रूस की एंटी-शिप मिसाइल (फाइल फोटो)
रूस अपनी डिफेंस टेक्नोलॉजी की वजह से दुनियाभर में जाना जाता है और अब वह एक हाइपरसोनिक मिसाइल के परीक्षण की तैयारी कर रहा है, जिसका सामना करना किसी भी देश के लिए संभव नहीं है। जिरकॉन रॉकेट की गति, ध्वनि की गति से भी 6 गुना तेज है। रूस का ये जिरकॉन रॉकेट दुनिया के किसी भी मिसाइल सिस्टम को भेदने में सक्षम है।
रूसी मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार इस मिसाइल को 7,400 किलोमिटर प्रति घंटे की स्पीड के साथ छोड़ा जा सकता है। अगर नई एंटी-शिप टेक्नोलॉजी सफल होती है तो ये मिसाइल महज 2.5 मिनट के समय में लगभग 250 किलोमीटर का सफर तय कर सकता है।
युद्ध के समय ये मिसाइल भयंकर तबाही मचा सकती है क्योंकि एक बार इस मिसाइल को छोड़ने के बाद इसे रोकना नामुमकिन है। ये मिसाइल 400 किलोमीटर की दूरी तक छिपे अपने दुश्मन को मार गिराने में सक्षम है। दुनिया के सबसे शक्तिशाली डिफेंस फोर्स वाले देश जैसे अमेरिका और ब्रिटेन भी रूस की इस मिसाइल से डरे हुए हैं। अमेरिकी नौसेना को ये डर है कि रूस इस मिसाइल को अपने न्यूक्लियर किरकोव वारशिप में फिट कर सकता है।
रूस की न्यूज एजेंसी के अनुसार जिरकॉन का परीक्षण इस साल के अंत तक होगा। इसके साथ अगले साल यानी 2018 से इसका उत्पादन भी शुरू हो जाएगा। रूस की सरकार इसे 2022 तक अपनी सेना में शामिल करने की योजना बना रही है।
भले ही रूस ने हाइपरसोनिक मिसाइल में बढ़त हासिल कर ली हो, लेकिन भारत भी इससे ज्यादा पीछे नहीं है। भारत ने भी रूस के साथ मिलकर सेकेंड जनरेशन का ब्रह्मोस मिसाइल बना लिया है। ब्रह्मोस मिसाइल को भी इसी स्क्रेमजेट टेक्नोलॉजी से बनाया गया है जिससे जिरकॉन मिसाइल को बनाया गया है।