क्रिसमस की तैयारियों में जुटे ऑस्ट्रेलिया के लिए सोमवार का दिन किसी भयानक सपने जैसा रहा। सिडनी के मशहूर कैफे ‘लिंट चॉकलेट’ में एक सिरफिरे आतंकी ने दो भारतीयों (विश्वकांत अंकित रेड्डी व पुष्पेंदु घोष) समेत करीब 20 लोगों को बंदूक की नोक पर 17 घंटे तक बंधक बनाए रखा। हालांकि सुरक्षा बलों ने ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम देते हुए आतंकी हारून मोनिस को मार गिराया और बंधकों को छुड़ा लिया। इस दौरान मुठभेड़ में दो बंधकों की भी जान चली गई, जिनमें 38 वर्षीय एक महिला और 34 वर्षीय पुरुष शामिल है। कम से कम चार लोग घायल भी हुए हैं। ऑस्ट्रेलिया में संभवत: यह पहला मौका है, जब उसे आतंक की इस तरह की घटना से रूबरू होना पड़ा है।
बंदूकधारी ईरानी मूल का हारून मोनिस था, जो खुद को मौलवी बताता था। उसने ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री टोनी एबट से बात करने के अलावा आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) का झंडा उपलब्ध कराने की मांग की थी। इससे पहले सोमवार सुबह ऑस्ट्रेलिया समेत पूरी दुनिया में उस समय सनसनी फैल गई, जब सिडनी के केंद्र में स्थित मार्टिन प्लेस बिल्डिंग में ‘लिंट चॉकलेट’कैफे में एक बंदूकधारी घुस गया और वहां मौजूद लोगों को बंधक बना लिया। इस क्षेत्र को संसदीय, कानूनी और खुदरा इलाके के संगम के रूप में जाना जाता है।
टीवी चैनलों पर कैफे के भीतर की फुटेज दिखाए जाने के बाद पुलिस और आतंकियों से निपटने में विशेषज्ञ सुरक्षा बलों ने इलाके को पूरी तरह से घेर लिया और भारतीय वाणिज्य दूतावास समेत आसपास के कार्यालयों को खाली करा लिया। टीवी फुटेज में साफ दिख रहा था कि कैफे की खिड़की पर काला झंडा लगा है और लोग खिड़की पर हाथ रखे खड़े हैं। इस झंडे पर अरबी में लिखा हुआ था, ‘अल्लाह एक है, मोहम्मद उसके पैगंबर हैं’। हालांकि यह आतंकी संगठन आईएस का झंडा नहीं था बल्कि मस्जिदों में नमाज के दौरान रोजाना इस्तेमाल होने वाला झंडा था।
करीब पांच घंटे के बाद पहले दो और फिर तीन लोग किसी तरह से बच कर बाहर निकलने में कामयाब हो गए। देर रात 2 बजे (रात नौ बजे, भारतीय समयानुसार) कुछ लोगों के कैफे से बाहर भागने के तुरंत बाद अत्याधुनिक हथियारों से लैस सुरक्षा बलों ने कैफे में घुसने की कार्रवाई शुरू की। सुरक्षा बलों ने ताबड़तोड़ गोलियां बरसाते हुए कैफे के प्रवेश द्वार को ग्रेनेड से उड़ा दिया और अंदर घुसकर कार्रवाई को अंजाम दिया।