उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन ने शुक्रवार को दक्षिण कोरिया की सीमा पर राष्ट्रपति मून जे इन से ऐतिहासिक मुलाकात की। नतीजा भी वक्त के पन्नों में दर्ज हो गया। दोनों नेताओं में कोरियाई प्रायद्वीप को परमाणु हथियारों से पूरी तरह मुक्त बनाने और शांति स्थापित करने पर सहमति बनी। 65 साल लंबी दुश्मनी भूलकर दोनों देश करीब आते नजर आए।
किम और मून ने पनमुनजोम घोषणापत्र पर हस्ताक्षर करने के बाद गले भी मिले। पनमुनजोम में हुई मुलाकात में सहमति बनी कि वे छह दशक पहले छिड़े कोरियाई युद्ध को इस साल स्थायी रूप से खत्म कर देंगे क्योंकि 1953 में दोनों देशों में युद्ध विराम हुआ था, शांति समझौता नहीं। मून जल्द ही प्योंगयांग भी जाएंगे। दोनों नेता नियमित बैठक करने और फोन पर सीधे बातचीत को भी राजी हुए। कुछ महीने पहले जब उत्तर कोरिया लगातार परमाणु बम और मिसाइल परीक्षण कर रहा था, तब इस मुलाकात के बारे में सोचा भी नहीं जा सकता था।
बिना दर्द के जीत नहीं : किम
दक्षिण कोरिया की सीमा में पहुंचते ही किम भावुक दिखे। उन्होंने गर्मजोशी के साथ मून से हाथ मिलाया और वादा किया कि वे एक समझौते तक पहुंचेंगे। इससे दोनों देशों में सहयोग बढ़ेगा और फिर युद्ध का इतिहास नहीं दोहराया जाएगा। उन्होंने कहा, कुछ गलतियां और कमियां हमारी ओर से भी रही होंगी, पर जीत बिना दर्द के हासिल नहीं होती। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस बातचीत का स्वागत किया है। जल्द ही उनकी भी किम से मुलाकात हो सकती है।