श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना द्वारा पांच जनवरी 2019 को घोषित किए गए आकस्मिक चुनाव की वैधता को लेकर सर्वोच्च न्यायालय आज फैसला सुनाएगा। बता दें कि, सिरिसेना के इस फैसले के बाद संसद भंग किए जाने के खिलाफ 13 मौलिक अधिकार याचिकाएं दायर की जा चुकी हैं। ये याचिकाएं विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा दायर की गई थीं।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि संविधान में 19वें संशोधन के मुताबिक राष्ट्रपति के पास संसद भंग करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय से राष्ट्रपति द्वारा जारी की गई राजपत्र अधिसूचना को अमान्य करने की अपील की है। इसके साथ ही उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय से मांग की है कि 5 जनवरी को निर्धारित चुनाव को फैसला आने तक के लिए कारिज कर दिया जाए।