सीरियाई शहर अलेप्पो में विद्रोहियों और सरकार के नियंत्रण में बंटे इलाकों को जोड़ने वाली आखिरी जगह है बुस्तान अल-क़सर।
सैकड़ों लोग रोज़ पढ़ने, खाने का सामान लेने, काम पर जाने के लिए यहां से जान हथेली पर रखकर एक से दूसरी तरफ़ जाते हैं क्योंकि छतों पर बंदूकधारी छुपे होते हैं।
अलेप्पो के इस इलाके में हमेशा तनाव रहता है क्योंकि कोई नहीं जानता कि कब किसे गोली लग जाए।
इलाके के एकमात्र डॉक्टर सैम कहते हैं, “आज दोपहर मैंने एक बच्चे का इलाज किया जिसकी बांह पर गोली लगी थी। ज़्यादातर बच्चे ही होते हैं। मुझे लगता है कि बंदूकधारी बच्चों को निशाना बना रहे हैं, सिर्फ़ बच्चों को।”
'ज़िंदा रहना है, क्या करें'
डॉक्टर सैम 25 साल के हैं। सैम के पिता सीरिया से जाकर कनाडा में बस गए थे। वह बताते हैं, “हृदयरोग विशेषज्ञ बनने के लिए मेरी पढ़ाई का बस एक साल और बचा था।” लेकिन तभी उन्हें लगा कि उन्हें सीरिया में होना चाहिए।
अब वह उस फ़ील्ड क्लीनिक के एक कमरे में रहते हैं जहां वह काम करते हैं।
डॉक्टर सैम बताते हैं, “सामान्यतः मैं हर रोज़ 10 लोगों का इलाज करता हूं लेकिन शुक्रवार को स्थिति ज़्यादा ख़राब होती है। शनिवार को यहां 30 लोगों को गोली मारी गई।”
गोली की आवाज़ आती है तो बाज़ार में ज़्यादातर लोग इमारतों की दीवारों से सट जाते हैं, जैसे कि इससे वह बच जाएंगे।
लेकिन भाग्यवादी लोग इसकी परवाह किए बिना बीच सड़क पर चलते रहते हैं।
बुस्तान अल-क़सर के बाज़ार में क्लिक करें तनाव पसरा रहता है। एक दुकानदार ने मुझे बताया, “शुरुआत में हम यहां से दूर रहे। लेकिन फिर हमने वापस आना शुरू कर दिया। हमें ज़िंदा रहना है। हम और क्या कर सकते हैं?”
सारा एक एक्टिविस्ट और छात्रा हैं। उनका घर विद्रोहियों के कब्ज़े वाले इलाके में है और विश्वविद्यालय सरकारी नियंत्रण वाले क्षेत्र में।
परीक्षाओं के दौरान वह तकरीबन हर रोज़ इस इलाके से उस इलाके में जाती थीं- यह तय करके कि अच्छा प्रदर्शन करना है। एक दिन जब वह वापस लौटीं तो 15 क्लिक करें लोग मारे जा चुके थे।
वह पास तो हो गईं लेकिन परीक्षा में मिले अंकों से वह निराश हैं। कहती हैं, “मैंने पिछले साल बेहतर प्रदर्शन किया था।”
मैंने जवाब दिया, “अचरज की कोई बात नहीं।”
धर्मसंकट
अलेप्पो में कई परिवार ऐसे हैं जो सिर्फ़ तभी खाना ले सकते हैं जब वे विरोधियों के इलाके में जाएं।
कुछ समय पहले तक चेकपॉइंट विद्रोही सैनिकों के एक गुट के कब्ज़े में था जो पहले से बदहाल लोगों से पैसा उगाहने की कोशिश करते थे।
पिछली बार जब मैं बुस्तान अल-क़सर आई थी तो उन्होंने मेरा कैमरा छीनने की कोशिश की थी। तभी एक निशानेबाज़ ने गोली चला दी और उस गफ़लत में मैं बच निकली थी।
अब चेकपॉइंट पर शहर के सबसे बड़े विद्रोही गुट अहरार सुरेया का कब्ज़ा है।
मुझे शहर के विद्रोही नियंत्रित हिस्से में शरीया अदालत पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी अबु यासिन से मिलने के लिए ले जाया गया। शरीया अदालत पुलिस अब बुस्तान अल-क़सर को नियंत्रित करती है,
अबु यासिन ने उस कोने में एक इमारत की ओर इशारा किया जहां मुख्य सड़क में एक दिशा से आ रही सड़क मिलती है। वहां सरकार के कब्ज़े वाली एक इमारत की मीनार पर निशानेबाज़ तैनात हैं।
वह कहते हैं, “वहां 72 निशानेबाज़ हमारी ओर बंदूकें ताने हैं। और वह हमेशा नागरिकों को ही निशाना बनाते हैं।”
विद्रोहियों के कब्ज़े वाले क्षेत्र में कुछ लोग चाहते हैं कि आवाजाही को पूरी तरह रोक दिया जाए।
शुक्रवार को प्रदर्शनों के बाद लोग अब लोकतंत्र, आज़ादी या मानवाधिकारों की मांग नहीं करते। वह चाहते हैं कि पहले से ही जर्जर शहर को पूरी तरह तोड़ दिया जाए।
हालांकि बुस्तान अल-क़सर को बंद करने से सरकार के ख़बरियों को विद्रोहियों की तरफ़ आने से रोका जा सकता है लेकिन इससे बहुत से लोगों को दिक्कत हो जाएगी।
इसका मतलब होगा कि सारा पढ़ाई नहीं कर पाएगी और सरकारी इलाके में कुछ परिवारों के लिए भुखमरी की नौबत आ सकती है क्योंकि चाहे कितनी ही अस्तव्यस्त हो, कितनी ही जानलेवा हो बुस्तान अल-क़सर एक जीवनरेखा है।
यह एक विभाजित शहर को ज़िंदगी देने वाली अकेली रक्तवाहिनी है और बहुत से लोगों का एकमात्र विकल्प भी।
अलेप्पो का धर्मसंकट बुस्तान अल-क़सर में गुंथी ज़िंदगियों से समझा जा सकता है - अपने फ़ील्ड क्लीनिक में सैम, अपने लेक्चर नोट्स लेने के विश्वविद्यालय जाने वाली सारा और निशानेबाज़ों की आंखों के आगे व्यापार करते दुकानदार, अपनी ज़िंदगी ऐसी जंग के बीच जी रहे हैं जो उन्होंने नहीं चुनी थी।
हान्ना लुसिंडा स्मिथ/अलेप्पो, सीरिया से