सरकार देश की अर्थव्यवस्था को कैशलेस बनाना चाहती है। डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा दिया जा रहा है। लोगों को नकद लेन-देन से गुरेज करने को कहा जा रहा है। पिछले साल नवंबर में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी का एलान किया, तो उसका एक मकसद देश में नकद रहित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना था।
मगर, तमाम कोशिशों और दावों के बावजूद हमारे देश में नकदी के प्रति लोगों का लगाव कम नहीं हुआ है। नोटों की कमी दूर होते ही नकद लेन-देन कमोबेश वापस उसी स्तर पर पहुंच गया है, जितना 8 नवंबर 2016 से पहले था।
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हमारे यहां कैशलेस इकोनॉमी की सरकार की पुरजोर कोशिश भी नाकाम है। मगर, एक देश ऐसा भी जहां सरकार के बिना कोशिश किए हुए ही देश कैशलेस होता जा रहा है। ये देश न तो भारत की तरह तेजी से बढ़ता हुआ बाजार है। न ही तकनीकी क्रांति का गवाह। पर, इस देश के लोग आज 80 फीसद लेन-देन कैशलेस तरीके से कर रहे हैं।
ठेला गाड़ी में लादकर लोग ले जाते हैं नोट
इस देश का नाम है सोमालीलैंड। उत्तरी अफ्रीका में अदन की खाड़ी के करीब स्थित सोमालीलैंड 1991 में सोमालिया से अलग होकर नया देश बना था। हालांकि अब तक किसी देश ने इसे मान्यता नहीं दी है। मगर करीब 40 लाख की आबादी वाला ये देश खुदमुख्तार जम्हूरियत का दावा करता है।
सोमालीलैंड बेहद गरीब देश है। यहां से सबसे बड़ा निर्यात ऊंटों का होता है। आधा इलाका रेतीला है। बाक़ी हिस्सा अक्सर सूखे का शिकार रहता है। नतीजा, सोमालीलैंड में भयंकर गरीबी है।
यहां की करेंसी शिलिंग है, जिसकी कोई औकात नहीं। एक अमेरिकी डॉलर के लिए आपको 9 हजार शिलिंग के नोट देने होंगे। सोमालीलैंड की शिलिंग के पांच सौ और हजार के नोट चलन में हैं। आप को एक सिगरेट भी लेनी होगी, तो पांच सौ या हजार का नोट चाहिए होगा। झोला भर सब्जी खरीदने के लिए झोला भरकर नोट ले जाने होंगे।
अगर सोमालीलैंड में किसी ने कहीं कोई गहना खरीदने की सोची तो उसे ठेला गाड़ी में लादकर शिलिंग के नोट ले जाने होंगे। आप ये जानकर हैरान होंगे कि यहां पर एक पहिए वाली ठेला गाड़ी खूब चलती है। राजधानी हर्गीशा के बाजारों में आप को अक्सर लोग ठेला गाड़ी पर नोट लादकर चलते हुए मिल जाएंगे।
मुद्रा के अवमूल्यन और करेंसी के रद्दी में तब्दील होने की वजह से सोमालीलैंड में ज्यादातर लोग कैशलेस लेन-देन करते दिखेंगे। आपको सिगरेट लेनी हो, यहां की प्रिय ड्रग खट लेनी हो, या फिर कपड़े-लत्ते। आप हर चीज का पेमेंट मोबाइल से कर सकते हैं।
सोमालीलैंड में आपको भिखारी भी मोबाइल से लेन-देन करते दिखेंगे। वजह ये है कि छोटी-मोटी खरीदारी के लिए भी आपको झोला भर कर नोट चाहिए। अब इतना पैसा लादकर कोई कहां तक चले? इसलिए सोमालीलैंड में आज अस्सी फीसद कारोबार कैशलेस हो गया है।
चाहे फुटपाथ पर सब्जी और कबाड़ बेचने वाला हो या फिर चमकती दुकानों में बैठे धन्ना सेठ। कहीं भी चले जाएं, सोमालीलैंड में आप को बस अपने मोबाइल से दुकानदार का मोबाइल नंबर और कोड दर्ज करना है। पैसे आपके अकाउंट से दुकानदार के खाते में चले जाएंगे।