बुर्किना फासो में फ्रांसीसी दूतावास और देश के सैन्य मुख्यालय पर हुए दो हमलों में 28 लोगों की मौत हो गई और 80 से अधिक लोग घायल हो गए। पश्चिम अफ्रीकी देश में ये हमले यहां बढ़ते खूनी और जिहादी संघर्ष का नतीजा माने जा रहे हैं। सरकार ने कहा कि सेना पर हमला एक आत्मघाती कार बम धमाका था और इस हमले का मकसद शायद जी-5 क्षेत्रीय आतंकवाद विरोधी दल की बैठक हो सकती है। बुर्किना फासो, चाड, माली, मौरिटानिया और निगार देशों के बीच यह समूह बना है जिन्होंने सहारा के दक्षिणी क्षेत्र में जिहादियों से मुकाबला करने के लिए संयुक्त सैन्य बल शुरू किया है।
फ्रांसीसी दूतावास और देश के सैन्य मुख्यालय को लक्ष्य करके आतंकियों ने किया हमला
रक्षामंत्री केलेमेंट सवादोगो ने बताया कि सशस्त्र बल के 8 सदस्यों को विस्फोट करके और इसी दौरा फ्रांसीसी दूतावास पर हमला करके 28 लोगों को मारा गया। मंत्री ने बताया कि आठ हमलावरों को भी मार गिराया गया है। रक्षामंत्री सवादोगो ने इसे एक आत्मघाती हमला बताया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक एक कार से कुछ बंदूकधारी बाहर निकले और दूतावास की तरफ जा रहे लोगों पर अचानक गोलीबारी करने लगे। दूसरी तरफ फ्रांस के विदेशमंत्री येन येव्स ली ड्रेन ने कहा है कि इसमें कोई शक नहीं कि ये एक आंतकवादी हमला था।
हालांकि ये अब तक साफ नहीं हो पाया है कि ये हमले किसने किए। पिछले दो सालों में ओगाडोगु में यह तीसरा बड़ा हमला है। इस्लामिक उग्रवादियों ने इस हमले की जिम्मेदारी ली थी। जनवरी 2016 में यहां एक होटल पर हुए हमले में 30 लोगों की मौत हो गई थी।
आतंकियों पर कार्रवाई के चलते हमले की संभावना
बुर्किना फासो पश्चिम अफ्रीकी देश है, जहां कई बार सैन्य तख्तापटल हो चुका है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के सत्ता में आने के बाद से फ्रांस ने पश्चिम अफ्रीका में इस्लामिक आतंकियों से निपटने के लिए यहां अपनी गतिविधियां बढ़ा ली है। ऐसे में हो सकता है कि इसी के विरोध में ये हमले हुए हों। राष्ट्रपति मैक्रों ने फिलहाल अपने देश के नागरिकों से कहा है कि वो हमले वाले जगह से दूर रहें।