मिस्र के पिरामिड और ममी में हमेशा से दुनिया भर की दिलचस्पी रही है। ममी को लेकर पश्चिमी देशों में तमाम किस्से-कहानियां चलन में हैं। इन पर कई फिल्में भी बनी हैं। ममी के बारे में और जानने के मकसद से कई तरह की रिसर्च और खोजबीन चलती रहती है।
हाल ही में प्राचीन मिस्र के राजा तूतेनखामेन को लेकर एक नई खोज की गई है। जिसके बाद मिस्र के अधिकारियों ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। अधिकारियों के मुताबिक तूतेनखामेन के मकबरे में कोई गुप्त कमरा नहीं है।
गुप्त कमरे में तूतेनखामेन की मां की कब्र
इससे पहले मिस्र के अधिकारी ये दावा करते रहे थे कि इस युवा राजा के 3,000 साल पुराने मकबरे की दीवार के पीछे एक गुप्त कमरा है।एक थ्योरी में कहा गया था कि तूतेनखामेन के मकबरे में एक गुप्त चेंबर है जिसमें रानी नेफरतीती का मकबरा हो सकता है। कई लोगों का मानना है कि रानी नेफरतीती तूतेनखामेन की मां थी। इस छिपे हुए मकबरे को खोजने का काम तब शुरू हुआ था, जब ब्रिटिश पुरातत्वविद निकोलस रीवेस को प्लास्टर के नीचे दरवाज़ा होने के कुछ सबूत मिले थे।
रानी की 3,000 साल पुरानी मूर्ति
2015 में छपे निकोलस रीवेस के रिसर्च पेपर 'द बुरियल ऑफ़ नेफरतीती' के मुताबिक़ रानी नेफरतीती के लिए भी एक छोटा मकबरा बनाया गया था और उनके अवशेष भी इसी मकबरे के अंदर हो सकते हैं।
नेफरतीती के अवशेष कभी मिल नहीं सके, लेकिन उनके बारे में जानने की कोशिश हमेशा होती रही। रानी नेफरतीती की एक तीन हज़ार साल पुरानी मूर्ति आज भी मौजूद है, जो कि प्राचीन मिस्र में उनकी पहचान को और भी पुख्ता करती है।ये भी माना जाता है कि रानी के पति फ़राओ अखानातन की मौत और उनके बेटे के गद्दी पर बैठाने के बीच का जो वक्त था उस दौरान रानी ने मिस्र पर शासन किया था।
तूतेनखामेन का मकबरा
कहा जाता है कि उन्होंने अपने पति के साथ ईसा पूर्व 1353 से लेकर ईसा पूर्व 1336 तक शासन किया था। महारानी नेफरतीती और फ़राओ अखानातेन का नाम मिस्र के प्राचीन इतिहास से इस कारण मिटा दिया गया था क्योंकि अखानातन ने अनेक मिस्री देवताओं की पूजा के स्थान पर केवल एक देवता यानी सूर्य देवता की पूजा शुरू कराई थी।
पुरातत्वविद निकोलस के सनसनीखेज पेपर सामने आने के बाद कई और भी बाते सामने आईं जिससे गुप्त कमरा होने के दावे को बल मिला। मिस्र के अधिकारियों ने भी कह दिया था कि उन्हें नब्बे फ़ीसदी तक यकीन है कि तूतेनखामेन के मकबरे में एक और गुप्त चेंबर है।
मकबरे की रिसर्च टीम के हेड डॉक्टर फ्रांसेस्को पोरसेली ने कहा, "ये बात कुछ हद तक थोड़ा निराश करने वाली है कि तूतेनखामेन के मकबरे के पीछे कुछ नहीं मिला, लेकिन दूसरी तरफ मुझे ये भी लगता है कि ये एक अच्छा विज्ञान है।"