स्वीडिश एकेडमी के विरोध में स्वीडन के करीब 100 से ज्यादा बुद्धिजीवियों ने पुरस्कार देने वाली वाली एक नई संस्था की स्थापना की है। साहित्य का नोबेल पुरस्कार प्रदान करने वाली एकेडमी पर उस समय संकट गहरा गया जब एक शख्स पर कई महिलाओं ने यौन दुर्व्यवहार के आरोप लगाए थे। नई संस्था के संस्थापकों के अनुसार यह पक्षपात, घमंड और यौन शोषण की निंदा करता है। इसके सदस्यों में लेखक, कलाकार और पत्रकार शामिल हैं। 107 बुद्धिजीवियों ने अपने संयुक्त बयान में कहा कि यह लोगों को याद कराने के लिए है कि साहित्य और संस्कृति बिना विशेषाधिकार के बड़े पैमाने पर लोकतंत्र, पारदर्शिता, सहानुभूति और सम्मान को बढ़ावा देना चाहिए।
जैसे कि मी टू अभियान ने वैश्विक स्तर पर जोर कर लिया है। स्वीडिश एकेडमी में नवंबर में उस समय खलबली मच गई थी, जब 18 महिलाओं ने एकेडमी के एक प्रभावशाली शख्स पर रेप और यौन दुर्व्यवहार के आरोप लगाए थे। वह शख्स काफी दिनों से संस्था से जुड़ा रहा है। इस खुलासा के बाद एकेडमी ने मई में इस वर्ष नोबेल साहित्य पुरस्कार नहीं देने की घोषणा की। मामले को निपटाने के तरीके को लेकर एकेडमी के 18 सदस्यीय सदस्यों में मतभेद उत्पन्न हो गया था। इस वजह से एकेडमी के स्थायी महिला सचिव सहित छह लोगों ने इस्तीफा दे दिया था।
नई एकेडमी 113000 डॉलर पुरस्कार देगी
नई एकेडमी के तहत साहित्य का पुरस्कार (10 दिसंबर) उसी दिन दिया जाएगा, जिस दिन नोबेल पुरस्कार दिया जाता है। पुरस्कार राशि के तौर पर 113000 डॉलर (77 लाख 70 हजार रुपये) दिया जाएगा। पुरस्कार के लिए राशि दान और क्राउड फंडिंग से एकत्र की जाएगी।