एक रेटिंग एजेंसी के मुताबिक अरब देशों की पाबंदी के बाद अपनी अर्थव्यवस्था को सुचारू रूप से चलाए रखने के लिए कतर ने 38 अरब डॉलर ( करीब 2432 अरब रूपये) खर्च किए हैं। रेटिंग एजेंसी मूडी के मुताबिक जून में सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, मिस्र और बहरीन की ओर से पाबंदी लगाए जाने के बाद कतर का कारोबार, पर्यटन और बैंकिंग सेक्टर बुरी तरह प्रभावित हुआ था।
पढ़ें: मतभेद खत्म करने के लिए कतर और सऊदी बातचीत को तैयार
एजेंसी के अनुमान के मुताबिक कतर की सरकार को 30 अरब डॉलर बैंकिंग सेक्टर में निवेश करना पड़ा है। कतर के पड़ोसी देशों ने आतंकवाद की मदद करने का आरोप लगाते हुए पाबंदी लगा दी है। हालांकि कतर ने किसी भी चरमपंथी समूह की मदद से इनकार करते हुए इसे राजनीति से प्रेरित बताया है।
इन देशों की पाबंदी के चलते कतर की इकलौती जमीनी सीमा भी बंद हो गई, कतर के झंडे वाले कई समुद्री जहाजों के बंदरगाह में प्रवेश पर रोक लग गई, यहां तक कि कई देशों के आसमान से कतर के हवाई जहाजों के गुजरने पर भी रोक लगा दी गई।
पढ़ें: क्या बदहाली की तरफ बढ़ता जा रहा है कतर?
कतर की सरकार ने कहा है कि उसके पास पाबंदी को झेलने के लिए संसाधनों की कमी नहीं है। लेकिन उस पर दबाव बढ़ता जा रहा है। इस सप्ताह कतर का स्टॉक मार्केट का सूचकांक बीते 52 सप्ताह में सबसे न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया है। पाबंदी के बाद के सौ दिनों में कतर के स्टॉक मार्केट को 15 फीसदी रकम का नुकसान उठाना पड़ा है।
रेटिंग एजेंसी मूडी के मुताबिक कतर ने पाबंदी के बाद पहले दो महीने के दौरान 48.5 अरब डॉलर की रकम अर्थव्यवस्था में झोंकी है जो देश के कुल सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 23 फीसदी है।