हंगरी के शोधकर्ताओं की एक टीम इसी महीने तुर्की के सबसे प्रसिद्ध सुल्तानों में से एक सुलेमान के दिल की खोज के बारे में एक रिपोर्ट प्रकाशित करने वाली हैं। लेकिन इस लगभग साढ़े चार सौ साल पुरानी ऐतिहासिक पहेली को सुलझाना इतना अहम क्यों है।
शोधकर्ता महान सुल्तान के दिल की खोज के लिए जमीन की खुदाई कर रहे हैं और अभिलेखागारों को खंगाल रहे हैं।
दरअसल, तुर्की और हंगरी के तत्कालीन शासकों के इतिहास से जुड़ी एक जगह है सिगेटवार। माना जाता है कि हंगरी की सीमा में पड़ने वाली इसी जगह पर महान सुल्तान सुलेमान के दिल को दफनाया गया था।
मुस्लिम तुर्कों ने सितंबर 1566 में आखिरकार सिगेटवार पर नियंत्रण कर लिया। लेकिन उन्हें बहुत नुकसान उठाना पड़ा जिसमें उनके नेता सुल्तान सुलेमान की मौत भी शामिल है।
यूनिवर्सिटी ऑफ पेक्स के भूगोल के प्रोफेसर नॉर्बर्ट पैप का कहना है, ''जब हंगरीवासी सिगेटवार के किले की जमीं पर चलते हैं तो वे सोचते हैं कि वे एक हंगेरियन किले से गुजर रहे हैं, लेकिन निश्चित तौर पर यह सही नहीं है। सही मायने में यह एक तुर्क किला है। हंगेरियन किला 1566 की जंग में तबाह हो गया था।"
दरअसल, सेलिक क्षेत्र की घुमावदार पहाड़ियों की तरह यहां के सिगेट किले पर नियंत्रण और उसके बाद के घटनाक्रम से जुड़ा इतिहास का हर पहलू एक दूसरों को छिपाने की कोशिश करता प्रतीत होता है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
महान सुलेमान अगस्त 1566 के शुरू में एक लाख ऑटोमन साम्राज्य के सैनिकों के साथ यहां आए। यह किला उनके विएना के रास्ते में पड़ता था, जिस पर वह कब्जा करने को लेकर आश्वस्त थे। और इसके पश्चिमी यूरोप का एक बड़ा इलाका उनके नियंत्रण में आ सकता था।
लेकिन किले के कमांडर मिक्लोस ज्रिनयी ने अपने केवल 2,300 सैनिकों के साथ उनका जमकर मुकाबला किया और उन्होंने तुर्क सैनिकों का रास्ता रोक दिया।
इसके बाद आखिरी आक्रमण के दौरान किले में लगी आग में ज्रिनयी की मौत हो गई।
वहीं सुलेमान की उनके तंबू में मौत हो गई। कुछ सूत्रों का कहना है कि अपनी जीत के उत्साह में उनकी मौत हुई। उस वक्त उनकी उम्र 72 साल थी और उन्हें हंगेरियनों से लड़ते हुए 40 साल बीत गए थे।
उनके शव को ऑटोमन साम्राज्य की राजधानी कॉस्टैंटिनोपल ले जाया गया, लेकिन उनके दिल को यहीं एक मकबरे में दफन कर दिया गया, जिसके स्थान पर बाद में एक कैथोलिक चर्च बन गया।
उस वक्त हंगरी या कहें ऑस्ट्रो-हंगेरियन साम्राज्य तुर्की के ऑटोनाम साम्राज्य का साथी था। प्रथम विश्वयुद्ध में ये दोनों साम्राज्य तबाह होने के कगार पर थे और इन्हें अपनी गहरी मित्रता को दिखाने के लिए प्रतीकों की जरूरत थी।
अब हंगरी और तुर्की के बीच अच्छे रिश्ते हैं। आज हंगरी आने वाले पर्यटकों में 45 फीसदी तुर्की के होते हैं।
'इतिहास भूगोल की परतें'
अब प्रोफेसर पैप को वो जगह तलाशनी है जहां असल में सुलेमान के दिल को दफनाया गया था।
प्रोफेसर पैप और उनकी टीम हर उस तथ्य को परख रहे हैं जिससे सच्चाई का पता चल सके। 20 सितंबर को उनके शोध के नतीजों को सार्वजनिक किया जाएगा।
इस शोध के लिए एक नई खुदाई करने की अनुमति दे दी गई है।
प्रो. पैप का कहना है, ''यह मामला केवल सुल्तान सुलेमान के दिल से नहीं जुड़ा है, बल्कि इससे 400 साल पुराने इतिहास और भूगोल के परतें एक दूसरे से जुड़ेंगी।''
निक थोरपे/बीबीसी न्यूज, सिगेट