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इन आठ तरीक़ों से चीन बदलेगा आपका जीवन

Mon, 15 Oct 2012 09:44 PM IST
बीबीसी हिंदी
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बेशक यह चीन का घरेलू राजनीतिक फैसला है लेकिन आठ ऐसी बातें हैं जिसके कारण वहाँ की सत्ता के गलियारों में होने वाले फैसले पर बाकी दुनिया की भी निगाह रहेगी।
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'धनी होना है आनंददायक होना'
35 साल पहले पूर्व नेता डेंग जिओंपिंग ने यह नारा दिया था।

आज चीन में दस लाख ऐसे नागरिक हैं जो कि डॉलरों में लखपति हैं। इस साल अगली पीढ़ी के नेताओं के हाथ में सत्ता आने के बाद शायद चीन विश्व अर्थव्यवस्था के शीर्ष पर बैठे अमरीका को चुनौती देगा।

नए नेताओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती पहले की तरह आर्थिक वृद्धि को बनाए रखने की होगी। चीन में सस्ते मजदूरों के कारण यूरोप लगभग हर चीज के लिए इस देश पर निर्भर है। चीन अब अफ्रीका में सबसे बड़ा निवेशक है।
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चीन के संपन्न होने की स्थिति में दुनिया का सबसे धनी मध्य वर्ग तैयार होगा।

हर जश्न का अंत जरूरी
चीन की आर्थिक प्रगति बहुत तेजी के हुई। इसमें इस देश ने जमकर पर्यावरण की अनदेखी की। इसके नतीजे डरा देने वाले हैं।

औद्योगिकीकरण और जबरदस्त भवन निर्माण के कारण वर्ष 2007 में चीन अमरीका को पीछे छोड़कर ग्रीन हाउस गैस पैदा करने वाला शीर्ष देश बन गया। विश्व के सबसे प्रदूषित शहरों में से सात चीन के हैं। हर साल पाँच से साढे़ सात लाख लोग समय से पहले मरते हैं। विश्व पर्यावरण के लिए यह एक बड़ा खतरा साबित हो रहा है।

चीन के नेता इस समस्या से निपटने को लेकर दृढ़ दिखाई दे रहे हैं लेकिन यह उनके लिए आसान काम नहीं होगा।

चीनी भाषा का विस्तार
30 साल पहले तक पश्चिमी देशों में सिर्फ चीन के राजनेता ही पहचाने जाते थे। लेकिन आज झांग जेई जैसी अदाकारा, बास्केटबाल प्लेयर जाओं मिंग और कलाकार झांग जिओबांग इन देशों में बड़ा नाम है।

चीन की बोली मैंडेरियन आज यूरोप और अमरीका में पहुंच चुकी है। इन देशों में स्कूल चीनी भाषा सिखा रहे हैं। अपनी भाषा के फैलाव से चीन बात को पहले से अधिक मजबूती से अमरीका और बाकी दुनिया के सामने रख पा रहा है।

चीनी सरकार ने यूरोप के कई देशों में यह भाषा सिखाने के लिए केंद्र खोले हैं।

दुनिया भर, खासकर एशिया में चीनी भाषा बोलने वालों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है। लेकिन ऐसा लगता नहीं कि यह इंग्लिश को पीछे छोड़ सकेगी।

शांति
चीन ने अपनी तरक्की के लिए “शांतिपूर्वक उत्थान” शब्द का इस्तेमाल किया। उसने हमेशा ही अपने डरे हुए पड़ोसियों को बताने की कोशिक की है कि वह अपनी आर्थिक ताकत का इस्तेमाल उन्हें डराने में नहीं करेगा।

लेकिन इसके बावजूद जापान, फिलिपिन और विएतनाम जैसे पड़ोसियों और अमरीका के साथ विवाद के कारण चीन के शांतिपूर्वक उत्थान के नारे को खोखला साबित करता है।

इसके अलावा विश्व की सबसे बड़ी सेना वाला देश चीन अपनी रक्षा और सैन्य आधुनिकीकरण पर अरबों डॉलर का निवेश कर रहा है।

यकीनन अमरीका की तरह बाकी देशों पर उसका प्रभाव और बढ़ा है।

चांद पर कदम
चांद पर अपने नागरिक को भेज कर चीन आज पश्चिम देशों खासकर अमरीका की बराबरी पर खड़ा है।

चीन में आज भी कई लोग 55 रुपये प्रतिदिन कमाते हैं लेकिन उसने चांद पर पहुंचने की बराबरी के लिए 15 करोड़ डॉलर खर्च किए हैं।

अगर यह कार्यक्रम और आगे बढ़ा तो जाहिर है कि यह सीधे तौर पर अमरीका की इस क्षेत्र में अमरीका की ताकत को चुनौती होगा। यह विश्व के लिए बिलकुल नई स्थिति है।
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दुर्लभ जीव जंतु का भोज
चीन के अमीर बने लोग अपने शौक और मुंह के स्वाद को पूरा करने के लिए दुर्लभ जीव जंतु का शिकार जिस्म को सजाने और सूप के लिए कर रहे हैं।

दांत के लिए हजारों अफ्रीकी हाथियों को शिकार हो रहा है।

सूअर के माँस का सेवन हर दिन बढ़ रहा है। चीन में इस समय 46 करोड़ सूअर हैं।

बढ़ती मांग का असर यह है कि विश्व के अन्य देशों के दुर्लभ जतुंओं की हत्या चीन की जरुरतों के लिए हो रही है।

वीजा प्रक्रिया में सुधार
1995 तक चीन से बाहर जाने के लिए छह महीने लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था।

लेकिन अब ऐसा नहीं है। 2011 में सात करोड़ चीनियों ने विदेश का दौरा किया।

जर्मनी और अमरीकी के बाद पर्यटन पर चीनी सबसे ज्यादा खर्च कर रहे हैं।

हर साल 3 लाख चीनी छात्र अमरीका और आस्ट्रेलिया जा रहे हैं।

इससे सीधे तौर पर चीन की पहुंच पहले की तुलना अमरीका सहित दुनिया के बाकी देशों में बढ़ी है।

दुनिया खरीदने की होड़
चीन ने जितना पैसा कमाया है उसका असर पूरी दुनिया पर पड़ा है। लगातार विकास होने के कारण तांबे जैसे जरुरतों की मांग और कीमत बढ़ी है।

इसके अलावा चीन में अब वाइन की बिक्री जर्मनी से भी अधिक हो रही है।

2011 में दुनिया में सबसे मंहगीं बिकने वाली पैंटिंग्स में से तीन चीन के कलाकारों की थी।

जाहिर है कि अगला मुकाम चीन के उद्योगपतियों का विश्व के दूसरे देशों में जाकर अपनी साख कायम करने को होगा।
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