोट नहीं लेतीं कि "कहीं फिर कोई परेशान न जाए।"

लोगों ने पुराने नोट से छुटकारा पाने के लिए घाटे में नोट बेचे, भारतीय रिश्तेदारों से मदद ली और भी कई तरीके अपनाए। भारतीय सीमा पर रह रहे लोगों के लिए शायद ये आसान रहा हो लेकिन दूर पहाड़ी इलाकों में रहने वालों के लिए ऐसा करना आसान नहीं था और उनके पास सरकारों पर भरोसा करने के अलावा कोई चारा नहीं था।

भारतीय मुद्रा लेकर घर आते थे

दिल्ली में जब पूर्व राजदूत दीप कुमार उपाध्याय के पास मदद के लिए फोन आते थे तो वो लोगों को विश्वास दिलाते थे कि नोट बदलने के लिए वक्त की घोषणा की जाएगी, लेकिन आज तक ऐसा नहीं हुआ। वो कहते थे, "लोग मुझसे कहते थे, देखिए हमने घरवालों से छिपाकर पैसे जमा किए थे। एक आदमी ने कहा कि उसने 60-65 हजार जमा किए थे और अब उन पैसों का क्या किया जाए।"

काठमांडू में दरबार स्क्वेयर के पास एक व्यक्ति ने मुझसे पूछा, "आप दूर पहाड़ों में रहने वाले उन रिटायर्ड गोरखा सैनिकों के परिवारों से पूछिए जिनका परिवार पेंशन पर निर्भर है और उन्होंने वो दिन कैसे गुजारे होंगे जब उन्हें पता चला होगा कि उनके पास रखे 500 और 1000 के नोट बेकार हो गए? पता नहीं भारत ने ऐसा क्यों किया?" नोटबंदी से वो महिलाएं सकते में थीं जो बुरे वक्त के लिए पैसे पति से छिपा कर रखती थीं, पहाड़ी इलाकों में रहने वाले वो परिवार सकते में थे जिनके लोग भारत में मेहनत मजदूरी करते थे और भारतीय मुद्रा लेकर घर आते थे।
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रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की शर्त

नोटबंदी से पेंशन धारकों, छोटे व्यापारियों, सभी को तेज झटका लगा, लेकिन उम्मीद भी थी कि दोनो सरकारें उनके साथ कुछ बुरा नहीं होने देंगी। नोटबंदी से पहले लोग 25 हजार मूल्य तक 500 और 1000 रुपये के नोट नेपाल ला सकते थे और उन्हें नेपाली नोट में परिवर्तित करवा सकते थे। लेकिन नोटबंदी की घोषणा पर नेपाल राष्ट्र बैंक के कई अधिकारी भी सकते में थे और उन्होंने तुरंत 500 और 1000 के नोट को नेपाली नोट में परिवर्तित करने पर रोक लगा दी और भारत की रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया से बातचीत शुरू कर दी।

500 और 1000 के भारतीय नोट वापस लेने पर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया और नेपाल राष्ट्र बैंक के बीच दो आधिकारिक बैठकें हुईं। नेपाल राष्ट्र बैंक के एक्जक्यूटिव डायरेक्टर भीष्म राज ढुंगाना के मुताबिक रिजर्व बैंक की ओर से प्रति व्यक्ति 4500 रुपए के नोट परिवर्तित करने की बात कही गई लेकिन वो इसे स्वीकार नहीं कर सकते थे क्योंकि उन्हें लोगों की नाराजगी का अंदेशा था।

नोट बदलने की बात

याद रहे पहले लोग 25,000 रुपए तक नेपाल ला सकते थे और अब उनसे सिर्फ 4500 के नोट बदलने की बात कहना आसान नहीं था। वो कहते हैं, "इन कारणों से हम (रिजर्व बैंक की) इस बात पर फैसला नहीं ले पाए। मामला आज तक लटका पड़ा है।" ढुंगाना कहते हैं, "भारतीय मुद्रा में लोगों का विश्वास कम हुआ है। भारतीय लोगों से हमारे अच्छे संबंध हैं लेकिन इस मुद्दे को क्यों नहीं सुलझाया गया? मुझे भूटान के एक मंत्री ने बताया कि भारत ने भूटान की आठ अरब की 500 और 1000 रुपए की भारतीय मुद्रा परिवर्तित कर दी फिर हमारे साथ ये भेदभाव क्यों किया गया?"

नेपाल ने अब 100 रुपए से बड़ी भारतीय मुद्रा का साथ रखना, उन्हें परिवर्तित करने पर प्रतिबंध लगा दिया है। ढुंगाना कहते हैं, "हम लोगों को ज्यादा ड्राफ्ट, क्रेडिट और डेबिट कार्ड इस्तेमाल करने को कह रहे हैं। लोगों को अभी भी उम्मीद है कि एक दिन भारत सरकार उन्हें अपने पैसे परिवर्तित करने देगी।"
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