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लोग मदद के लिए पुकार रहे थे, लेकिन...

Tue, 20 Aug 2013 06:21 PM IST
नितिन श्रीवास्तव बीबीसी संवाददाता, धमारा, बिहार
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बिहार के खगड़िया जिले के धमारा घाट रेलवे स्टेशन पर अब भी लोगों के कपड़े और अन्य सामान बिखरे पड़े हैं।
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उनका बिखरा सामान देखकर अंदाज़ा लगाना मुश्किल नहीं कि जब लोग राज्यरानी एक्सप्रेस के चपेट में आए होंगे, तो उनकी क्या हालत हुई होगी।

बीबीसी से बातचीत में अधिकारियों ने घटना में अभी तक 28 लोगों के मारे जाने की बात कही है।

हादसा उस समय हुआ जब तीर्थयात्री रेलवे लाइन को पार कर रहे थे। इसमे नौ लोग घायल भी हुए हैं।

एक प्रत्यक्षदर्शी टुनटुन राम ने बीबीसी को बताया, "जब मैं स्टेशन पर पहुंचा तो चारों तरफ लोगों के शव बिखरे हुए थे। लोग मदद के लिए पुकार रहे थे। लेकिन घटना स्थल पर स्वास्थ्य सुविधा नाम की कोई चीज़ नहीं थी। केवल पांच घंटे बाद ही लोगों को मदद मुहैया करवाई जा सकी।"
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आसपास खड़े लोगों के मुताबिक दुर्घटना उस वक्त हुई जब धमारा घाट रेलवे स्टेशन के पास स्थित मंदिर जाने के लिए तीर्थयात्री लोकल पैसेंजर से नज़दीक ही उतरे।

उनके ट्रेन से उतरने के बाद स्टेशन पर श्रद्धालुओं की भीड़ इकट्ठा हो गई। दरअसल ये भीड़ रेल की पटरी पार करके दूसरी ओर स्थित शिव मंदिर जा रही थी।

तभी पीछे से तेज़ रफ़्तार में आती राज्य रानी एक्सप्रेस ने तीर्थयात्रियों को अपने चपेट में ले लिया।

गुस्सा

जब प्रत्यक्षदर्शी टुनटुन राम स्टेशन पहुंचें तो चारों तरफ लोगों के शरीर बिखरे हुए थे।

स्टेशन पर अभी भी बड़ी संख्या में बर्तन, कपड़ें, पूजा की सामग्री और लोगों के जूते-चप्पल देखे जा सकते हैं।

आसपास के गांव वालों में हादसे को लेकर काफी गुस्सा है। उनका कहना है कि सावन के हर सोमवार को यहां हज़ारों की तादात में तीर्थयात्री आते हैं लेकिन रेलवे प्रशासन ने इतने महत्वपूर्ण स्टेशन पर किसी संभावित दुर्घटना को टालने के लिए आने वाली ट्रेनों की रफ़्तार कम करने के कोई उपाय क्यों नहीं किए?
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मंगलवार को धमारा स्टेशन पर खड़ी जली हुई राज्य रानी एक्सप्रेस को हमारे सामने ही पटना ले जाया गया।

-नितिन श्रीवास्तव बीबीसी संवाददाता, धमारा, बिहार
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