सीरिया में एक किशोर की सरेआम गोलियां मारकर हत्या कर दी गई क्योंकि उस पर ईशनिंदा का आरोप था।
विद्राहियों के कब्ज़े वाले अलेप्पो में इस घटना की किसी भी समूह ने ज़िम्मेदारी नहीं ली है।
लेकिन इस घटना ने विद्रोहियों के कब्ज़े वाले क्षेत्रों में इस्लामी शरिया क़ानून के बढ़ते प्रभाव को दिखाया है।
हालांकि शार की मुख्य शरिया अदालत ने हत्या को इस्लाम विरोधी बताते हुए इसकी निंदा की है।
तीन गोलियां मारीं
विद्रोहियों और सरकारी बलों के बीच जारी संघर्ष के चलते स्कूल बंद हैं इसलिए 14 वर्षीय मोहम्मद क़ता अपने परिवार के साथ कॉफ़ी बेचने का काम करता था।
पिछले महीने एक आदमी ने उससे मुफ़्त में कॉफ़ी मांगी। इस पर क़ता ने हंसते हुए जवाब दिया, “अगर पैग़म्बर खुद भी आ जाएं तो भी मुफ़्त नहीं दूंगा।”
उसकी इस बात को वहां से गुज़रते तीन हथियारबंद लोगों ने सुन लिया। उन्होंने उसे खींचकर एक कार में डाला और ले गए।
आधे घंटे बाद वो बुरी तरह पीटे गए क़ता को लेकर वापस लौटे और सड़क पर उसकी रेहड़ी के पास पटक दिया।
फिर उन्होंने आवाज़ लगाई, “ओ शार के लोगो, ओ अलेप्पो के लोगो।”
“जो भी पैग़म्बर का अपमान करेगा, शरिया के मुताबिक मार दिया जाएगा।”
क़ता की मां यह आवाज़ें सुनकर नंगे पैर ही दौड़ीं लेकिन रास्ते में ही उनको एक गोली चलने की आवाज़ सुनाई दी।
वह कहती हैं, “वहां पहुंचते ही मैं गिर गई। उनमें से एक ने उसे एक गोली और मारी फिर लात मारी। फिर एक गोली और।”
क़ता की मां चिल्लाई, “तुम उसे क्यों मार रहे हो, वह एक बच्चा ही तो है।” इस पर एक आदमी चिल्लाया, “वह मुसलमान नहीं है, भागो यहां से।”
क़ता के शव की तस्वीरें अरबी फ़ेसबुक और ट्विटर पर फैल गईं। उसे चेहरे पर गोली मारी गई थी। जहां नाक और मुंह होने चाहिए थे वहां एक छेद दिख रहा था। इसका बहुत विरोध भी हुआ।
'आज़ादी छिनी'
कहा जा रहा है कि हत्यारे अल क़ायदा से जुड़े एक मुख्य समूह के थे। शक की सुई उभरते हुए सबसे बड़े इस्लामी संगठन नुसरा फ्रंट की ओर भी है।
लेकिन अलेप्पो के सभी विद्रोही गुटों और शहर की मुख्य शरिया अदालत की तरह इन दोनों ने भी इस हत्या की निंदा की।
शरिया कोर्ट में एक जज 26 वर्षीय इस्लामी विद्वान ने बीबीसी को कहा कि हत्यारे सरकारी लड़ाके, “साबिहा” के थे जो जिहादियों और अन्य लड़ाकों के बीच मतभेद भड़काना चाहते थे।
लेकिन क्या सरकारी लड़ाके विद्रोहियों के कब्जे वाले अलेप्पो में एक लड़के का अपहरण करके आधे घंटे बाद उसे सड़क पर मारने की हिम्मत कर सकते हैं?
परिवार सदमे और दहशत में है और उसे यह समझ नहीं आ रहा कि इसके लिए किस गुट को दोष दे लेकिन वो मानते हैं कि क्लिक करें विद्रोहियों का शासन ही अंततः इसके लिए ज़िम्मेदार है।
क़ता के बड़े भाई फौआद कहते हैं, “हमारी आज़ादी बाकी नहीं रह गई है। जब अलेप्पो में शुरू-शुरू में विद्रोहियों का कब्ज़ा हुआ था तब यह थी लेकिन अब नहीं रह गई है।”
“अब तो अनगिनत (शरिया) समितियां हैं जिनमें से हर एक की धर्म को लेकर अपनी व्याख्या है।”
अलेप्पो की मुख्य शरिया अदालत ने ज़ोर देकर कहा है कि मोहम्मद क़ता की हत्या इस्लाम के नाम पर की गई है लेकिन हत्या गैर इस्लामी है और एक आपराधिक कृत्य है।
मारने वालों की मंशा जो भी हो- चाहे यह सरकार की एक क्रूर साज़िश हो या जिहादियों द्वारा इस्लाम की क्रूर और चरम व्याख्या- सच यह है कि सीरिया में विद्रोहियों वाले इलाकों में शरिया ज़ोर पकड़ रही है।