साल 2011 में सत्ता में आने के बाद उत्तर कोरियाई शासक किम जोंग-उन बीते दिनों पहली बार चीन की यात्रा पर थे। उत्तर कोरिया के लिए चीन बेहद महत्वपूर्ण है। बाहरी दुनिया से जुड़े रहने के लिए उत्तर कोरिया बहुत हद तक चीन पर ही निर्भर है। किम जोंग-उन के चीनी दौरे से हटकर देखें तो इन दो देशों के बीच बहुत सी चीजों की अदला-बदली होती है और दोनों कई मायनों में एक-दूसरे के लिए अहम हैं।
ट्रेन
किम जोंग-उन ने बीजिंग जाने के लिए वही ट्रेन ली थी जो जिससे उनके पिता किम जोंग इल सफ़र कियी करते थे। साल 2001 में एक रूसी राजदूत ने इस ट्रेन से यात्रा की थी और उस यात्रा को संस्मरण का रूप दिया था। उसके अनुसार, हर रोज़ वहां ताज़े झींगे बनते थे, खाने के लिए चांदी के चॉपस्टिक्स थे और खूबसूरत लड़कियों की टोली आस-पास हुआ करती थी।
लेकिन इस आलिशान ट्रेन से इतर एक बेहद साधारण सी ट्रेन बीजिंग से प्योंगयोंग के बीच हफ़्ते में चार दिन चलती है। K27/K28 ट्रेन रूट चीन के तियानजिन और डानडोंग से गुजरते हुए सीनो-कोरियन ब्रिज ऑफ फ्रेंडशिप पहुंचता है।
उत्तर कोरिया में टूर और ट्रैवल का काम करने वाली एक कंपनी कोरयो टूर्स के जनरल मैनेजर सिमोन कोकेरेल का कहना है कि हर साल दसों हजारों लोग यहां घूमने आते हैं। बीजिंग से प्योंगयांग जाने वाली हर ट्रेन में लगभग 96 यात्री सफ़र करते हैं। इसके अलावा एक नियमित ट्रेन भी है जो डानडोंग से प्योंगयांग के लिए चलती है। इसमें 50 से 150 लोग सफ़र करते हैं।
लोग
पिछले दो दशकों में उत्तर कोरिया से चीन घूमने जाने वालों की संख्या में तेज़ी से बढ़ोत्तरी हुई है। चाइना नेशनल टूरिज्म एडमिनिस्ट्रेशन की एक रिपोर्ट के अनुसार, साल 2016 में 210,000 उत्तर कोरियाई लोग चीन घूमने आए।
हालांकि चीन घूमने जाने वाले लोगों में लैंगिक असमानता रही- उदाहरण के तौर पर साल 2015 में घूमने जाने वाले 84 फीसदी पुरुष थे। वैसे नॉर्थ कोरिया इन द वर्ल्ड वेबसाइट की मानें तो ज़रूरी नहीं कि ये आंकड़े सटीक ही हों। कई बार ऐसा होता है कि कुछ उत्तर कोरियाई लोग जल्दी-जल्दी और बेहद कम वक्त के लिए चीन आते हैं। ऐसे में उनकी गिनती एक से ज़्यादा बार हो जाती है।
सीएनटीए की खबर के मुताबिक, साल 2015 में चीन जाने वाले ज़्यादातर लोग काम के सिलसिले में वहां गए। जिनकी संख्या 94 हजार के करीब थी। हालांकि इस बात का कोई तय आंकड़ा मौजूद नहीं है जो ये बताए कि उत्तर कोरिया के कितने लोग दूसरे देशों में काम करते हैं। पर अनुमान है कि करीब 50 हजार से एक लाख उत्तर कोरियाई लोग दुनिया के दूसरे देशों में काम करते हैं।
पर इनमें से हाई प्रोफ़ाइल पदों पर महिलाएं है जो सिर्फ़ उत्तर कोरिया ही नहीं, चीन, रूस और दूसरे में भी काम करती हैं। जबकि ज़्यादातर लोग खानों, टेक्सटाइल और उत्पादन इंडस्ट्री में काम करते हैं।चीन में उत्तर कोरिया के कितने छात्र हैं, इसका भी कोई सटीक आंकड़ा नहीं है। लेकिन ऐसा माना जाता है कि ये लगभग हज़ार तक होंगे। वॉशिंगटन पोस्ट की एक पड़ताल में पाया गया कि साल 2015 में चीन में 1086 उत्तर कोरियाई पोस्टग्रेजुएट छात्र थे।
इसी तरह उत्तर कोरिया, घूमने जाने वाले चीनी लोगों की संख्या का सही आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। हालांकि सरकार का कहना था कि साल 2012 में करीब 234,000 चीनी पर्यटक उत्तर कोरिया घूमने गए। वैसे सरकार ने इन आंकड़ों को कभी जारी नहीं किया और यहां तक की वेबसाइट से भी 2013 के इन आंकड़ों को हटा दिया।