दक्षिण अफ्रीका के सोवेटो में स्वच्छ शौचालयों की मांग को लेकर वहां के लोगों ने पैंट उतारकर अजीब प्रदर्शन कर किया।
जानकारी के अनुसार, दक्षिण अफ़्रीका में समुचित शौचालय की मांग कर रहे इन प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने रबड़ की गोलियां चलाईं क्योंकि प्रदर्शन के दौरान वे लोग अपने नग्न नितंब दिखा रहे थे।
सोवेटो में सैकड़ों स्थानीय निवासियों ने बकेट टॉयलेट्स के ख़िलाफ़ प्रदर्शन करते हुए सड़क जाम कर दी।
रंगभेद के दौर में काले लोगों के रहने वाले इलाक़ों में एक बाहर रखने वाली बाल्टी दी गई थी, जबकि गोरों के रहने वाले उपनगरीय इलाक़ों में फ़्लश टॉयलेट्स की व्यवस्था थी।
यहां अभी भी चल रहा है अंग्रेजों के जमाने का कानून
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अब 'बकेट सिस्टम' को ख़त्म कर देना चाहिए।
साल 1994 में अल्पसंख्यक गोरों का राज ख़त्म होने के बाद अस्थाई कॉलोनियो में 2007 तक बकेट सिस्टम को बदल देने की एक सरकारी योजना बनाई गई थी।
जोहानेसबर्ग में मौजूद बीबीसी संवाददाता पुम्ज़ा फ़िहलानी के अनुसार दक्षिण अफ़्रीका में मूलभूत सुविधाओं के अभाव में विरोध प्रदर्शन आम बात हैं लेकिन ग़ुस्से का यह प्रदर्शन दुर्लभ है।
प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर फैलाई गंदगी
दक्षिण अफ़्रीकी पत्रकार संघ (सापा) ने पुलिस प्रवक्ता के माखुबेला के हवाले से कहा "वे (प्रदर्शनकारी) बकेट टॉयलेट्स व्यवस्था पर अपना आक्रोश व्यक्त करने के लिए सड़क पर अपनी पैंटे नीचे कर अपने नितंब दिखा रहे थे।"
यह प्रदर्शनकारी सोवेटो में उन घरों में रहते हैं जो रंगभेद काल के दौरान सिर्फ़ पुरुषों के रहने की जगह थी।
ग़ुस्साए लोग सड़कों पर उकड़ूं बैठ गए, जैसे कि वह निवृत्त हो रहे हों और कुछ ने तो मल से भरी बाल्टियां सड़कों पर उलट दीं।
दक्षिण अफ़्रीका के स्टार समाचार पत्र के अनुसार उन्होंने यह भी शिकायत की है कि प्रशासन ने तीन महीने से उनकी बाल्टियां ख़ाली नहीं की हैं।
कुछ इलाकों में अभी भी नहीं हैं शौचालय
पुलिस ने स्थिति को शांत करने के लिए इलाक़े के पार्षद (वार्ड काउंसिलर) को उनसे बात करने के लिए बुलाया।
पुलिस प्रवक्ता माखुबेला के अनुसार हालांकि प्रदर्शनकारियों को यह यक़ीन नहीं हुआ कि पानी और बिजली की उनकी अन्य दिक्कतें भी दूर की जाएंगी।
इसके बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए आसूं गैस और रबड़ की गोलियों का इस्तेमाल किया।
इस कार्रवाई में कोई घायल या गिरफ़्तार नहीं हुआ और ज़्यादातर प्रदर्शनकारी वहां से चले गए। अधिकारियों का अनुमान है कि पूरे देश में क़रीब तीन लाख घरों में अब भी बकेट सिस्टम है।
पिछले साल, दक्षिण अफ़्रीकी मानवाधिकार आयोग ने कहा था कि बकेट सिस्टम मानवाधिकारों का उल्लंघन है और सरकार को ज़ोर देकर कहा था कि इसे हटाने के लिए तुरंत एक सफ़ाई व्यवस्था की योजना तैयार करे।
दक्षिण अफ़्रीका के हालिया घरेलू सर्वे के अनुसार 2012 में देश के 5.3 फ़ीसदी घरों में बकेट टॉयलेट था या कोई भी शौचालय नहीं था। साल 2002 में यह आंकड़ा 12.3 फ़ीसदी था।