दक्षिण अफ्रीका में चल रहे एक स्कीम में कुंवारापन साबित करने पर लड़कियों को छात्रवृत्ति दी जाती है। मानवाधिकार संगठनों ने इसकी आलोचना की है। यह स्कीम क्वाज़ुलु-नटाल के एमसीशीनी गांव के एक स्कूल में शुरू की गई है।
इस बारे में अधिक जानकारी जुटाने के लिए बीबीसी संवाददाता नोमसा मासेको ने उस स्कूल का दौरा किया और छात्रों से बातचीत की। इस स्कॉलरशिप को पाने वाली 18 साल की थूबेलीहली ड्लोड्लो काफी खुश हैं।
ड्लोड्लो कहती हैं कि उन्हें ऐसा करना ही पड़ेगा क्योंकि उनके माता-पिता पढ़ाई का ख़र्च नहीं उठा सकते। लेकिन ड्लोड्लो का कहना है कि वो घर से निकलते हुए डरती हैं क्योंकि उनके लिए कुंवारापन बरकरार रखना ज़रूरी है।
उनके मुताबिक फंड का पैसा लगातार मिलते रहने के लिए उन्हें समय-समय पर कुंवारेपन की जांच करानी पड़ेगी। लेकिन हैरानी की बात है कि थूबेलीहली ड्लोड्लो को इससे ऐतराज़ नहीं है।