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'आंख के बदले आंख' की सजा या इंतकाम ?

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सोशल मीडिया पर ईरान के कुछ यूजर्स कुछ अपराधों की कड़ी सजा की पैरवी करते दिख रहे हैं। उनका कहना है कि तेजाब फेंकने वाले अपराधी को अंधा कर दिया जाए। लोगों का कहना है कि इसकी सजा भी जुर्म की गंभीरता के अनुपात में होनी चाहिए। ईरानी समाचार एजेंसी तस्नीम के मुताबिक कोम शहर की एक घटना में एक व्यक्ति की आंख पर एसिड फेंकने वाले व्यक्ति की एक आंख जबरन निकाल दी गई थी।
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हालाँकि उस आदमी की दूसरी आंख भी निकाली जानी थी, लेकिन फिलहाल सजा टली हुई है। अपराधी को दस साल की सज़ा भी दी गई है और पीड़ित के परिवार को मुआवजा देने का भी आदेश दिया गया है।

समाचार एजेंसी का कहना है कि देश में यह पहली बार हुआ है कि सज़ा के तौर पर किसी के आंख की रोशनी छीन ली गई है। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्था एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इस घटना की निंदा करते हुए सज़ा को 'बदले की क्रूर कार्रवाई' करार दिया है।
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सोशल मीडिया

संस्था से जुड़ी राहा बहेरिनी ने कहा, "यह सजा ईरान की क्रूर न्याय प्रणाली का पर्दाफाश करती है और यह भी साफ हो गया है कि ईरान की सरकार मानवता की कद्र नहीं करती।" पता चला कि बहुत से ईरानी लोग सोशल मीडिया पर इस फैसले का समर्थन कर रहे हैं।

फेसबुक पर परवाने अमिदी लिखती हैं, "यह कोई हादसा नहीं था जिसे माफ कर दिया जाए। यह पूरी तरह से सोच-समझकर किया गया था, इसलिए सजा के तौर पर आंख के बदले आंख की बात बनती है।"

निर्दोष पर हमला

एक अन्य व्यक्ति ने लिखा, "एमनेस्टी इंटरनेशनल को उनकी बकवास करने दो। वे लोग कहां थे जब इस जानवर ने एसिड फेंक कर उस व्यक्ति को अंधा कर दिया था।

"फेसबुक यूजर मारी कूही कहती हैं, "मुझे हिंसा पसंद नहीं, लेकिन एमनेस्टी इंटरनेशनल तब क्या करती जब ऐसे लोग निर्दोषों पर तेजाब फेंकते हैं?" इंटरनेट पर एक अन्य व्यक्ति ने कहा, "इतना काफी नहीं है। जजों को अपराधी के चेहरे पर ही तेज़ाब फेंक देना चाहिए था।"
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बर्बर सजा

इस फैसले ने ईरान की सोशल मीडिया और समाचार वेबसाइट पर बड़ी बहस छेड़ दी है। कई लोग ऐसे भी हैं जो इस फैसले की मुखालफत कर रहे हैं। एक ट्विटर यूजर ने कहा, "किसी का सिर कलम करने की इस्लामिक स्टेट की हरकत से यह सजा हजार गुना ज्यादा बर्बर है।" @Botri_dar_AB ने ट्वीटर पर लिखा, "यह सरकार की निर्दयता की इंतेहा है।"

उधर, एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी अपने पक्ष का बचाव किया है। संस्था के प्रवक्ता नील डुर्किन ने कहा, "पीड़ित के अधिकार की पैरवी करने वाले लोग हमें गलत पेश करने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसा नहीं कि हम पीड़ितों की परवाह नहीं करते, हम उनकी परवाह करते हैं।"

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