अब खालिद इस कैंप में बायोलॉजी के अध्यापक हो गए हैं। इस कैंप में वो लोग रहते हैं जिन्होंने देश के अंदर ही अपने परिवारवालों को खो दिया है। खालिद को यहीं अहसास हुआ कि शायद इस रास्ते से वह अपने परिवार को वापस पा सकते हैं। इसके बाद उन्होंने स्मगलरों से मेलजोल बढ़ाना शुरू किया। अगले कुछ सालों में खालिद ने कई अजीबो-गरीब लोगों से मेलजोल बढ़ाया और आर्थिक संकटों का सामना किया। लेकिन बीते साल जब इस्लामिक स्टेट का किला ढहा तब तक वह नब्बे हजार डॉलर देकर अपने परिवार के 10 लोगों को रिहा करा चुके थे। इस्लामिक स्टेट की कैद से आजाद होने वाली शायमा आखिरी पारिवारिक सदस्य थीं। खालिद बताते हैं कि उन्होंने चरमपंथियों से सीधे बातचीत करने की जगह दूसरे तत्वों की मदद से अपने परिवार को छुड़ाया।
ऐसे में उन्होंने ऐसे कई लोगों से संपर्क साधा जो
सीरिया और इराक में काम कर रहे थे और अपनी सेवाओं के लिए पैसे लेते थे। इस्लामिक स्टेट उनके कब्जे वाले क्षेत्रों से गुलामों को आजाद कराने वाले स्मगलरों की हत्या करा देते थे। खालिद को शायमा को छुड़ाने में तीन महीनों से ज्यादा का समय लगा। एक यजीदी समाजसेवी के मुताबिक साल 2014 में कैद किए गए 6500 यजीदियों में से 3150 यजीदी अभी भी लापता हैं। वह मानते हैं कि आईएस अभी भी यजीदियों को इंटरनेट पर बेच रहे हैं। अभी भी ऐसे किसी आंकड़े की पुष्टि नहीं हुई है कि आईएस की कैद में कितने लोग मारे गए हैं। सिंजर में सामुहिक कब्रें पाई गई हैं। खालिद जीवविज्ञानी होने के नाते यजीदियों को अपनी सोच को एक तरफ रखते हुए शवों के डीएनए मिलान के लिए अपने सैंपल देने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
आईएस की कैद से आजाद होने वाले दूसरे यजीदियों ने भी खालिद से मिलते-जुलते रास्ते पर ही चलकर अपने परिवार को वापिस हासिल किया है। दो एजेंटों की मदद से शायमा को वॉट्सऐप मेसेज भेजे गए जिसमें उसके परिवार के सदस्यों की तस्वीरें भी शामिल थीं। ऐसा इसलिए किया गया ताकि उसे आश्वासन मिल सके कि जल्द ही उसे भी सुरक्षित ढंग से आजाद कराया जा सकेगा। इसके बाद खालिद ने इस डील के लिए 16,000 डॉलर जुटाए और इंतजार किया। इसके बाद खामोशी छा गई। तीन दिन तक उसे कोई जानकारी नहीं मिली। वह कहते हैं, "हमें पता चला कि हमारे मध्यस्थों की आईएस के साथ मुठभेड़ हो गई है जिसके बाद उन्हें जेल में डालकर प्रताड़ित किया गया।" इसके बाद मध्यस्थों के एक दूसरे समूह ने बचाव अभियान का काम अपने हाथों में लिया। खालिद बताते हैं, "इराकी मध्यस्थ ने दोहुक जाकर पैसा निकालने के लिए कहा। एक हफ्ते बाद उसी व्यक्ति ने बताया कि बचाव अभियान सात दिन बाद चलाया जाएगा। मैं एक हफ्ते तक सो नहीं सका।"
अपने परिवार को छुड़ाने के लिए जरूरी धनराशि जुटाना खालिद के लिए सबसे कठिन काम था। उदाहरण के लिए, उन्हें अपनी साली, बहन लैला और उसके बच्चों को छुड़ाने के लिए 38,500 डॉलर खर्च करने पड़े। इसके बाद अपने बेटे की पत्नी को छुड़ाने के लिए 29,000 डॉलर चुकाने पड़े। खालिद के पास कहां से आएइतने पैसे? खालिद कहते हैं, "मेरे पास बिलकुल पैसे नहीं थे, मैंने अपने दोस्तों से पैसे उधार लिए। कुछ लोगों ने 50 डॉलर दिए तो कुछ लोगों ने 100 डॉलर। पार्लियामेंट में एक दोस्त डिप्टी पद पर कार्यरत हैं जिन्होंने मुझे 3,000 डॉलर दिए। मेरी साली के भाई ने जर्मनी से भी पैसे भेजे। इसी तरह मैंने पैसे जुटाए।"
इस तरह खालिद ने 90,000 डॉलर देकर अपने परिवार के 10 सदस्यों को छुड़ाया है जो सभी महिलाएं और लड़कियां हैं। बस उनकी बहन लैला का छोटा बेटा अब तक वापस नहीं आ सका है। हालांकि, खालिद ने मध्यस्थों को धन देकर (जो कि आखिरकार आईएस को पैसे दे देते थे) चरमपंथ की सहायता करने का आरोप झेलने का जोखिम उठाया है। लेकिन अपने परिवार को वापस लाने के लिए उनके पास दूसरा विकल्प नहीं था। स्थानीय प्रशासन को पता था कि वह और दूसरे यजीदी परिवार क्या कर रहे थे। अगर उन्हें सीरिया के रास्ते पैसा ट्रांसफर कराना होता तो सुरक्षा बलों से इजाजत लेनी होती थी।
उत्तरी इराक में इसी प्रयोजन के लिए बनाए गए एक ऑफिस से खालिद को कुछ पैसा वापस भी मिला। आईएस की हार के बाद परिवार के अन्य सदस्यों की तलाश और भी मुश्किल हो गई है। ये खालिद के भाई दाखील, उनके चार बेटे, इन बेटों की एक पत्नी और उसके दो बच्चे और लैला के पति हैं। इस बात की आशंका है कि ये लोग आईएस द्वारा मारे जा चुके हैं या हवाई हमलों का शिकार हुए हैं। लेकिन खालिद सोचते हैं कि कुछ लोग आईएस के चरमपंथियों के साथ कैंपों या जेलों में हो सकते हैं। खालिद कहते हैं कि कुछ भी निश्चित रूप से कहना नामुमकिन है। वह बताते हैं, "ये संभावनाएं हैं लेकिन कुछ भी 100 फीसदी पक्का नहीं है। अगर वे मर भी चुके हैं तो हमें
डीएनए टेस्ट से इसकी पुष्टि करनी चाहिए। जब एक गुलाम बनाया गया व्यक्ति मरता है तो हम इसके बारे में कुछ भी नहीं जानते और ये जानना बेहद मुश्किल है। मैं उन्हें देखना चाहता हूं, चाहें वे मर ही क्यों न गए हों। मैं इसकी पुष्टि करना चाहता हूं।"