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पुरुषों में मची मेकअप की होड़

Sat, 08 Dec 2012 09:12 AM IST
बीबीसी हिंदी
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दक्षिण कोरियाई पुरुषों की छवि आमतौर पर मेहनती, शराब के शौक़ीन और देश के लिए बहादुरी से लड़ने को तैयार लोगों के रूप में होती है।
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दो साल की अनिवार्य सैन्य सेवा और सदियों से चली आ रही कन्फ्यूसियाई संस्कृति ने ज्यादातर पुरुषों को परंपरागत रूप से एक अलग ही छवि प्रदान कर दी थी जिसके बारे में युवतियां प्राय: शिकायत करने लगी हैं।

लेकिन अब देश की बड़ी कॉस्मेटिक कंपनियों को कोरियाई पौरूष का एक अलग चेहरा नज़र आने लगा है। अब कोरियाई पुरुष त्वचा की देखभाल वाले उत्पादों में ज्यादा दिलचस्पी लेने लगे हैं।
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लंदन स्थित बाजार सर्वेक्षण कंपनी यूरोमॉनिटर इंटरनेशनल के मुताबिक, वैश्विक आर्थिक संकट के बावजूद दक्षिण कोरिया में पिछले साल त्वचा की देखभाल वाले उत्पादों का बाजार 10 फ़ीसदी बढ़ा।

बढ़ा बाजार
देश की सबसे बड़ी कॉस्मेटिक बनाने वाली कंपनी एमोर पैसिफ़िक का कहना है कि ये वृद्धि 14 फीसदी तक थी।
कंपनी के मुताबिक दक्षिण कोरिया में कॉस्मेटिक उत्पादों का बाजार सालाना 90 करोड़ डॉलर का है।

26 साल के यू जीन एक बिज़नेस मैनेजमेंट छात्र हैं जो कि अपने चेहरे पर एक लोकप्रिय फाउंडेशन इस्तेमाल करते हैं जिसका नाम है बीबी क्रीम।

इसके साथ ही वो त्वचा की देखभाल करने वाले पांच अन्य उत्पाद भी इस्तेमाल करते हैं जिनमें फेशियल क्लेंज़र, एन्टी एजिंग मॉश्चराइज़र और आंखों की क्रीम शामिल है।

वो कहते हैं, "मेरे चेहरे पर बहुत मुहांसे थे, लेकिन बीबी क्रीम ने मेरे चेहरे को बहुत बेहतर बना दिया है और लोग अब कहने लगे हैं कि मैं ज़्यादा हैंडसम लग रहा हूं।" बीबी क्रीम का इस्तेमाल मूलत: प्लास्टिक सर्जरी उद्योग में उपचार के बाद मरीज़ों के दाग़ मिटाने में होता है।

बीबी क्रीम
अब इस क्रीम का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर महिलाएं और पुरुष दोनों प्रतिदिन कर रहे हैं। यू जीन बताते हैं कि बीबी क्रीम का इस्तेमाल उन्होंने तब शुरू किया था जब वो सेना में थे और सूर्य की तेज़ किरणों से बचाव के लिए इसका प्रयोग करते थे।

'एमोर पैसिफ़िक' के लिम जुंग शिक का आकलन है कि दक्षिण कोरिया के क़रीब 20 फ़ीसदी पुरुष कभी-कभी चेहरे पर फाउंडेशन लगाते हैं और अब इसे बुरा नहीं माना जाता, इससे कोरियाई पुरुष की पारंपरिक छवि प्रभावित नहीं होती।

वो कहते हैं, "पश्चिम में अगर लड़के मेकअप लगाएं और कुछ युवक अगर मेकअप स्टोर में चले जाएं तो लोग यही समझेंगे कि वो समलैंगिक हैं, लेकिन दक्षिण कोरिया में ऐसा नहीं है।"

दक्षिण कोरिया एक बेहद प्रतियोगी देश है जहां विकसित देशों में लोग सबसे ज़्यादा घंटों तक काम करते हैं। यहां स्कूल छोड़ने वाले 80 फीसदी बच्चे उच्च शिक्षा हासिल करते हैं और बड़ी कंपनियों में नौकरी के लिए बहुत कड़ी प्रतियोगिता है।

युवाओं में बेरोज़गारी का प्रतिशत राष्ट्रीय औसत का दोगुना है। यू जिन कहते हैं कि ऐसे माहौल में प्रतियोगिता में सफलता हासिल करने के लिए आप क्या नहीं करना चाहेंगे।

महिलाओं की नज़र
वो कहते हैं, "लड़के अगर मेकअप करते हैं तो इसका मतलब ये नहीं है कि हम स्त्रैण दिखना चाहते हैं, हम तो बस ये चाहते हैं कि अच्छा दिखें। यहां रोज़गार का माहौल काफी प्रतियोगी है। अगर आप आकर्षक दिखते हैं तो लोग आपके बारे में बेहतर राय बनाते हैं।"

लेकिन दक्षिण कोरिया की महिलाएं इस बदलाव के बारे में क्या सोचती हैं। राजधानी सिओल में कॉस्मेटिक की एक दुकान पर खरीदारी कर रही एक महिला कहती हैं, "पुरुष अपना ख़्याल रख रहे हैं, आकर्षक दिखना चाह रहे हैं, ये तो अच्छी बात है।"
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लेकिन आइलाइनर और लिपिस्टिक का इस्तेमाल करने वाले पुरुषों के बारे में उनकी राय इतनी अच्छी नहीं थी।

पुरुषों में आकर्षक दिखने का ये नया ट्रेंड आगे क्या रूप लेगा ये कहना मुश्किल है लेकिन बीबी क्रीम ने तो समाज में अपनी जगह बना ली है।

टेलिविज़न पर दिखने वाले विज्ञापनों में अब पुरुषों के कॉस्मेटिक उत्पाद भी महिला उत्पादों के साथ होड़ लगा रहे हैं। यहां तक कि टीवी पर पुरुषों के आकर्षक दिखने पर अब पूरे कार्यक्रम बनने लगे हैं।
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