अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में शनिवार को हुए आत्मघाती हमले में कम से कम 80 लोगों की मौत हुई है। ये धमाके उस जगह पर हुए हैं जहां हजारा समुदाय के हजारों लोग प्रदर्शन कर रहे थे। इस्लामिक स्टेट (आईएस) ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है।
आईएस की मौजूदा स्थिति और अफगान सरकार की कार्रवाई पर नजर डालें तो अफगानिस्तान में सक्रिय हुए उसे एक साल हो चुका है। वो अफगानिस्तान के प्रांत नंगरहार के तीन-चार जिलों में सक्रिय हैं। तीन महीने से अफगानिस्तान की सरकार ने नंगरहार में सुन्नी चरमपंथी संगठन आईएस के खिलाफ तोबडतोड हमले शुरू किए हैं।
आए दिन सेना दस-पंद्रह आईएस चरमपंथियों को मार रही है और आईएस ने भी सरकार के खिलाफ जंग की घोषणा की हुई है। ताजा हमला इस्लामिक स्टेट ने इसलिए किया है क्योंकि वह शिया समुदाय के खिलाफ है। इसीलिए शिया समुदाय की भीड को निशाना बनाया गया है।
तालिबान अफगानिस्तान में 20 से ज्यादा सूबों में सक्रिय
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तालिबान ने इस हमले की निंदा की है लेकिन अब भी अफगानिस्तान की सरकार के लिए तालिबान से निपटना ही बडी चुनौती है। तालिबान अफगानिस्तान में 20 से ज्यादा सूबों में सक्रिय है और आईएस अभी एक या दो सूबों में ही है। अफगान सरकार का मानना है कि आईएस उतना बडा खतरा नहीं है।
वो मानते हैं कि आईएस को खत्म किया जा सकता है, इसीलिए उसके खिलाफ इतना बडा ऑपरेशन शुरू किया गया है। लेकिन आईएस ने एक-दो सूबों में रहते हुए भी सरकार के खिलाफ जंग छेड रखी है। वो आम लोगों को भी निशाना बनाते हैं और जाहिर तौर पर सरकार और आम लोगों के लिए एक बडा खतरा हैं।
इस साल गर्मियों में तालिबान पांच-छह सूबों पर कब्जा कर सकता है!
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आम लोग सुरक्षा बलों के साथ मिलकर आईएस का मुकाबला कर रहे हैं। इस तरह के हमलों से लोगों के मनोबल पर असर पडा है लेकिन उतनी मायूसी नहीं है जितनी तालिबान को लेकर है। तालिबान के बारे में तो कहा जा रहा था कि इस साल गर्मियों में तालिबान पांच-छह सूबों पर कब्जा कर सकता है और हालात खासे खराब हो सकते हैं। हालाँकि तालिबान किसी भी सूबे पर कब्जा नहीं कर पाया है और हालात उतने खराब नहीं हुए हैं।