फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

भूखे लोग खा सकते हैं कुत्ते भीः फतवा

विज्ञापन
विज्ञापन
सीरिया में धर्मगुरुओं के एक समूह की ओर से जारी किए गए एक फतवे में कहा गया है कि घेराबंदी में भूख से मर रहे सीरियाई नागरिक कुत्तों या अन्य जानवरों का गोश्त खा सकते हैं। इस्लाम में आमतौर पर इन जानवरों का गोश्त नहीं खाया जाता है।
विज्ञापन


एक वीडियो में मुसलमान उलेमा ने कहा है कि भूख से मरने से बचने के लिए कुत्तों, बिल्लियों और गधों का गोश्त खाया जा सकता है।

बदतर हालात

यह फ़तवा दमिश्क के बाहरी इलाक़े मूआधमियां में भुखमरी से हो रही मौतों की खबरों के बाद आया है। विद्रोहियों के इस इलाक़े की सीरियाई सेनाओं ने घेराबंदी कर रखी है।

अस्थाई युद्धविराम के दौरान सैकड़ों सीरियाई नागरिक मूआधमियां से निकलने में कामयाब रहे। कुछ को स्ट्रेचरों पर डालकर लाया गया।

सीरिया में मानवीय मदद के काम में लगे संगठनों ने भी सरकार से इस इलाके तक पहुँच मुहैया कराने की अपील की थी। एजेंसियों के मुताबिक यहाँ अब भी बड़ी तादाद में नागरिक फँसे हैं।
विज्ञापन


ईद-उल-अज़हा के वक़्त पर जारी किए गए संदेश में धार्मिक उलेमा ने घौटा इलाक़े में बचे रह गए लोगों से कहा है कि वे आमतौर पर प्रतिबंधित जानवरों का भी माँस खा सकते हैं।

उलेमा ने कहा कि यह दुनिया से मदद के लिए एक आवाज़ है। यदि हालात और बदतर हुए तो जिंदा लोगों को मुर्दों की लाशों पर गुज़ारा करना पड़ेगा।

सीरिया विद्रोह के दौरान जारी किया गया यह इस तरह का पहला फ़तवा नहीं है।

ऐसे ही फ़तवे होम्स और अलप्पो शहर में छिड़ी भीषण लड़ाई के दौरान भी जारी किए गए थे।

मानवीय मदद

सीरिया में अंतरराष्ट्रीय संगठन ओपीसीडब्ल्यू रसायनिक हथियारों की जाँच के काम में लगा है।

सीरिया में मानवीय सहायता पहुँचाने का काम कर रही एजेंसियों का कहना है कि जितना महत्वपूर्ण काम सीरिया के रासायनिक हथियारों को नष्ट करना है उतना ही महत्वपूर्ण काम लड़ाई में फँसे आम लोगों तक खाने पीने की चीज़ें पहुँचाना भी है।

डॉक्टर्स विदआउट बॉर्डर्स संस्था के निदेशक क्रिस्टोफ़र स्टोक्स कहते हैं कि जब रासायनिक हथियारों का निरीक्षण कर रहे दल बिना रोक-टोक के कहीं भी आ जा सकते हैं तो फिर मानवीय मदद के काम में लगी एजेंसियों को क्यों रोका जा रहा है?

दमिश्क के बाहरी इलाक़ों मूअधमियां, ज़मालका और एन तारमा में 21 अगस्त को हुए रासायनिक हमले में सैकड़ों लोग मारे गए थे। जाँचकर्ता अभी तक यह तय नहीं कर पाए हैं कि ये रासायनिक हमला किसने किया था।
विज्ञापन

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें