म्यांमार के संकटग्रस्त उत्तरी रखाइन राज्य की परिस्थितियां ऐसी नहीं हो सकी हैं कि अपनी जान बचाकर बांग्लादेश भागने वाले रोहिंग्याओं को वहां वापस भेजा जा सके। दरअसल म्यांमार ने कहा था कि वह रोहिंग्याओं की वापसी के लिए तैयार है। इसी पर संयुक्त राष्ट्र ने अपनी प्रतिक्रिया दी है।
स्वैच्छिक, सम्मानजनक और स्थायी वापसी की परिस्थितियां नहीं
म्यांमार के अपने छह दिन के दौरे के बाद संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार मामलों की सहायक महासचिव उर्सुला म्यूलर ने कहा कि फिलहाल परिस्थितियां ऐसी नहीं है कि स्वैच्छिक, सम्मानजनक और स्थायी वापसी हो सके। उन्होंने कहा, आवश्यकता है कि म्यांमार आंदोलन की स्वतंत्रता, सामाजिक सामंजस्य, आजीविका और सेवाओं तक पहुंच के महत्वपूर्ण मुद्दों को संबोधित करे। वहीं म्यांमार लगातार कह रहा है कि वह रोहिंग्याओं को वापस लेने के लिए तैयारी पूरी कर चुका है।
सामाजिक सामंजस्य, आजीविका और सेवाओं जैसे मुद्दों को संबोधित करे म्यांमार
रखाइन में पुनर्वास के लिए काम करने वाली सरकार समर्थित संस्था के मुख्य समन्वयक आंग टुन थेट ने कहा कि हम तैयार हैं। जो कर सकते थे, हमने वो किया है। यदि वे सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं तो हम कुछ नहीं कर सकते हैं।
बता दें कि बीते साल नवंबर में बांग्लादेश के साथ हुए करार में म्यांमार सरकार ने शरणार्थियों को सुरक्षित और सम्मानजनक तरीके से वापस लेने पर सहमति जताई थी। संयुक्त राष्ट्र के अनुमानों के मुताबिक दमनात्मक सैन्य कार्यवाही के चलते करीब सात लाख रोहिंग्या मुस्लिमों को बांग्लादेश में शरण लेनी पड़ी है।